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खादी को मिली संजीवनी, हाड़ौती के बुनकरों के चेहरे खुशी से चमके

बजट 2020 : खादी वस्त्रों की बिक्री पर प्रतिशत की छूट

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कोटा

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Mukesh Gaur

Feb 21, 2020

खादी को मिली संजीवनी, हाड़ौती के बुनकरों के चेहरे खुशी से चमके

खादी को मिली संजीवनी, हाड़ौती के बुनकरों के चेहरे खुशी से चमके

कोटा. हाड़ौती में खादी वस्त्र बनाने वाले करीब 500 से अधिक कतिन बुनकर हैं। कोटा, सांगोद, मांगरोल, केशवरायपाटन, कापरेन, रोटेदा, बूंदी, बूंदी का गोठड़ा, दबलाना, रानीपुर, देई और हिंडोली आदि क्षेत्रों में रह रहे यह कतिन बुनकर हर साल 90 लाख का कपड़ा तैयार करते हैं, लेकिन जीएसटी के बाद इनकी रोजी रोटी खतरे में पड़ गई। राजस्थान पत्रिका ने 15 अगस्त 2019 और 26 जनवरी 2020 को इस बाबत खबरें प्रकाशित की। जिसके बाद प्रदेश सरकार ने खादी ग्रामोद्योग को बचाने के लिए खादी वस्त्रों की खरीदारी बढ़ाने के लिए 50 प्रतिशत छूट देने की घोषणा की है।

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परमिट टैक्स घटा : ट्रांसपोर्ट कारोबार को मिली राहत
परिवहन विभाग की नई परमिट नीति ने कोटा के ट्रांसपोर्ट कारोबार की कमर तोड़ दी थी। इसके बाद कोटा के निजी बस मालिकों ने जयपुर तक धरना प्रदर्शन कर विरोध जताया। राजस्थान पत्रिका ने प्रमुखता से इस मामले को प्रकाशित किया। इसके बाद परिवहन मंत्री प्रतापसिंह खाचरियावास ने राहत देने की घोषणा की थी। जिसे बजट घोषणा में अमली जामा पहनाते हुए औद्योगिक प्रतिष्ठानों एवं कांट्रेक्ट कैरेज का परमिट हासिल करने के लिए तय की गई 14 हजार रुपए की राशि को 23 से 32 सीटर छोटी बसों के लिए घटाकर 10 हजार रुपए कर दिया है। 10 किमी की दूरी में स्थित दो नगर पालिकाओं के बीच चलने वाली बसों के लिए तय की गई 250 रुपए प्रति सीट के कर को अब 100 रुपए प्रतिमाह, कांट्रेक्ट कैरेज बसों की तीन श्रेणियों पर 10 रुपए प्रतिमाह की छूट देने और उपनगरीय मार्गों के परमिट की चारों श्रेणियों में 50 रुपए प्रति सीट छूट देने की भी घोषणा की है। निजी बस मालिकों ने सरकार की इस घोषणा पर खुशी जताई है।