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सिग्नल फ्री के सपने पर कोटड़ी चौराहे का रेड सिग्नल

कोटा. 'ट्रैफिक सिग्नल फ्री सिटी' ( Traffic Signal Free City ) की रेस में दौड़ रहे कोटा शहर की राह में नया रोड़ा खड़ा हो गया है। यहां बात हो रही है कोटा शहर के सबसे व्यस्त कोटड़ी चौराहे पर लगने वाले जाम की। भुगतभोगियों का कहना है कि कोटड़ी चौराहे के जाम से गूगल मैप भी आपको नहीं बचा सकता।

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कोटा

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Deepak Sharma

Aug 28, 2021

सिग्नल फ्री के सपने पर कोटड़ी चौराहे का रेड सिग्नल

कोटा जंक्शन से अनंतपुरा तक नो ट्रैफिक सिग्नल रोड में कोटड़ी चौराहा बना सुगम राह में रोड़ा

दीपक शर्मा
कोटा. 'ट्रैफिक सिग्नल फ्री सिटी' ( Traffic Signal Free City ) की रेस में दौड़ रहे कोटा शहर की राह में नया रोड़ा खड़ा हो गया है। कोटा जंक्शन से अनंतपुरा तक सुगम राह बनाने के लिए 'सरकार' एक के बाद एक फ्लाईओवर ( Flyover) और अंडरब्रिज ( UnderBridge) बनवा तो रही है, लेकिन बेतरतीब यातायात व्यवस्था ( Traffic Managment) काबू में नहीं नजर आ रही।
दिनभर की दौड़ धूप के बाद शाम को घर लौटने की जल्दबाजी इस जाम को और बढ़ा देती है। यहां बात हो रही है कोटा शहर के सबसे व्यस्त कोटड़ी चौराहे पर लगने वाले जाम की। कहते हैं कि किसी शहर के ट्रैफिक को गूगल मैप ( Google Map) बेहतर जानता है, लेकिन भुगतभोगियों का कहना है कि कोटड़ी चौराहे के जाम से वो भी आपको नहीं बचा सकता।

इसलिए व्यस्त है...
पुराने शहर के एक छोर कोटा जंक्शन से नए कोटा के अनंतपुरा तक यह सीधी सड़क है। इस सड़क से दो हाइवे जुड़ते और गुजरते हैं। हैंगिंग ब्रिज ( Hanging Bridge ) बन जाने के बावजूद टोल से बचने के लिए आस-पास के जिलों से आने वाले वाहन भी सीधे इसी सड़क से शहर में प्रवेश करते हैं। रेलवे स्टेशन से सामान्य दिनों में प्रतिदिन 20 हजार से ज्यादा लोग सफर शुरू या खत्म करते हैं। ट्रेन पकडऩे से लेकर घर लौटने तक यह सड़क ही सर्वाधिक काम आती है।

जाम से लगता है डेढ़ गुना समय
कोटा जंक्शन से अनंतपुरा तक करीब 15 किलोमीटर की दूरी यूं तो 40 मिनट में तय हो जाती है, लेकिन शाम के समय इस वक्त में 15 से बीस मिनट जाम के भी जुड़ जाते हैं। यानी जाम की वजह से यह दूरी सामान्य से डेढ़ गुना समय लग जाता है। इस दौरान हरी बत्ती के इंतजार में खड़े वाहन बेजा पेट्रोल फूंकते रहते हैं।

15 किमी में केवल दो जगह गड़बड़
गूगल मैप पर सर्च करने पर इस मार्ग केवल दो जगह लाल निशान नजर आते हैं। एक झालावाड़ रोड पर निर्माणाधीन ऑक्सीजोन पार्क के सामने और एक कोटड़ी चौराहे पर। गोबरिया बावड़ी चौराहे पर अंडरपास निर्माणाधीन है। इस पर से यातायात शुरू कर दिया गया है, लेकिन लिंक रोड अभी तैयार नहीं हुआ है। ऐसे में विज्ञान नगर के छोटे फ्लाईओवर उतरने के बाद ऑक्सीजोन के सामने वाहन को साइड वे से निकलना पड़ रहा है, जिससे सारा दिन जाम की स्थिति बनी रहती है, लेकिन कोटड़ी चौराहे पर ऐसी कोई समस्या नहीं है। यहां समस्या है चौतरफा ट्रैफिक, जिसे ट्रैफिक सिग्नल और आधा दर्जन यातायात कर्मी मिलकर भी दूर नहीं कर पा रहे हैं।

मजबूरी है क्या करें
सवारी एरोड्राम सर्किल से पहले मिल जाए तो 80 फीट रोड से पुलिस लाइन होते हुए स्टेशन निकल जाते हैं, लेकिन उसके बाद तो कोटड़ी चौराहे से गुजरना मजबूरी हो जाता है। सवारी को ट्रेन पकडऩे की जल्दी रहती है और जाम के चक्कर में सुननी हमें पड़ती है। यह तो आए दिन का काम हो गया है।
सरफराज, ऑटो चालक

कलक्ट्रेट में पोस्टेड हूं और घर भी आकाशवाणी क्षेत्र में है, लेकिन आजकल मुझे भी यह जाम भुगतना पड़ रहा है। कंधे के दर्द की फिजियोथैरेपी के लिए रोज झालावाड़ रोड स्थित सेंटर जाना पड़ता है। दोपहर में भी यहां जाम 5 से 10 मिनट खा जाता है। प्रशासन को इस चौराहे पर ट्रैफिक जाम की समस्या को दूर करने के अविलंब उपाय करने चाहिए।
मुकेश विजय, संयुक्त निदेशक, सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग

कोटड़ी चौराहे पर यातायात का दबाब रहता ही है। इसके लिए पुलिसकर्मी लगाए हुए हैं। शाम के समय तो यातायात के दबाब को देखते हुए सिग्नल बंद कर पुलिसकर्मी ही वाहन चालकों को दिशा निर्देश देकर निकालते हैं। फ्लाईओवर का निर्माण का निर्णय तो सरकार ही तय करती है।
कालूलाल, पुलिस उपअधीक्षक, यातायात कोटा

फैक्ट फाइल
दो हजार से ज्यादा वाहन गुजरते हैं हर घंटे में
4-5 यातायातकर्मी तैनात हैं चौराहे पर
10 से 15 मिनट लग रहे चौराहा क्रॉस करने में पीक ऑवर में