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संक्रमण श्वसन तंत्र को डेमेज करता, उससे पहले मिली संजीवनी

कोटा शहर में भले ही कोरोना का संक्रमण लगातार फैलता जा रहा है। इससे रोजाना नए कोरोना पॉजिटिव मरीज सामने आ रहे है, लेकिन सुखद खबर यह भी है कि संक्रमण श्वसन तंत्र को डेमेज करता उससे पहले मरीजों को अस्पताल में बेहतर उपचार मिला। कोरोना मरीजों के इलाज में एक महिला को छोड़कर किसी अन्य रोगी को वेन्टिलेटर पर रखने की जरुरत नहीं पड़ी।    

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कोटा

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Abhishek Gupta

May 15, 2020

संक्रमण श्वसन तंत्र को डेमेज करता, उससे पहले मिली संजीवनी

संक्रमण श्वसन तंत्र को डेमेज करता, उससे पहले मिली संजीवनी

कोटा. शहर में भले ही कोरोना का संक्रमण लगातार फैलता जा रहा है। इससे रोजाना नए कोरोना पॉजिटिव मरीज सामने आ रहे है, लेकिन सुखद खबर यह भी है कि संक्रमण श्वसन तंत्र को डेमेज करता उससे पहले मरीजों को अस्पताल में बेहतर उपचार मिला। कोरोना मरीजों के इलाज में एक महिला को छोड़कर किसी अन्य रोगी को वेन्टिलेटर पर रखने की जरुरत नहीं पड़ी। संक्रमितों की हिस्ट्री भी ज्यादा कष्टदायक नहीं मिली। अस्पताल अधीक्षक डॉ. सीएस सुशील ने बताया कि जिले में अब तक 270 मरीज कोरोना पॉजिटिव मिले है। इनमें से करीब 80 फीसदी में कोरोना के लक्षण नहीं मिले है, वे सम्पर्क में आए है। सम्पर्क की चैन ही शहर में लगातार बढ़ती जा रही है। इससे शहर में कोरोना फैलता जा रहा है।

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शुगर अन कंट्रोल से मौत...

मेडिकल कॉलेज के सीनियर फिजिशियन डॉ. एस जैलिया ने बताया कि कोरोना से संक्रमित कई मरीज अन्य गंभीर बीमारी से भी पीडि़त मिले है, लेकिन वे देरी से अस्पताल पहुंचे है। इससे उनकी मौत हुई है। दो मरीजों को कॉर्डियक मसाज दिया गया। उनकी अस्पताल पहुंचते ही मौत हो गई। कुछ मरीजों की शुगर अन कंट्रोल रही। उनकी शुगर 350 से 500 तक रही। एक मरीज की तो 570 तक शुगर पहुंच गई थी। गुमानपुरा सिंधी कॉलोनी निवासी महिला का ब्लड प्रेशर हाई रहा। वह हाइपरटेंशन व न्यूमोनिया की भी शिकार थी। उनकी सुबह पॉजिटिव रिपोर्ट आने के बाद दोपहर में उनकी मौत हो गई। उन्हें चंद घंटों के लिए वेन्टिलेटर की जरुरत पड़ी।

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वायरस ज्यादा घातक नहीं

मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग के आचार्य डॉ. मनोज सालूजा ने बताया कि कोरोना की एल व एस दो स्ट्रेन है। इनमें से संभवत: एस स्ट्रेन कोटा में है। इसकी संक्रामता तो अधिक है, लेकिन मारक क्षमता कम घातक है। यह मरीजों के श्वसन तंत्र को प्रभावित तो कर रहा है, लेकिन गंभीर रूप से प्रभावित नहीं कर रहा है। इससे मृत्युदर कम है।

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मनोचिकित्सक डॉ. सीएस सुशील ने बताया कि मरीज के भर्ती होते ही कोरोना के डर व उदासी को दूर करने के लिए मनोचिकित्सक के माध्यम से साइको थैरेपी दी जा रही है। डॉक्टरों की इस झपकी से मरीज मानसिक रुप से स्वस्थ हो रहे है। इससे वे कोरोना को मात दे रहे है।