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इंसानों ने किया आहत, भगवान से मांगी राहत

कोटा. शहर के 92 वर्षीय वरिष्ठ साहित्यकार बशीर अहमद मयूख ने विभिन्न मुद्दों, अव्यवस्थाओं पर तंज कसे होंगे।

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कोटा

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Anil Sharma

Oct 06, 2017

notice board in temple

कोटा. शहर के 92 वर्षीय वरिष्ठ साहित्यकार बशीर अहमद मयूख ने विभिन्न मुद्दों, अव्यवस्थाओं पर तंज कसे होंगे।

कोटा . शहर के 92 वर्षीय वरिष्ठ साहित्यकार बशीर अहमद मयूख ने विभिन्न मुद्दों, अव्यवस्थाओं पर तंज कसे होंगे। अपने जमाने में शासन-प्रशासन की आंखें भी खोली होंगी। मगर वर्तमान में नगर निगम ने विकास व निर्माण के मामले में उन्हें आहत कर दिया। आखिरकार उन्हें विज्ञान नगर स्थित मयूखेश्वर मंदिर के नोटिस बोर्ड पर अपनी पीड़ा व्यक्त करनी पड़ी।
मंदिर संस्थापक व वरिष्ठ साहित्यकार मयूख ने मंदिर में आवारा पशुओं का प्रवेश रोकने के लिए निगम से गुहार की थी। लम्बे इंतजार के बाद बजट स्वीकृत हुआ, लेकिन समस्या से मुक्ति नहीं मिली। आखिर साहित्यकार ने साहित्यिक अंदाज में अपनी पीड़ा को मंदिर के नोटिस बोर्ड पर व्यक्त किया। मयूख का कहना है कि स्मार्ट सिटी में ऐसा उदाहरण पीड़ादायक है। उन्होंने नोटिस बोर्ड पर पीड़ा की अभिव्यक्ति निगम पर तंज कसते हुए लिखा कि स्मार्ट सिटी बनाते हुए नगर निगम कोटा आवारा पशुओं के मौलिक अधिकारों का प्रतिनिधित्व करते हुए उनके हितों का भी पूरा ध्यान रखती है। उदाहरणार्थ निगम का विज्ञान नगर स्थित मयूखेश्वर महादेव पार्क। मयूखेश्वर ट्रस्ट द्वारा 35 सालों में विकसित इस पार्क में पशुओं के आने-जाने की खुली छूट है। मौका देखकर ये पशु परिसर स्थित मंदिर में देवार्पित फल-फूल का प्रसाद ग्रहण कर धर्मलाभ लेने को स्वतंत्र हैं।
मंदिर सौहार्द का प्रतीक
साहित्यकार मयूख ने 35 वर्ष पूर्व मंदिर की स्थापना करवाई थी। धार्मिक पर्व, अनुष्ठान, राष्ट्रीय, सामाजिक कार्यों का समन्वय एवं साम्प्रदायिक सद्भाव का प्रचार-प्रसार करना मंदिर का उद्देश्य है। मंदिर के गर्भ गृह पर तिरंगा बना हुआ है। वहीं प्रवेश द्वार पर लिखी गई पंक्तियां 'ईश्वर अल्लाह, वाहेगुरु चाहे कहो श्री राम, सबका मालिक एक है अलग-अलग है नामÓ साम्प्रदायिक सद्भाव का संदेश देती है।
इसलिए व्यथित हैं
मयूख मंदिर व पार्क के दरवाजों पर फाटक लगे हैं, लेकिन ये आधे-अधूरे लगते हंै। थोड़ी देर भी खुले रह जाएं तो आवारा पशु, शूकर व अन्य मंदिर में गर्भ गृह तक पहुंच जाते हैं। उन्होंने निगम से समस्या निवारण की मांग की थी, इस पर पार्क विकास के लिए बजट भी स्वीकृत हुआ, लेकिन जो कार्य होने थे, वे नहीं हुए। बल्कि पूर्व में ट्रस्ट द्वारा बनवाया फर्श हटाकर सीमेंट की टाइल्स लगा दी।