
कागज पर चल रहे उद्योग गायब, करोड़ों की जमीन पर काबिज उद्यमी
कोटा. सरकारी कागजों में बेशकीमती जमीन पर उद्योग चल रहे हैं लेकिन धरातल पर न चिमनियां धुआं उगल रही हैं और ना ही उद्योग अस्तित्व में हैं। बस उद्यमी उद्योग के नाम पर जमीन पर कब्जा जमाए बैठे हैं। क्योंकि, उद्योग के नाम पर सरकार से कौडिय़ों के दाम पर ली गई यह जमीन आज करोड़ों की हो गई। जिला प्रशासन की ओर से हाल ही एक औद्योगिक क्षेत्र की तैयार करवाई गई गोपनीय रिपोर्ट में यह तथ्य सामने आया है।
प्रशासनिक सूत्रों ने बताया कि जिला प्रशासन ने राष्ट्रीय राजमार्ग 12 पर झालावाड़ रोड पर प्राइम जगह पर स्थित भीमपुरा औद्योगिक क्षेत्र की जिला उद्योग केन्द्र से तथ्यात्मक रिपोर्ट तैयार करवाई थी। अधिकारियों की टीम ने इस औद्योगिक क्षेत्र के एक-एक भूखण्ड की जांच की तो हैरानी करने वाली जानकारी सामने आई है। उद्योग विभाग ने मूल प्रत्रावली के साथ रिपोर्ट जिला प्रशासन को भेज दी।
पांच ऑपरेशनल, बाकी दिखावटी
जिला प्रशासन ने राजस्व जमीन पर भीमपुरा औद्योगिक क्षेत्र करीब ढाई दशक पहले विकसित किया था। इसमें कुल 17 भूखण्ड थे जिनमें से 16 आवंटित कर दिए गए थे। सरकारी कागजों में सभी उद्योग चल रहे हैं जबकि हकीकत में केवल पांच उद्योग ऑपरेशनल हैं। 9 उद्यमियों ने यहां उद्योग दिखाने के लिए चारदीवारी कर दी और कुछ ने खराब मशीनरी भी लगा दी, ताकि उद्योग नजर आए।
दो का तो अस्तित्व ही नहीं
यही नहीं, दो उद्योग तो अस्तित्व में ही नहीं हैं, मौके पर इन्हें ढंूढना तक मुश्किल है। श्रीराम प्लास्टिक को उद्योग स्थापित करने के लिए 30 बीघा जमीन आवंटित की गई थी, लेकिन टीम को मौके पर इसका कोई अस्तित्व ही नहीं मिला। गोमती क्लोरेज प्रा. लि. ब्लिचिंग पाउडर एवं हाइडे्रड लाइन का उद्योग अस्तित्व में नहीं मिला है। इसके लिए छह बीघा जमीन आवंटित की गई थी। यह फर्म भाजपा के पूर्व सांसद के परिवार से जुड़ी है।
चार से 40 बीघा में जमीन आवंटित
उद्योगों के लिए यहां लम्बे-चौड़े भूखण्ड आवंटित किए गए थे। ज्यादातर औद्योगिक क्षेत्रों में दस हजार वर्गफीट के भूखण्ड हैं। जबकि इस औद्योगिक क्षेत्र में कम से कम चार बीघा तथा अधिकतम 40 बीघा में जमीन आवंटित की गई है। आवंटित दर 200 रुपए प्रति फीट से भी कम थी। अब यहां 70 लाख से एक करोड़ प्रति बीघा के दाम हो गए हैं।
यह है नियम
नियमों के तहत औद्योगिक क्षेत्र में दो साल में उद्योग स्थापित करने के लिए निर्माण कार्य शुरू करना होता है। पालना नहीं करने पर रीको व आवंटन एजेन्सी भूखण्ड निरस्त करने की कार्रवाई कर सकती है। उद्यमियों ने यहां उद्योग दिखाने के लिए चारदीवारी कर दी और कुछ ने खराब मशीनरी लगा दी, ताकि उद्योग नजर आए।
एक नजर
कुल भूखण्ड-17
आवंटित भूखण्ड -16
रिक्त भूखण्ड-1
Published on:
01 Aug 2018 09:00 am
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