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खुशखबर: जनजाति बाहुल्य क्षेत्र में खुलेगा एकलव्य आवासीय विद्यालय

सांसद जोशी ने की केंद्रीय जनजाति मंत्री से मुलाकातमंडेसरा-राजपुरा में विद्यालय के लिए प्रस्ताव

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खुशखबर: जनजाति बाहुल्य क्षेत्र में खुलेगा एकलव्य आवासीय विद्यालय

खुशखबर: जनजाति बाहुल्य क्षेत्र में खुलेगा एकलव्य आवासीय विद्यालय

रावतभाटा. उपखण्ड के भील बाहुल्य क्षेत्र मंडेसरा राजपुरा में अनुसूचित जनजाति के बालक-बालिकाओं के लिए एकलव्य आवासीय विद्यालय खुलेगा। चित्तौड़गढ़ सांसद सीपी जोशी ने केंद्रीय जनजाति राज्यमंत्री अर्जुन मुंडा से मुलाक़ात कर भैंसरोडगढ़ पंचायत समिति जनजाति बाहुल्य क्षेत्र मंडेसरा राजपुरा में एकलव्य विद्यालय खोले जाने की आवश्यकता बताई। अब एकलव्य विद्यालय के प्रस्ताव बनाकर केंद्रीय जनजाति मंत्रालय को भिजवाए जाएंगे।
क्या है एकलव्य आदर्श विद्यालय का उद्देश्य
ईएमआरएस का उद्देश्य अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण मध्यम और उच्च स्तरीय शिक्षा प्रदान करना है। दूरदराज के क्षेत्रों में जनजाति (एसटी) के छात्र, न केवल उच्च और व्यावसायिक शैक्षिक पाठ्यक्रम और सरकारी व सार्वजनिक नौकरियों के लिए आरक्षण का लाभ उठाने में सक्षम हों, बल्कि शिक्षा के क्षेत्र में सर्वोत्तम अवसरों तक पहुंच प्राप्त कर सकें। ईएमआरएस में नामांकित सभी छात्रों का व्यापक शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास इसका अंतिम ध्येय है।
क्या है सरकार का उद्देश्य
2018-19 के केंद्रीय बजट में ईएमआरएस के महत्व को समझते हुए, सरकार ने घोषणा की कि आदिवासी बच्चों को उनके अपने वातावरण में गुणवत्तापूर्ण सर्वोत्तम शिक्षा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसे जमीन पर उतारने के लिए निर्णय लिया गया कि वर्ष 2022 तक प्रत्येक ब्लॉक में, जहां 50 प्रतिशत से अधिक एसटी आबादी और कम से कम 20,000 आदिवासी जनसंख्या के अनुपात में होगी, वहां एक एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय होगा।
किस तरह होंगे अन्य विद्यालयों से अलग
एकलव्य विद्यालय में शिक्षा प्रदान करने के अलावा स्थानीय कला और संस्कृति के संरक्षण के लिए विशेष सुविधाएं होंगी। इन विद्यालयों में खेल और कौशल विकास में भी प्रशिक्षण दिया जाएगा। ये विद्यालय बहुत हद तक जवाहर नवोदय विद्यालयों, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों और केन्द्रीय विद्यालयों के समकक्ष होंगे।
इस संबंध में चित्तौड़गढ़ सांसद सीपी जोशी ने बताया कि केंद्रीय जनजाति मंत्री अर्जुन मुंडा से भैंसरोडगढ़ ब्लॉक के जनजाति बाहुल्य मंडेसरा राजपुरा में एकलव्य विद्यालय खोले जाने का निवेदन किया है। एकलव्य विद्यालय के जल्द प्रस्ताव बनाकर केंद्रीय जनजाति मंत्रालय को भिजवाए जाएंगे।

एकलव्य की कहानी
एकलव्य मशहूर धनुर्धर थे, जिन्होंने अर्जुन को भी इस कला में परास्त किया था। उन्होंने जंगल में खुद से अभ्यास करके धनुष-बाण चलाना सीखा था, गुरु दक्षिणा के रूप में द्रोणाचार्य ने एकलव्य से उनका अंगूठा मांग लिया था। सरकार उनके नाम को आदिवासी क्षेत्रों में पढ़ने वाले बच्चों को शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करने वाली ‘एकलव्य मॉडल स्कूल’ बनाकर फिर से चर्चा में ला रही है।
एकलव्य मॉडल स्कूल की 5 खास बातें
- एकलव्य स्कूलों की स्थापना आदिवासी बाहुल्य ब्लॉकों में की जाएगी, जहां की 50 प्रतिशत से ज्यादा आबादी (20 हजार से अधिक जनसंख्या) आदिवासी समुदाय की हो।

-एकलव्य स्कूल आवासीय विद्यालय होंगे, जो नवोदय की तर्ज़ पर बनेंगे। नवोदय विद्यालयों में ग्रामीण और आदिवासी अंचल के प्रतिभाशाली बच्चों को प्रवेश परीक्षा में सफल होने के बाद कक्षा 6 में प्रवेश दिया जाता है और ऐसे बच्चे 6 से 12वीं तक की पढ़ाई पूरी करते हैं।
- सरकार की मंशा है कि आदिवासी इलाक़ों से आने वाले बच्चों को उन्हीं के परिवेश में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके। 12वीं तक की शिक्षा के बाद उच्च शिक्षा के लिए बच्चों को पढ़ने के लिए प्रोत्साहित करने की सरकार की तरफ से क्या योजना है, इस बारे में कुछ नहीं कहा गया है।

-आदिवासी अंचल के बहुत से विद्यालय अकेले शिक्षकों के भरोसे चल रहे हैं। सरकारी स्कूलों में संसाधनों का अभाव है, ऐसे में इस तरह के विद्यालयों से आदिवासी अंचल में अच्छी शिक्षा मुहैया कराने के प्रयासों को गति मिलेगी।
- इन विद्यालयों में आदिवासी अंचल की स्थानीय कला, संस्कृति, खेलों और कौशल विकास को बढ़ावा दिया जाएगा।