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कोटा में पूर्व मंत्री शांति धारीवाल व ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर में जुबानी जंग

शांति धारीवाल बोले - ऊर्जा मंत्री विकास नहीं समझते, उन्हें अभी वक्त लगेगा नागर का पलटवार - चश्मे का नंबर बदलवाएं धारीवाल, ताकि उन्हें विकास नजर आए

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कोटा

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Deepak Sharma

Dec 12, 2024

कोटा में पूर्व मंत्री शांति धारीवाल व ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर में जुबानी जंग

कोटा में पूर्व मंत्री शांति धारीवाल व ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर में जुबानी जंग

शांति धारीवाल ने कहा कि राज्य में भाजपा शासित सरकार का एक साल पूरा हो गया, लेकिन कोटा जिले में कुछ हुआ हो, ऐसा हमें कुछ नजर नहीं आता है। पूरे जिले में कहीं पर भी कोई नई चीज देखने को नहीं मिली है। कोटा में न तो भाजपा के पिछले कार्यकाल में ही कुछ काम हुआ है और न ही इस कार्यकाल में कोई काम करवाया जा रहा है। इन सब बातों से राज्य सरकार को सबक लेना चाहिए।

लोकसभा में भी जीत का अंतर भी इसी वजह से कम हुआ है। इसका नतीजा भाजपा को फिर भुगतना होगा। धारीवाल ने राइजिंग राजस्थान पर चुटकी लेते हुए कहा कि सीएम भजनलाल शर्मा स्वयं कह रहे हैं, कि अगले साल बताएंगे। ऐसे में हम उनसे अगले साल पूछ लेंगे।

ऊर्जा मंत्री के विकास से चुनाव नहीं जीतते हैं… के बयान का जवाब देते हुए कहा कि वे विकास के बारे में अभी नहीं समझते हैं। यह समझने में काफी वक्त लगेगा। भाजपा वाले भी अपना काम करवाने में सक्षम नजर नहीं आ रहे। सरकार के पास विकास का कोई विजन नहीं है।

विकास नहीं दिख रहा तो धारीवाल अपने चश्मे के नंबर ठीक करवाएं : हीरालाल नागर
ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने कहा कि धारीवाल को अगर विकास नजर नहीं आ रहा तो चश्मे के नंबर ठीक करवाएं। कोटा जिले में एक साल में जितने विकास कार्य हुए हैं, उतने कांग्रेस शासन मेंं पांच साल में नहीं हुए हैं। नागर ने कहा कि भाजपा सरकार ने बिजली उत्पादन का प्रबंधन सुधारा है।

बिजली संयंत्रों की मरम्मत, कोयले की गुणवत्ता सुधारने और पूरा उपयोग करने से राज्य में बिजली का उत्पादन उन्हीं संसाधनों में बढ़कर 88 पीएलए हो गया है, जबकि कांग्रेस सरकार के समय 65 पीएलए ही उत्पादन हो रहा था। राइजिंग राजस्थान में 35 लाख करोड़ के एमओयू हुए हैं।

इसमें से 28 लाख करोड़ के एमओयू विद्युत क्षेत्र में हुए हैं। कोटा में मुकुन्दरा हिल्स और रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में पर्यटन बढ़ाने के लिए टाइगर छोड़े जा रहे हैं। रिवर फ्रन्ट बनाकर भूल गए, रखरखाव की चिंता नहीं की। हम समग्र विकास की दिशा में काम कर रहे हैं।

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