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High-tech Cyber crime: सावधान! न एटीएम नम्बर पूछ रहे और न ही पासवर्ड, चंद सैकंड में कर रहे खाता साफ

बैंक व पुलिस प्रशासन भले ही अपडेट न हों, लेकिन अपराधी लगातार अपडेट हो रहे हैं। तभी तो देशभर में 1 जनवरी 2019 से चिप लगे एटीएम की भी ऑनलाइन ठगों ने दो माह में ही क्लोनिंग कर डाली।

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कोटा

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Zuber Khan

Mar 12, 2019

High-tech Cyber crime

High-tech Cyber crime: सावधान! न एटीएम नम्बर पूछ रहे और न ही पासवर्ड, चंद सैकंड में कर रहे खाता साफ

कोटा. बैंक व पुलिस प्रशासन भले ही अपडेट न हों, लेकिन अपराधी लगातार अपडेट हो रहे हैं। तभी तो देशभर में 1 जनवरी 2019 से चिप लगे एटीएम की भी ऑनलाइन ठगों ने दो माह में ही क्लोनिंग कर डाली। और बैंक प्रबंधन की अत्याधुनिक तकनीक को धत्ता बता रहे हैं। ऑनलाइन ठगों ने क्लोन चिप एटीएम बनाकर खातों से मोटी रकम निकाली है। एटीएम कार्ड व इसके कोड के अलावा ओटीपी के मामले में पूरी सर्तकता बरतने वाले लोगों के खातों से भी मोटी रकम निकाली गई है। फिलहाल बैंक व पुलिस प्रशासन के पास इससे निपटने के संसाधन नजर नहीं आ रहे।

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बिना ओटीपी, सीधी निकासी
गत वर्ष तक ऑनलाइन ठगी के लिए ठग मोबाइल पर फोन कर लोगों को तरह-तरह की कहानी से बहला-फुसलाकर व ओटीपी लेकर ऑनलाइन ठगी करते थे, लेकिन इस क्लोन चिप एटीएम से ठग किसी के भी खाते से रुपए निकाल लेते हैं। उपभोक्ता के पास राशि निकासी का मैसेज ही आता है।

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बड़े शहरों से ठगी
ऑनलाइन ठग दिल्ली, गुडगांव, मुम्बई, मद्रास, बैंगलोर, नासिक समेत बड़े शहरों व आसपास के क्षेत्रों से ठगी के काम को अंजाम देते हैं। इसके बाद ये कुछ दिनों में अपनी जगह बदल लेते हैं। ऐसे में पुलिस भी आसानी से इन तक नहीं पहुंच पाती।

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क्लोन चिप एटीएम व डाटा से हो रही चोरी
आईटी विशेषज्ञों का मानना है कि असली एटीएम तो उपभोक्ता के पास होता है। इससे यह तो बिल्कुल पक्का है कि ये काम क्लोन चिप एटीएम से ही किया जा रहा है। क्लोन एटीएम के अलावा बैंक से या मोबाइल एप से ऑनलाइन ठगों तक कार्ड के सीक्रेट कोड व पासवर्ड पहुंच रहे हैं। बैंकों के एटीएम बनाने वाली निजी कंपनियों के कर्मचारियों समेत बैंककर्मियों से भी डाटा लीक होने की संभावना बनी रहती है।

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सुरक्षित मोबाइल एप का करें उपयोग, लगातार बदलते रहे एटीएम का पिन
चिप एटीएम का क्लोन बनने के बाद अब यह सवाल खड़ा हो गया है कि खातों में आखिर रुपए सुरक्षित कैसे रखे जाएं। इस मामले में आईटी विशेषज्ञों का मानना है कि मोबाइल व नेट से जुड़े अपने एकाउन्ट को पासवर्ड से सिक्योर करें। असुरक्षित एप से दूर रहें। इसके अलावा खाते में राशि को सुरक्षित रखने के लिए एटीएम के पिन को थोड़े-थोड़े दिनों में बदलते रहे। बैंक से एटीएम जारी होने के बाद मिले पासवर्ड को तुरंत प्रभाव से बदल दें।

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ये हुए ठगी के शिकार

केस-1 छावनी निवासी सम्मत कुमार नायक के बैंक खाते से 2 मार्च 2019 को उसके मोबाइल पर खाते से 20 हजार रुपए निकाले जाने का मैसेज आया। बैंक से जानकारी करने पर पता चला कि आरोपी ने उत्तरप्रदेश में क्लोन एटीएम से रुपए निकाले। जबकि उसका एटीएम उसके पास था तथा उसने किसी को ओटीपी कोड भी नहीं बताया।

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केस-2 सुभाष नगर निवासी शिक्षक दुर्गा बहादुर के मोबाइल पर 3 मार्च को साढ़े 19 हजार रुपए की निकासी का मैसेज आया। उनका एटीएम जेब में ही था। मोबाइल पर कोई ओटीपी नहीं आया। किसी से इस संबंध में मोबाइल पर बात भी नहीं हुई। बैंक जाने पर पता लगा कि बैंगलोर से उनके खाते से क्लोन एटीएम से रुपए निकाले हैं।

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साइबर अपराधों से बचने के लिए लोगों को तकनीक का इस्तेमाल करने के साथ-साथ अपडेट भी होना होगा। छोटी लापरवाही भी ऑनलाइन फ्रॉड का शिकार बना सकती है। ऐसे में पूरी सर्तकता बरतें। ऐसे मामलों में पुलिस कार्रवाई करती है। लेकिन ये अपराध दूर बैठा कोई अनजान व्यक्ति करता है, जो लोकेशन बदलते रहते हैं। ऐसे में उन्हें पकडऩा कठिन होता है। इस पर राशि की बरामदगी और भी कठिन होती है।
दीपक भार्गव, पुलिस अधीक्षक, कोटा