कोटा. भाजपा के पूर्व विधायक प्रहलाद गुंजल और उसके भाइयों व अन्य परिजनों ने अतिक्रमण हटाने गए नगर विकास न्यास के अधिकारियों व कर्मचारियों को धमकाया कि कार्रवाई किए बगैर लौट जाओ नहीं तो यहां से जिंदा नहीं लौट पाओगे, चाहे पूरे राजस्थान की पुलिस बुला लेना। पूर्व विधायक के रिश्तेदारों की दबंगई के चलते यूआईटी का अतिक्रमण निरोधक दस्ता आंशिक कार्रवाई कर लौट आया। बाद में यूआईटी सचिव की ओर से पूर्व विधायक गुंजल व अन्य के खिलाफ रानपुर थाने में राजकार्य में बाधा उत्पन्न करने, मारपीट करने व कर्मचारियों को जातिगत शब्दों से अपमानित करने की लिखित रिपोर्ट दी है।
यूआईटी का दस्ता शनिवार को देवनारायण नगर विस्तार आवासीय योजना के ब्लाॅक जी की जमीन पर गुंजल परिवार व अन्य लोगों ने करीब 380 बीघा जमीन पर पत्थर के कोट बनाकर, बाडे व झोपड़े बनाकर किए गए अतिक्रमण को हटाने गए थे। कार्रवाई के दौरान पूर्व विधायक का भाई श्रीलाल गुंजल, दयाल गुंजल, लोकेश गुंजल, राधाकृष्ण गुंजल, धर्मराज गुंजल व अन्य रिश्तेदार 40-50 लोगों के साथ मौके पर पहुंचे और अधिकारियों से गाली गलौज करते हुए धमकाया।
पूर्व विधायक ने फोन पर एक्सईएन को धमकाया, जिंदा नहीं जा पाओगे
पुलिस को दी रिपोर्ट के अनुसार, अतिक्रमण हटाने के दौरान पूर्व विधायक प्रहलाद गुंजल ने अधिशासी अभियंता राजेन्द्र राठौर को मोबाइल पर गाली गलौच कर धमकाते हुए कहा कि तुम सब रावण हो गए। यह गांव हमारा है, जहां तुम काम कर रहे हो, वापस जिन्दा नहीं जा पाओगे। चाहे पूरे राजस्थान की पुलिस बुला लेना। चार माह बाद चुनाव है। उसके बाद तुम्हारे साथियों का क्या होगा? बता दूंगा। गुंजल परिवार की दंबगई के चलते दस्ते को आंशिक कार्रवाई कर लौटना पड़ा। सचिव ने इस मामले में कनिष्ठ अभियंता मुकेश मीणा, पटवारी युवराज मीणा को रानपुर थाने मामला दर्ज करवाने के निर्देश दिए हैं।
अधिकारियों को मारे धक्के कार्रवाई के दौरान गुंजल के भाइयों व अन्य रिश्तेदारों ने यूआईटी के अधिकारियों और कर्मचारियों से जमकर गाली गलौच की और धक्के मारकर कार्रवाई में व्यवधान पैदा किया। लोकेश गुंजल व अन्य ने कनिष्ठ अभियंता मुकेश मीणा व अधिशासी अभियंता कमल मीणा की गिरेबान पकड़ धक्का दिया और मारपीट की।
पहले मांगी मोहलत, अब धमकाया
यूआईटी ने दो माह पहले भी इस जमीन से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की थी, तब गुंंजल व उसके परिवारजनों ने फसल खड़ी होने का हवाला देकर कार्रवाई नहीं करने का अनुरोध किया था। फसल काटने तक की मोहलत मांगी थी, अब दस्ता गया तो मारपीट पर उतारू हो गए। शहर के पास होने के कारण यह जमीन बेशकीमती है।