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JEE Main 2025 : कोविड के बाद 22 जनवरी से नए प्रारूप में होगी परीक्षा

केन्द्र पर मोटे सोल के जूते व बड़े बटन वाले कपड़ों की भी अनुमति नहीं, परीक्षा शुरू होने से आधा घंटे पहले बंद हो जाएंगे प्रवेश

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कोविड महामारी के समाप्त होने के बाद जेईई मेन 2025 की प्रवेश परीक्षा का आयोजन एक नए प्रारूप में किया जाएगा। जेईई मेन जनवरी सेशन 2025 की परीक्षा 22 जनवरी से शुरू होगी। इसमें विशेष बदलाव किए गए हैं। इस वर्ष जेईई मेन के प्रश्न पत्र के पार्ट-बी में अब कोई विकल्प नहीं होगा। इससे पहले, विद्यार्थियों को 10 प्रश्नों में से 5 प्रश्न चुनने का विकल्प मिलता था, लेकिन अब सभी 5 प्रश्न अनिवार्य होंगे।

एनटीए की ओर से आयोजित यह परीक्षा 6 दिनों में 11 शिफ्टों में होगी। इसमें एक शिफ्ट में 1 लाख 20 हजार से अधिक विद्यार्थियों के सम्मिलित होने की संभावना है। बीई/बीटेक प्रवेश परीक्षा के साथ बी-आर्क/बी-प्लानिंग प्रवेश परीक्षा भी 30 जनवरी को एक ही शिफ्ट में आयोजित की जाएगी। परीक्षा कम्प्यूटर बेस्ड होगी। देश-विदेश के 331 शहरों में यह परीक्षा होगी। विद्यार्थियों के लिए पहले ही एडवांस सिटी इंटीमेशन व परीक्षा के एडमिट कार्ड जारी कर दिए हैं।

परीक्षा शुरू होने से आधा घंटे पहले प्रवेश बंद कर दिए जाएंगे। विद्यार्थियों को प्रवेश पत्र में दिए गए बार कोड रीडर के माध्यम से लैब आवंटित की जाएगी। विद्यार्थी अपने साथ ओरिजनल आईडी प्रूफ, सेल्फ डिक्लरेशन भरा हुआ प्रवेश पत्र, पारदर्शी पेन, स्वयं का फोटो, पानी की पारदर्शी बोतल साथ में लाएं।

आईडी प्रूफ की फोटोकॉपी या मोबाइल से लिए हुए फोटो से एंट्री नहीं दी जाएगी। कोई भी इलेक्ट्रोनिक गैजेट साथ लाने की अनुमति नहीं होगी। केन्द्र पर मोटे सोल के जूते व बड़े बटन वाले वस्त्रों की भी अनुमति नहीं होगी। दिव्यांग स्टूडेंट्स को स्क्राइब के साथ परीक्षा के लिए एक घंटे का समय अतिरिक्त दिया जाएगा।

नेशनल एजुकेशन पॉलिसी के तहत सुधार की आवश्यकता

एजुकेशन एक्सपर्ट देव शर्मा ने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में फिजिक्स और कैमिस्ट्री के प्रश्न पत्रों में अधिकतर ‘फार्मूला और फैक्ट’ आधारित प्रश्न थे, जो एनईपी-2020 के उद्देश्य से मेल नहीं खाते थे। एनईपी का उद्देश्य विद्यार्थियों में रटने की प्रवृत्ति को कम करके उनके विश्लेषणात्मक और ज्ञानोपयोगी कौशल को बढ़ावा देना है। गणित के प्रश्न पत्रों का स्तर एनईपी-2020 के अनुरूप था, लेकिन फिजिक्स और कैमिस्ट्री में बदलाव की जरूरत है, ताकि इन विषयों में भी स्टूडेंट्स की सोच और समझ को बढ़ावा मिल सके।