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मानसून की बेरुखी से किसानों की नींद उड़ी, हाड़ौती में खरीफ की बुवाई प्रभावित

खरीब फसल की बुवाई के लिए पिछले डेढ़ दो माह से किसान खेत तैयार कर बुवाई के लिए मानसून की पहली बरसात का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन मानसून की बेरुखी से अब किसानों की नींद उडऩे लगी है।

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हाड़ौती में लक्ष्य की मात्र 12 प्रतिशत ही हुई बुवाई

मानसून की बेरुखी से किसानों की नींद उड़ी, हाड़ौती में खरीफ की बुवाई प्रभावित

हाबुलाल शर्मा

कोटा. किसी ने जैसे तैसे महंगे सोयाबीन बीज का इंतजाम किया, तो किसी ने धान की पौध तैयार की। किसान पिछले एक माह से सारी तैयारियां करके बैठे हैं लेकिन बारिश नहीं होने से सभी तैयारियां धरी है। खरीब फसल की बुवाई के लिए पिछले डेढ़ दो माह से किसान खेत तैयार कर बुवाई के लिए मानसून की पहली बरसात का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन मानसून की बेरुखी से अब किसानों की नींद उडऩे लगी है।

प्री मानसून की बारिश केवल झालावाड़ जिले में हुई तो वहां किसानों ने सोयाबीन, उड़द, अरहर व मक्का की बुवाई कर दी, लेकिन बरसात नहीं होने से जमीन सूख गई और बीज अंकुरित नहीं होने से किसानों के सामने दुबारा बुवाई करने की नौबत सामने खड़ी हो गई। मानसून की बेरुखी के चलते 1 जुलाई तक हाड़ौती सम्भाग में बुवाई के लक्ष्य की मात्र 12 प्रतिशत ही बुवाई हो पाई है। सोयाबीन की बुवाई का सही समय 25 जून से 8-10 जुलाई तक ही माना जाता है।
कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक रामावतार शर्मा ने बताया कि मानसून की बेरुखी का असर हाड़ौती सम्भाग में बुवाई का लक्ष्य आगे नहीं बढ़ पा रहा। ऐसे ही रहा तो विभिन्न फसलों की बुवाई का लक्ष्य पूरा नहीं हो पाएगा।


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