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Fertilizer: चुनावी साल में किसानों की बल्ले-बल्ले, खाद के लिए नहीं झेलनी पड़ रही मारामारी

रबी सीजन के लिए उर्वरक की कमी से किसानों को हर साल परेशान होना पड़ता है। लेकिन इस बार चुनावी साल में किसानों की बल्ले-बल्ले हो गई।

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रबी सीजन के लिए उर्वरक की कमी से किसानों को हर साल परेशान होना पड़ता है। सरकार के स्तर पर आपूर्ति की माकूल न्यवस्था नहीं होने से किसानों को खाद के लिए काफी भाग दौड़ करनी पड़ती थी। लेकिन इस बार चुनावी साल में किसानों की बल्ले-बल्ले हो गई। चुनावी साल में किसानों को समय पर उर्वरक मिलने से सम्भाग में कहीं भी खाद के लिए मारामारी नहीं देखी गई।

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सम्भाग के किसानों का कहना है कि ऐसा पहली बार हुआ है कि सरकार ने समय पर किसानों को खाद उपलब्ध करवाया है। हर साल सुबह से शाम तक कतार में लगने के बाद भी खाद किसानों को नहीं मिल पाता था। सरसों की बुवाई हो चुकी, गेहूं व चना की बुवाई चल रही है, लेकिन कहीं भी डीएपी की कमी नहीं आई। इसी तरह यूरिया भी मांग के अनुरूप किसानों को अभी तक तो मिल रहा है। यह सब चुनावी सीजन की देन है। मांग के अनुरूप अभी और खाद मिलने की संभावना जताई जा रही है।

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सीजन में 3.35 लाख मिट्रिक टन यूरिया की जरूरत
अतिरिक्त निदेशक कृषि विस्तार खेमराज शर्मा ने बताया कि सम्भाग में रबी सीजन के लिए 3.35 लाख मिट्रिक टन यूरिया व 1.60 लाख मिट्रिक टन डीएपी की जरूरत पड़ती है। अभी तक किसानों ने 125810.5 लाख मिट्रिक टन व 36631.9 लाख मिट्रिक टन डीएपी किसान खरीद चुके है। अभी 54475.5 मिट्रिक टन यूरिया व 10635.6 मिट्रिक टन डीएपी की उपलब्धता है। उन्होंने बताया कि 7004.9 मिट्रिक टन यूरिया व 960 मिट्रिक टन डीएपी की रैक रवाना हो चुकी है जो शीघ्र ही उपलब्ध हो जाएगी। साथ ही डीएपी व यूरिया के सप्लीमेंट एनपीकेएस, एसएसपी, एमओपी, कम्पोस्ट आदि की भी उपलब्धता है और किसान इन्हें भी खरीद रहे हैं।