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बारिश में गांव की राह रोक देता है नाला, बरसो से पीड़ा भोग रहे ग्रामीण

कोटा

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Newsdesk

Aug 15, 2026

Rajasthan

- कई बार प्रशासन व जन प्रतिनिधीयो को करवाया अवगत

बारां. आजादी के 79 वर्ष पूरे होने के बाद भी जिले के कई गांव आज भी मूलभूत सुविधाओ से वंचित है। ऐसे में गांवो से देश के विकास की परिकल्पना धक्का सा लगता है।
विकास के बड़े.बड़े दावों और ग्रामीण क्षेत्रों तक मूलभूत सुविधाएं पहुंचाने की सरकारी योजनाओं के बावजूद ग्राम पंचायत तिसाया के खेड़ली कैशो गांव बुनियादी सुविधा से वंचित है। गांव की वर्षों से बदहाल स्थिति है और बरसात शुरू होते ही ग्रामीणों की परेशानी कई गुना बढ़ जाती है। जगह-जगह गहरे गड्डे कीचड़ और जलजमाव के कारण लोगों का पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है। कई वर्षों से यहां नाले की रपट जर्जर अवस्था में है। आज तक इस रपट और रास्ते का निर्माण नहीं कराया गया। जबकि इसी रास्ते से खेड़ली कैशो, टापरिया, मानपुरा व आसपास के कई गांवों के लोग यहां से गुजरते हैं। यह मार्ग मांगरोल से सीधा सम्बलपुर को जोड़ता हैं। रास्ते की खराब स्थिति के कारण बच्चों की पढ़ाई, किसानों की खेतीबाड़ी, मरीजों का इलाज और दैनिक जीवन पूरी तरह प्रभावित हो रहा है। बरसात के दिनों में थोड़ी सी बरसात में ही यह रपट गांव की राह को रोक देती है, जिससे लोगों को जान जोखिम में डालकर आवागमन करना पड़ता है।
स्थानीय लोगों ने इस मार्ग की समस्या को लेकर कई बार पंचायत प्रतिनिधियों, जनप्रतिनिधियों तथा संबंधित विभाग के अधिकारियों से गुहार लगाई। कई बार मौखिक शिकायत भी की गई, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिला है। हर चुनाव में पुलिया निर्माण का वादा किया जाता है। लेकिन चुनाव समाप्त होते ही यह मुद्दा भी ठंडे बस्ते में चला जाता है। वर्षों बीत जाने के बावजूद ग्रामीण आज भी उसी जर्जर पुलिया पर चलने को मजबूर हैं।
सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों को उठानी पड़ती है। छोटे-छोटे बच्चे रोज इसी रास्ते से स्कूल जाते हैं। बरसात के दिनों में रपट पर कीचड़ और पानी भर जाने से कई बार बच्चे फिसलकर गिर जाते हैं। अभिभावकों को भी बच्चों की सुरक्षा की चिंता सताती रहती है। कई बच्चे बारिश के दिनों में स्कूल जाने से भी वंचित रह जाते हैं।
अस्पताल या अन्य आवश्यक कार्यों के लिए इसी रास्ते का उपयोग करना पड़ता है। बरसात के दौरान पुलिया की हालत इतनी खराब हो जाती है कि पैदल चलना भी कठिन हो जाता है। गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को अस्पताल ले जाने में भारी दिक्कत होती है। कई बार एंबुलेंस भी गांव तक नहीं पहुंच पाती, जिससे मरीजों को खाट या अन्य साधनों से मुख्य सडक़ तक ले जाना पड़ता है।
किसानों ने लिए खाद, बीज और कृषि उपकरण लाने लेजाने में भी भारी परेशानी होती है। फसल तैयार होने के बाद उसे बाजार तक पहुंचाने में अतिरिक्त खर्च और समय लगता है। पुलिया खराब होने के कारण वाहन चालक भी गांव आने से कतराते हैं, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
गांव के लोकेश बैरवा, ओम बैरवा, तुलसीराम बैरवा, रामप्रताप गुर्जर तथा भवानी शंकर गुर्जर ने बताया कि ग्रामीणों ने जिला प्रशासन तथा क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों से कई बार इस रपट पर पुलिया बनाने की मांग की लेकिन कोई सुनवाई नही हो रही है।