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स्वतंत्रता सैनानी आनंद लक्ष्मण खांडेकर नहीं रहे

कोटा. स्वतंत्रता सैनानी आनंद लक्ष्मण खांडेकर नहीं रहे। उनका शुक्रवार को दोपहर 3.15 मिनट पर निधन हो गया। वह 94 वर्ष के थे। वह अपने पीछे भरापूरा परिवार छोड़कर गए हैं।

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कोटा

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Hemant Sharma

Oct 02, 2020

aanand laxaman khandekar

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कोटा. स्वतंत्रता सैनानी आनंद लक्ष्मण खांडेकर नहीं रहे। उनका शुक्रवार को दोपहर 3.15 मिनट पर निधन हो गया। वह 94 वर्ष के थे। वह अपने पीछे भरापूरा परिवार छोड़कर गए हैं। खांडेकर के बेटे जयंत खांडेकर ने बताया कि पिता आनंद लक्ष्मण खांडेकर का शनिवार किशोरपुरा मुक्तिधाम पर अंतिम संस्कार किया जाएगा। सुबह 9 बजे दादाबाड़ी स्थित स्वनिवास से अंतिमयात्रा किशोरपुरा मुक्तिधाम के लिए रवाना होगी।


समाज सेवी भी थे खांडेकर


94 वर्षीय खांडेकर का जन्म 8 जून 1926 को बारां में हुआ। वर्ष 1942 में उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में छात्र आंदोलन कर्ता के रूप में भाग लिया।इसके लिए खांडेकर को दंडित भी होना पड़ा। बारां हाई स्कूल के प्रधानाध्यापक ने उन्हें दंडित भी किया। उनकी हिस्ट्री शीट तैयार की गई। हालांकि उन्होंने इस हिस्ट्री शीट को अन्य साथियों के साथ मिलकर एक रात स्कूल से निकलवाली व उसे जला दिया। बाद में उन्होंने हरबर्ट कॉलेज कोटा से इंटर किया।

वर्ष 1946-1947 में उन्होंने मध्यप्रदेश में रहकर वहां डेढ़ वर्ष तक आदिवासी क्षेत्र के अशिक्षित अभावग्रस्त आदिवासियों की स्थित को सुधारने का कार्य किया। देश की आजादी के बाद 1952 में पहले आम चुनाव के दौरान उन्हें कांग्रेस का जिला प्रमुख बनाया गया। 1953-54 में उन्होंंने गुजरात के आनंद में रहकर सामाजिक कार्य किए।


गौवा आंदोलन में भी निभाई भूमिका


खांडेकर ने गौवा आंदोलन में भी सक्रिय भमिका निभाई। इस दौरान उन्होंने लाठियां भी सही। वह कांग्रेस में भी विभिन्न पदोंं पर रहे व 1967 में उन्होंने कांग्रेस छोड़ दी व सामाजिक कार्यों में जुट गए। 1975 में वह पत्रकारिता के क्षेत्र में आ गए। उनके सामाजिक सरोकार के कार्यों के लिए 1980 में समाज कल्याण विभाग ने अंतरराष्ट्रीय बाल वर्ष के दौरान उन्हें समाज सेवी के रूप में सम्मानित किया।

खाडेकर ने 1959 में समाज कल्याण बोर्ड के सहयोग से नगर विकास खंड नामक संस्था की स्थापना भी की थी। बाद में करनी नगर विकास समिति के नाम से विख्यात हुई। वह खादी ग्रामोद्योग समिति से भी जुडे रहे। उन्हें खादी से गहरा लगाव था।

पुत्र जयंत बताते हैं कि वह भरपूरा परिवार छोड़कर गए हैं। दो बेटे व 4 बेटियां व उनका परिवार है। इधर डॉ आरसी साहनी बताते हैं कि खांडेकर में समाज सेवा की भावना कूट -कूट कर भरी थी। वह डॉ साहनी के साथ कई जगहों पर नशामुक्ति कार्यक्रमों मेंं गए।