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Gold-Silver Price: सोना-चांदी के दामों में लगातार तेजी दर्ज की जा रही है। बीते एक साल के आंकड़े देखें तो वैश्विक अनिश्चितताओं और भू-राजनीतिक तनावों के बीच भारतीय सर्राफा बाजार में कीमती धातुओं ने पुराने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए।
मकर संक्रांति के बाद से चांदी की कीमतों में जबरदस्त उछाल देखने को मिल रहा है। जनवरी 2025 में चांदी के दाम करीब 90 हजार रुपए प्रति किलो थे, जो एक साल में जनवरी 2026 में शुक्रवार को बढ़कर लगभग 2 लाख 72 हजार रुपए प्रति किलो तक पहुंच गए।
यानी चांदी की कीमतों में करीब तीन गुना वृद्धि दर्ज की गई। कीमतों में यह तेजी भले ही वैश्विक कारणों से आई हो, लेकिन इसका सीधा असर घरेलू सर्राफा बाजार पर दिखाई दे रहा है।
आगामी दिनों में शादी-विवाह का सीजन शुरू होने वाला है, लेकिन ऊंचे भावों के चलते आम ग्राहक बाजार से दूर होता नजर आ रहा है। सर्राफा कारोबारियों के अनुसार अब बाजार में केवल निवेशक ही सक्रिय हैं, जबकि गहनों की नियमित खरीदारी लगभग ठप हो गई है।
जनवरी 2025 में चांदी 90 हजार रुपए प्रति किलो के स्तर पर थी। फरवरी में यह 93 हजार और मार्च में 95 हजार रुपए प्रतिकिलो तक पहुंची। अप्रेल में चांदी पहली बार एक लाख रुपए के स्तर को छू गई, हालांकि मई-जून में इसमें हल्की गिरावट के साथ भाव करीब 98,500 रुपए रहे।
जुलाई में फिर से चांदी एक लाख रुपए पार कर गई। अगस्त में इसके दाम 1 लाख 12 हजार 500 रुपए और सितंबर में 1 लाख 25 हजार 500 रुपए प्रति किलो तक पहुंचे। त्योहारी सीजन के दौरान अक्टूबर-नवंबर में चांदी 1 लाख 50 हजार रुपए के आसपास रही, जबकि दिसंबर 2025 में इसके भाव 1 लाख 73 हजार रुपए प्रति किलो तक पहुंच गए।
इसके बाद जनवरी 2026 में चांदी ने सारे रिकॉर्ड तोड़ते हुए महज एक महीने में ही एक लाख रुपए की बढ़ोतरी के साथ 2 लाख 73 हजार रुपए प्रति किलो का आंकड़ा छू लिया। इस तरह निवेशकों को केवल एक महीने में करीब एक लाख रुपए प्रति किलो का रिटर्न मिला।
बाजार में यह धारणा मजबूत है कि अमरीकी फेडरल रिजर्व 2026 में ब्याज दरों में कटौती कर सकता है। ब्याज दरें घटने पर बॉन्ड जैसे निवेशों का रिटर्न कम हो जाता है, जिससे निवेशक सोना-चांदी की ओर आकर्षित होते हैं।
अमरीकी केंद्रीय बैंक प्रमुख जेरोम पॉवेल को लेकर संभावित जांच की चर्चाओं ने फेड की स्वतंत्रता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इससे डॉलर कमजोर हुआ और कीमती धातुओं की मांग बढ़ी।
वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, व्यापार युद्ध और बढ़ती महंगाई के डर से निवेशक सोने-चांदी को सुरक्षित देख रहे हैं। खासतौर पर चांदी की औद्योगिक मांग ज्यादा और आपूर्ति सीमित होने के कारण इसकी कीमतों में सोने से भी ज्यादा उछाल दर्ज किया गया है।
वर्तमान हालात में केवल वही ग्राहक बाजार में आ रहे हैं, जिनकी वास्तविक मजबूरी है। उनमें भी कम वजन की ज्वैलरी की मांग अधिक देखी जा रही है। मौजूदा समय में सोना-चांदी में निवेश जोखिमपूर्ण हो गया है, क्योंकि वैश्विक परिस्थितियां कब और कैसे बदल जाएं, इसका अनुमान लगाना मुश्किल है।
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Updated on:
17 Jan 2026 10:04 am
Published on:
17 Jan 2026 10:04 am
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