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Kota Kachori: चुनाव में प्रत्याशियों से ज्यादा चर्चा होती है इसकी, इसके बिना पूरी नहीं हो रही चुनावी बैठक

Kota Kachori: कोटा वालों को कचौरी बेहद पसंद है। चुनावी महोत्सव में कार्यकर्ता और समर्थकों के नाश्ते में ये और भी जरूरी हो गई है। त्योहारी सीजन होने से भी मेहमानों की मनुहार कचौरी से हो रही है। शहर के विभिन्न क्षेत्रों में विक्रेताओं की मानें तो हाल ही में शहर में कचौरी की खपत 30 फीसदी बढ़ी है।

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Kota Kachori: कोटा वालों को कचौरी बेहद पसंद है। चुनावी महोत्सव में कार्यकर्ता और समर्थकों के नाश्ते में ये और भी जरूरी हो गई है। त्योहारी सीजन होने से भी मेहमानों की मनुहार कचौरी से हो रही है। शहर के विभिन्न क्षेत्रों में विक्रेताओं की मानें तो हाल ही में शहर में कचौरी की खपत 30 फीसदी बढ़ी है। चुनाव प्रचार में जुटे कार्यकर्ताओं के लिए सुबह-शाम दोनों समय नाश्ते में कचौरी, समौसा व ब्रेड पकौड़ा दिया जा रहा है। ऐसे में कचौरी की खपत इन दिनों 1 लाख से बढकऱ 1.30 लाख से ऊपर पहुंच गई है।

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बढ़ जाएगी डेढ़ गुना खपत
कचौरी विक्रेताओं के अनुसार, शहर में 250 से 300 से ज्यादा छोटी बड़ी दुकानें है। इन दुकानों पर प्रतिदिन 1 लाख से ज्यादा कचौरी की बिक्री होती है। प्रत्याशियों के नामों की घोषणा व चुनाव प्रचार शुरू होते ही शहर में कचौरी की बिक्री में अचनाक 30 फीसदी की वृद्धि हो गई है। चुनाव में एक सप्ताह का समय है और चुनाव प्रचार भी जोर शोर से चल रहा है। दोनों ही पार्टियों के शहर में जगह-जगह चुनाव कार्यालय खुल गए है। चुनाव कार्यालय पर काम करने वाले व प्रचार में जुटे कार्यकर्ताओं के लिए सुबह नाश्ते में कचौरी व ब्रेड पकौड़े की मांग बढ़ रही है। सामान्यत: शहर में एक लाख कचौरी की बिक्री होती है। पूरे शहर में चुनाव प्रचार में जुटे कार्यकर्ताओं के लिए अभी रोजाना 30 से 40 हजार कचौरी जा रही है। जो बढकऱ 1.50 लाख हो जाएगी और चुनाव परिणाम तक जारी रहेगी।

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हर वार्ड में कार्यकर्ताओं के लिए आ रहा नाश्ता
कोटा शहर में उत्तर और दक्षिण में मिलाकर 150 वार्ड हैं और दोनों ही पार्टियों के अलावा अन्य पार्टियों व निर्दलीयों के कार्यकर्ता भी चुनाव प्रचार में जुटे हैं। प्रत्येक वार्ड में 50 कार्यकर्ताओं के लिए नाश्ते की व्यवस्था की जा रही है। कच्ची बस्तियों में कार्यकर्ताओं की संख्या ज्यादा होती है।