
कोटा. डीजल-पेट्रोल की लगातार हो रही कमी, ध्वनि प्रदूषण व वायु प्रदूषण जैसी समस्या से निजात पाने के लिए कोटा रेल मंडल में नई तकनीक की पावर कार का उपयोग शुरू किया है। शुरुआत में कोटा मंडल की दो रेलगाडिय़ों में एलएसएलआरडी प्रकार की पावर कार का उपयोग करके बिजली की बचत की जा रही है।
कोटा मंडल की जनशताब्दी एक्सप्रेस और कोटा-कटरा माता वैष्णोदेवी एक्सप्रेस में इस पावर कार उपयोग करना शुरू किया है। इन गाडिय़ों में अब अलग से डीजी सेट की आवश्यकता नहीं रही। डीजल जनरेटर सेट के बिना अब पावर कार में ऊपरी उपस्कर अर्थात ओएचई लाइन से बिजली सीधे कोचों में आपूर्ति की जा रही है। कोचों में लगे पंखे और बल्ब ओएचई लाइन से मिलने वाली बिजली से जगमगा रहे हैं।
डीजल की होगी बचत
इस प्रयोग के चलते कोटा मंडल में प्रतिमाह 22600 लीटर डीजल की बचत होगी। लगभग 21 लाख 47 हजार प्रतिमाह के हिसाब से सालाना 2 करोड़ 57 लाख 64 हजार रुपए का राजस्व भी बचेगा। यह पावर कार लगभग सभी प्रकार के एलएचबी टाइप के कोचों के लिए उपयोगी है। यह पावर कार पर्यावरण के अनुकूल है और डीजल जनरेटर सेट नहीं होने से वायु प्रदूषण के साथ साथ ध्वनि प्रदूषण से भी मुक्ति मिलेगी। डीजी सेट के रखरखाव और उसकी मरम्मत पर होने वाला खर्च भी बचेगा।
अतिरिक्त कोच लग सकेगा
ट्रेन से डीजल जनरेटर सेट के हट जाने से अतिरिक्त खाली स्थान हो जाएगा। इस खाली स्थान का उपयोग यात्री कोच के लिए किया जा सकेगा।
नई तकनीक के उपयोग पावर कार में ऑयल लीकेज या ऑयल के फैलाव जैसी समस्याओं से मुक्ति मिलेगी। आग लगने का खतरा नहीं रहेगा। सामान्यतया डीजी सेट पावर कार में 1 घंटे में लगभग 40 लीटर डीजल की खपत होती है। आने वाले दिनों में ज्यादातर रेलगाडिय़ों में एलएचबी कोच इस्तेमाल होंगे और यह आधुनिक पावर कार भी सभी प्रकार के एलएचबी टाइप के कोचों के लिए उपयोगी एवं अनुकूल है।
-अजय कुमार पाल, वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक, कोटा
Published on:
16 Jul 2021 10:35 am
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