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Rajasthan: ‘लाल पर्ची का काला खेल’, भजनलाल सरकार को रोज लग रही लाखों की चपत

पत्रिका टीम ने 10 दिन इस पूरे मामले की जमीनी हकीकत जानी। धनेश्वर टोल नाके के आगे खनन विभाग द्वारा रॉयल्टी का ठेका दे रखा है।

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कोटा

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Akshita Deora

Jun 27, 2025

रॉयल्टी ठेके के आगे खड़ा ओवरलोड डंपर (फोटो: पत्रिका)

अंकितराज चंद्रावत

खनिज विभाग के रॉयल्टी नाके पर ही पत्थर व गिट्टी से भरे ओवरलोड ट्रकों को लाल पर्ची देकर पास किया जा रहा है। इससे अवैध वसूली का खेल चल रहा है और सरकार को भी राजस्व की मोटी चपत लग रही है। इस पर्ची को अघोषित पास मानते हुए ट्रक चालक सड़कों पर बेलगाम दौड़ रहे हैं। खनिज विभाग के अधिकारी आंखें मूंदकर बैठे हैं। इससे अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। उधर परिवहन विभाग के सॉफ्टवेयर ने धनेश्वर नाके से निकले वाले पत्थर व गिट्टी के 288 ट्रकों के ऑनलाइन चालन जनरेट कर दिए हैं। यह सूची खनिज विभाग को अग्रिम कार्रवाई के लिए भेज दी है।

बूंदी जिले के धनेश्वर रॉयल्टी नाके से ही पर्ची देकर ओवरलोड ट्रकों को आसानी से आने-जाने की छूट दे रखी है। खनन विभाग ने एक निजी फर्म को रॉयल्टी वसूली का ठेका दिया है, जिसे वहां से गुजरने वाले ओवरलोड और बिना रॉयल्टी के आने वाले वाहनों की जांच करनी होती है, लेकिन वास्तविकता में ऐसा नहीं किया जा रहा है। ठेकेदार फर्म एक ’’लाल पर्ची’’ जारी कर ओवरलोड डम्परों और ट्रकों को अवैध रूप से पास कर देते हैं। नियमानुसार किसी ओवरलोड ट्रक के पकड़े जाने पर खनन विभाग को न्यूनतम 1.25 लाख रुपए का जुर्माना वसूलना होता है, लेकिन ठेकेदार इन नियमों की अवहेलना कर रहे हैं, जिससे सरकार को बड़े पैमाने पर राजस्व की हानि हो रही है।

ट्रकों की नहीं सिर्फ लाल पर्ची की जांच

पत्रिका टीम ने 10 दिन इस पूरे मामले की जमीनी हकीकत जानी। धनेश्वर टोल नाके के आगे खनन विभाग द्वारा रॉयल्टी का ठेका दे रखा है। जहां से निकलने वाले ट्रकों की जांच की जिम्मेदारी भी ठेकेदार को ही सौंपी गई है, लेकिन पत्रिका टीम ने देखा की यहां पर ओवरलोड ट्रकों को बिना रोक-टोक पार किया जा रहा है। इस दौरान सामने आया की धनेश्वर टोल नाके पर सिर्फ पत्थर व गिट्टी के चालक से लाल पर्ची देखते हैं और उसको वहां से रवाना कर देते है। जिनको आगे कहीं भी नहीं रोका जाता है।

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ऐसे लग रही लाखों की चपत

डाबी क्षेत्र के धनेश्वर में चेकपोस्ट है। यहां से ओवरलोड ट्रक धड़ल्ले से निकल रहे हैं। ट्रकों से गिट्टी ले जाने पर भी ठेकेदार 1800 से 2200 रुपए प्रति डंपर वसूल रहा है जबकि सरकारी सॉफ्टवेयर के मुताबिक हर वाहन की मॉनिटरिंग होनी चाहिए और ओवरलोडिंग पर चालान जनरेट होना चाहिए, लेकिन इसकी पालना नहीं हो रही है। सरकार को मोटे तौर पर रोज़ाना लाखों के राजस्व का नुकसान हो रहा है।

खनिज विभाग को सूची भेजी

खनन विभाग को ओवरलोड वाहनों की सूची ई मेल से भेज रखी है। जिसमें करीब 288 वाहनों के ओवर लोड के चालान जरनेट हुए है। उन्हें आग्रह किया है कि जब तक चालान कंपाउड नहीं हो जाते है। तब तक इनमें खनिज कार्य की अनुमति नहीं दी जाए। इसके अलावा भी ओवर लोड वाहन चल रहे है तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

मनीष शर्मा, प्रादेशिक परिवहन अधिकारी कोटा

यदि रॉयल्टी ठेकेदार की सीमा से कोई भी ओवरलोड वाहन बिना रॉयल्टी कटवाए निकल रहा है, तो यह एक गंभीर अनियमितता है। ऐसी स्थिति में संबंधित वाहन मालिक, चालक तथा अन्य जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार जांच की जाएगी।

प्रशांत कुमार, खनिज अभियंता, बूंदी