सावधान! कोटा के इन स्कूलों में हर पल मौत का खतरा, जोखिम में है बच्चों की जान

सावधान! कोटा के इन स्कूलों में हर पल मौत का खतरा, जोखिम में है बच्चों की जान

Zuber Khan | Publish: Mar, 14 2018 11:17:50 AM (IST) Kota, Rajasthan, India

करौली में राजकीय माध्यमिक स्कूल का दरवाजा टूटकर एक छात्र पर गिरने से मौत हो गई।कोटा में भी विद्यार्थी खतरे के साए में आखर ज्ञान ले रहे हैं।

कोटा . करौली में राजकीय माध्यमिक स्कूल का दरवाजा टूटकर एक छात्र पर गिरने से मौत हो गई। राज्य में इतनी बड़ी घटना होने के बावजूद शिक्षा विभाग स्कूलों की सुध नहीं ले रहा है। कोटा में भी कई स्कूल जीणशीर्ण भवनों में संचालित हो रहे हैं।

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विद्यार्थी खतरे के साए में आखर ज्ञान ले रहे हैं। इन स्कूलों में हर पल हादसे का खतरा बना रहता है। सर्व शिक्षा अभियान राजस्थान प्रारंभिक शिक्षा परिषद जयपुर व एमएचआरडी को हर साल जीर्णशीर्ण स्कूलों के प्रस्ताव बनाकर भिजवाते है, लेकिन आधे भी स्वीकृत नहीं होते है। पत्रिका टीम ने मंगलवार को कुछ स्कूलों के हाल देखे..., ये मिले।

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टूटे दरवाजे, जर्जर दीवारें
राजकीय माध्यमिक विद्यालय नांता महल में संचालित है। महल काफी पुराना होने के कारण यहां बने कमरों के दरवाजे टूट चुके हैं। दीवारें जर्जर हो चुकी है। इस स्कूल के लिए नगर विकास न्यास ने पिछले दो साल पहले क्रेशर बस्ती में जमीन आवंटित की, लेकिन यह जमीन विवादों में रहने के कारण स्कूल भवन नहीं बन सका। स्कूल के लिए 352 विद्यार्थी हैं। जबकि भवन के लिए बजट राशि स्वीकृत पड़ी है।

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खुले में होती पढ़ाई
राउप्रावि किशोरपुरा जेठिया समाज के एक बरामदे में संचालित होता है। यह स्कूल दो शिफ्टों में चलता है। स्कूल में 215 बच्चों का नामांकन है, लेकिन पर्याप्त कक्ष नहीं है। बरामदे में पंखे नहीं होने के कारण गर्मी के चलते मजबूरन पेड़ व छज्जों के नीचे कक्षाएं चलती है। प्रधानाध्यापक रामगोपाल मेहता ने स्कूल के लिए नई जमीन के लिए दो साल से प्रस्ताव भिजवाए गए, लेकिन यूआईटी जमीन नहीं दिला पाया।

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एक कमरे में दो क्लास, कहीं बरामदे में चल रहा स्कूल
एक कमरे में दो कक्षाएं नांता महल में ही राबाउप्रावि संचालित है। इस स्कूल में भवन का अभाव होने के कारण कुछ कक्षाएं एक ही कक्ष में ही चलती है। स्कूल में 144 विद्यार्थी अध्ययनरत है। कक्षा 3 व 4 एक कमरे में, कक्षा 5वीं स्टोर रूम में, कक्षा 6वीं चबूतरे व कक्षा 7वीं की कक्षा प्रधानाध्यापिका कक्ष के एक हिस्से में चल रही है। कई कमरों में बिजली तक नहीं है।

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यहां भी खस्ताहाल भवन
कोटा जिले में मकड़ावद, थैरोली, देलोद, नलावता की झौपडिय़ां, ढिढोरा स्कूल जीर्णशीर्ण कमरों में चल रहे हैं। सर्व शिक्षा अभियान ने सत्र 18-19 की कार्ययोजनाओं में इनके प्रस्ताव राजस्थान प्रारंभिक शिक्षा परिषद को भिजवाए हैं।

नहीं आ रहा बजट
कोटा जिले में 743 स्कूल हैं। सर्व शिक्षा अभियान में पिछले साल आपदा प्रबंधन में 400 स्कूलों के मरम्मत प्रस्ताव बनाकर भिजवाए गए थे, लेकिन आज तक स्वीकृत नहीं हुए। वहीं इस साल 17 उत्कृ ष्ट स्कूलों के लिए बजट जारी हुआ है। शेष 80 स्कूलों की मरम्मत के लिए प्रस्ताव बनाकर भिजवाए गए हैं।

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सर्व शिक्षा अभियान के एडीपीसी जगदीश कुमार ने बताया कि हर साल निरीक्षण कर स्कूलों के प्रस्ताव बनाकर राजस्थान प्रारंभिक शिक्षा परिषद व एमएचआरडी को भिजवाते हैं, लेकिन आधे स्कूलों के ही प्रस्ताव स्वीकृत हो पाते है। पिछले साल आपदा प्रबंधक में प्रस्ताव भिजवाए गए थे, लेकिन स्वीकृत नहीं हुए। भवनहीन स्कूलों के लिए यूआईटी से भूमि आवंटन का लगातार प्रयास कर रहे हैं।

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