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कोटा . पूरे भारत देश में छोटे से छोटा गांव हो या बड़े से बड़ा शहर, हर जगह की अपनी एक विशेष संस्कृति है और हर जगह अपने अलग खान पान का चलन है, और वो चलन भी ऐसा की जिसे दूर दूर के लोग पसंद करते हैं|
जैसे कभी अगर हमारे सामने पोहे का ज़िक्र आ जाये तो दिमाग में खुद ब खुद ही इंदौर का नाम भी आ जाता है क्योंकि इंदौरी पोहा है ही इतना फेमस, लेकिन इंदौर से ही कुछ 250 किलोमीटर की दूरी पर, राजस्थान के कोटा जिले में स्थित एक छोटा सा क़स्बा और है जहाँ भी पोहे का प्रचलन इंदौर से कम नहीं है तो आइये जानते हैं की कौनसी है वो जगह-:
प्रसिद्ध है रामगंजमंडी का पोहा
जी हाँ कोटा जिले में स्थित रामगंजमंडी का पोहा भी काफी प्रसिद्ध है जिसे यहाँ से सटे गांव और शहर के लोग भी काफी पसंद करते हैं | दरअसल कोटा जिले के रामगंजमंडी कस्बे से मध्यप्रदेश की सीमा महज दस किलोमीटर दूर है इसीलिए यहाँ मध्यप्रदेश के खान पान का खासा असर देखने को मिलता है |
यहाँ के स्थानीय लोग भी सुबह के नाश्ते में ज़्यादातर पोहा ही पसंद करते हैं, या यूँ कह सकते हैं कि नगर में पोहे का स्वाद लोगों की जुबां पर चढ़ गया है। एेसा कोई दिन नहीं जाता जब लोग पोहे का नाश्ता नहीं करते हों। शहर के रेस्टोरेंट हो या फुटपाथ पर लगे ठेले, सब जगह अलसुबह ही पोहे तैयार करने का काम शुरू हो जाता है और थोड़ी ही देर में यहाँ लोग पोहे का नाश्ता करते नजर आते हैं।
कम समय में हो जाता है तैयार, हर माह होती है 300 क्विंटल की बिक्री
पोहे का नाश्ता कम समय में ही तैयार हो जाता है। इसे तैयार करने में ज्यादा झंझट नहीं रहता। साथ ही इसे सबसे सस्ता नाश्ता भी माना जाता है। मात्र पांच से दस रुपए प्लेट में यहां पोहा मिलता है और एक प्लेट पोहा खाने के बाद आपको चार घंटे तक भूख नहीं लगेगी।
पोहा विक्रेता निलेश जैन का कहना है कि रामगंजमंडी क्षेत्र में पोहा की प्रतिमाह 300 क्विंटल की बिक्री है। ये वो आंकड़ा है जिसकी बिक्री रामगंजमंडी से होती है क्योंकि अलग अलग पोहे के थोक विक्रेताओं से यह बिक्री होती है। कुछ दुकानदार सीधे इंदौर से भी कच्चे पोहे मंगाते हैं। जो अतिरिक्त है। किराना व्यवसायी जगदीश गुप्ता बताते हैं कि रामगंजमंडी क्षेत्र मे पैकिंग में भी पोहा बिकता है और किराने की हर दुकान पर यहां कच्चे पोहे की बिक्री होती है।
वहीँ अगर पक्के यानि कि तैयार मिलने वाले पोहे की बात करें तो सुबह के समय दुकानों पर करीब चार क्विंटल पोहा रोजाना बिकता है। घरों में भी रोजाना इससे ज्यादा खपत होती है क्योंकि सैकड़़ों घरों में रोजाना नाश्ते के तौर पर पोहा बनता है वहीँ शहर के कई घरों में तो पोहा रोजाना की दिनचर्या में शामिल हो गया है। चाहे बच्चों का लंच बॉक्स हो या साहब के लिए दफ्तर जाने से पहले का नाश्ता। सबके लिए पोहा ही बनता है। हां स्वाद जरूर अलग-अलग होता है।
चार दशक से है यहाँ पोहे का चलन
मध्यप्रदेश के इस नाश्ते का प्रचलन रामगंजमंडी में करीब चार दशक से है। पहले मध्यप्रदेश से आने वाले दुकानदारों ने यहाँ इसकी शुरुआत की थी और इक्का- दुक्का दुकानों पर ही पोहा बनाया जाता था। किन्तु वर्तमान समय में रामगंजमंडी क्षेत्र के प्रमुख कस्बों में हर दूसरे रेस्टोरेंट पर यह उपलब्ध है।
मध्यप्रदेश से आया, बदलता जायका लोगों को भाया
जानकारों की मानें तो यहां पोहा मध्यप्रदेश से आया है। मध्यप्रदेश में पोहे का चलन काफी सालों से है। इस कारण मध्यप्रदेश की सीमा से लगे क्षेत्र रामगंजमंडी में भी पोहे का चलन काफी है। और इतना ही नहीं समय समय पर यहाँ बनने वाले पोहे के जायके में भी बदलाव आया है|
जब यहां पोहे का चलन हुआ तो पोहे में प्याज का मिश्रण ज्यादा रहता था। चीनी नहीं डाली जाती थी। मसाले में लाल मिर्च का तड़का व हरी मिर्च का पुट रहता था।
समय के साथ इसमें परिर्वतन होता गया। बाद में लोग इसमें हल्दी डालने लगे। पोहे के साथ प्याज अब ऊपर से डाला जाता है और साथ ही नींबू व चीनी डालकर इसे खट्टा मीठा भी बनाया जा रहा है।
क्या कहते हैं डॉक्टर
पोहा जल्दी पचने वाला नाश्ता है। पोहे में कार्बोहाईडे्रट व वसा की मात्रा होती है। पोहा खाने के बाद शरीर को दो तरह से ऊर्जा मिलती है। शरीर में कार्बाहाईडे्रट व वसा से ग्लूकोज की पूर्ति होती है और हल्का नाश्ता होने के कारण यह जल्दी पच भी जाता है जिससे किसी तरह का कोई नुकसान नहीं होता लेकिन शुगर यानि मधुमेह रोगियों के लिए पोहा नुकसानदायक है।
-राजीवलोचन, चिकित्साप्रभारी रामगंजमंडी सामुदायिक चिकित्सालय
Published on:
30 May 2018 12:58 pm
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