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तिरुपति में पुरुषोत्तम महोत्सव:बच्चों को ऐसे संस्कार दीजिए, वे माता-पिता की सेवा जरूर करें: घनश्यामाचार्य महाराज

‘नंद के आनंद भयो, जय कन्हैयालाल की... हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैयालाल की... हर ओर बधाइयां गूंज रही थी। मौका था झालरिया पीठ बड़ा स्थान डीडवाना की ओर से पावन तिरुपति धाम में आयोजित पुरुषोत्तम मास महोत्सव के तहत श्रीमद्भागवत कथा वाचन में कृष्ण जन्मोत्सव प्रसंग का।  

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कोटा

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Abhishek Gupta

Aug 07, 2023

तिरुपति में पुरुषोत्तम महोत्सव:बच्चों को ऐसे संस्कार दीजिए, वे माता-पिता की सेवा जरूर करें: घनश्यामाचार्य महाराज

तिरुपति में पुरुषोत्तम महोत्सव:बच्चों को ऐसे संस्कार दीजिए, वे माता-पिता की सेवा जरूर करें: घनश्यामाचार्य महाराज

कोटा. ‘नंद के आनंद भयो, जय कन्हैयालाल की... हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैयालाल की... हर ओर बधाइयां गूंज रही थी। मौका था झालरिया पीठ बड़ा स्थान डीडवाना की ओर से पावन तिरुपति धाम में आयोजित पुरुषोत्तम मास महोत्सव के तहत श्रीमद्भागवत कथा वाचन में कृष्ण जन्मोत्सव प्रसंग का। महाराष्ट्र के जालना से आए कथा वाचक सत्यनारायण व्यास ने कृष्ण जन्मोत्सव का संगीतमय प्रसंग सुनाया। कथा पांडाल में विशेष रूप से सजावट की गई। इससे पूर्व कथा प्रारंभ होने से पूर्व कथा यजमानों ने श्रीमद्भागवत की विधिवत आरती अर्चना की।

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कथा के दौरान जैसे ही भगवान का जन्म हुआ तो पूरा पंडाल नंद के आनंद भयो जय कन्हैया लाल की के जयकारों से गूंज उठा। इस दौरान भक्त नाचने-झूमने लगे। आतिशबाजी हुई। भगवान श्रीकृष्ण के वेश में नन्हे बालक के दर्शन करने के लिए लोग लालायित नजर आ रहे थे। महिलाओं ने भावविभोर होकर नृत्य किया व बधाई गीत गाए। इस अवसर पर कथा व्यास ने कहा कि जब धरती पर चारों ओर त्राहि-त्राहि मच गई, चारों ओर अत्याचार, अनाचार का साम्राज्य फैल गया, तब भगवान श्रीकृष्ण ने देवकी के आठवें गर्भ के रूप में जन्म लेकर कंस का संहार किया।

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भागवत पुराण जीव और ब्रम्ह की कथा हैः घनश्यामाचार्य महाराज
कथा में घनश्यामाचार्य महाराज ने कहा कि श्रीमद भागवत पुराण कोई साधारण उपन्यास नहीं है। वह जीव और ब्रम्ह की कथा है। इसमें बताया गया है कि कैसे जीव भगवान को सहज प्राप्त कर सकता है। यह आपके पूर्वजों का तपोबल है कि आप इस आयोजन का हिस्सा बन रहे हैं। माता-पिता की सेवा पहले करें तभी आपको धार्मिक कार्यों का पुण्य मिलेगा। आज की पीढ़ी आधुनिक है। घरों में आजकल के बच्चे माता-पिता को पानी तक नहीं पिलाते, यह कार्य भी नौकर करते हैं। अपने बच्चों को संस्कार दीजिए। आप कितने ही बड़े क्यों नहीं बन जाएं, लेकिन माता-पिता की सेवा जरूर करें। मन में दयाभाव होना चाहिए, तभी भगवान की दृष्टि भी आप पर पड़ेगी।