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15 दिन में पेयजल व्यवस्था नहीं सुधरी तो आंदोलन करूंगा -भाया

कोटा

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Newsdesk

Jul 30, 2026

Rajasthan

मुख्यमंत्री को भेजा पत्र



बारां. अंता विधायक और पूर्व मंत्री प्रमोद जैन भाया ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर बारां जिले की बदहाल पेयजल व्यवस्था पर चिंता व्यक्त करते हुए आगामी 15 दिन के भीतर प्रभावी सुधार सुनिश्चित करने, लापरवाह अधिकारियों एवं ठेकेदारों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करने की मांग की है।

भाया ने कहा कि बारां जिले में लंबे समय से पेयजल व्यवस्था दयनीय स्थिति में है। कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में अंता-नागदा-बलदेवपुरा, सिंगोला, सायगढ़, सोनवा सहित अनेक वृहद् एवं एकल ग्राम पेयजल योजनाओं का निर्माण जल जीवन मिशन एवं अमृत मिशन के तहत करोड़ों रुपए की लागत से कराया गया था। इन योजनाओं के साथ दस वर्षों तक रखरखाव की जिम्मेदारी भी संबंधित एजेंसियों को दी गई, लेकिन वर्तमान में इनका संचालन एवं रख-रखाव पूरी तरह उपेक्षित है। ऐसे में जिले के अनेक क्षेत्रों में दूषित, मटमैले एवं दुर्गन्धयुक्त पानी की आपूर्ति हो रही है तथा कई स्थानों पर कई-कई दिनों तक जलापूर्ति बाधित रहती है। इस विषय को लेकर वे पूर्व में तीन बार जलदाय मंत्री, तत्कालीन एवं वर्तमान जिला कलक्टर सहित संबंधित अधिकारियों को लिखित रूप से अवगत करा चुके हैं। इसके बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। तीन जून को कांग्रेस कार्यकर्ताओं एवं आमजन के साथ जलदाय विभाग के समक्ष धरना-प्रदर्शन भी किया गया था, लेकिन सुधार नहीं हुआ। आज भी बारां शहर सहित अंता, अटरू, मांगरोल, सीसवाली, छीपाबड़ौद, छबड़ा, किशनगंज एवं शाहबाद सहित अनेक ग्रामीण क्षेत्रों में लोग दूषित एवं मटमैला पानी पीने को मजबूर हैं। बारां जिले में भी यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में गंभीर जनस्वास्थ्य संकट उत्पन्न हो सकता है। उन्होंने आग्रह किया कि सरकार यह सुनिश्चित करे कि दूषित पेयजल के कारण बारां जिले में किसी भी नागरिक की जान न जाए।
उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की कि आगामी 15 दिनों के भीतर जिले की पेयजल व्यवस्था की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कराई जाए, दूषित जलापूर्ति तत्काल बंद कर शुद्ध एवं नियमित पेयजल उपलब्ध कराया जाए तथा लापरवाह अधिकारियों, कर्मचारियों एवं अनुबंधित ठेकेदारों के विरुद्ध कठोर विभागीय एवं वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। यदि आगामी 15 दिनों में बारां जिले की जनता को राहत नहीं मिली तो वे अपनी व्यक्तिगत स्वास्थ्य संबंधी कठिनाइयों की परवाह किए बिना जन आंदोलन करेंगे तथा आवश्यकता पड़ने पर अनशन करने से भी पीछे नहीं हटेंगे।