
कोटा .
कोटा का दाढ़ देवी मंदिर
शैली में चूना-पत्थर से बने इस मंदिर को बारह कलात्मक खंभों का सहारा दिया गया है। मंदिर के सामने एक हौज है जिसमें जमीन के अंदर से पानी आता है। साल के दोनों नवरात्रों में यहां मेला लगता है जिसमे भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। यहां शिव तथा काल भैरव के भी मंदिर हैं।
दुर्गा जी के इस नाम के पीछे एक जनश्रुति चली आ रही है, कहते हैं एक बार कोटा के राजा उम्मेद सिंह की दाढ़ में भयंकर दर्द उठा।
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जमाने भर के इलाज करवाने पर भी उनका कष्ट कम नहीं हुआ तो उन्होंने इसी मंदिर में जा माँ दुर्गा देवी की पूजा-अर्चना की जिससे उनका रोग ख़त्म हो गया। तब उन्होंने एक और मंदिर का निर्माण करवा इस मंदिर की प्रतिमा को नए मंदिर में स्थापित करना चाहा पर उनकी लाख कोशिशों के बावजूद मूर्ति टस से मस नहीं हुई। इसे माँ की इच्छा समझ, उन्हें वहाँ से हटाने की कोशिश छोड़, वहीँ यथावत उनकी पूजा होती आ रही है।
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जगतमाता मंदिर
शहर के बीच परकोटे के भीतर जगत माता मंदिर मर देवी के नौ रूप विराजित है | मंदिर में जगतमाता की प्रतिमा प्राचीन बतायी जाती है | कई श्रद्धालु मंदिर में मन्नतो के धागे बांधकर है |
बीजासन माता मंदिर
कोटा में बीजासन माता का मंदिर कुन्हाड़ी में स्थित है | मान्यता है की बीजासन माता की परिक्रमा करते करते लोगो के हाथ पेरो की निशक्तता दूर हो जाती है |
करनी माता मंदिर
करनी माता के गुणगान व चमत्कार सुनकर उनकी आस्था बढाती गयी | मारवाड़ से करनी माता की मूर्ति बनवाकर यहाँ मंगवाई गयी ोे स्थापना की गयी |
Published on:
22 Mar 2018 06:02 pm
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