
सुनो सरकार...इनका ताला कब खुलेगा?
कोटा . सुपर स्पेशलिटी विंग चालू नहीं होने से संभाग के गुर्दा रोगी भी प्रभावित हैं। सुपर स्पेशलिटी विंग के लिए दो तरह की आधुनिक डायलिसिस मशीनें आ चुकी है, लेकिन एक साल से ताले में बंद है। विंग हैंडओवर नहीं होने के कारण ये अत्याधुनिक मशीनें धूल फ ांक रही। गुर्दा मरीजों को इनका लाभ नहीं मिल पा रहा है। मजबूरन
गुर्दा रोगियों को नए अस्पताल में नॉर्मल डायलिसिस से ही काम चलाना पड़ रहा है।
1. सीआरआरटी (कंटीन्यूस रिनल रिप्लसमेंट थैरेपी)
यह डायलिसिस मशीन 20 लाख की है। मल्टीऑर्गन फेलियर होने पर लंग्स, किडनी, हार्ट, सांस की तकलीफ के रोगियों की डायलिसिस में सहायक साबित होती है। ऐसा माना जाता है कि इन मशीन की थेरैपी से रोगी की उम्र 2 से 5 साल तक बढ़ती है। ये ऐसे रोगियों के लिए ज्यादा फ ायदेमंद होगी, जिनके पर्याप्त मात्रा में डायलिसिस नहीं हो पा रहा या साइड इफेक्ट हो रहा है।
2. एचडीएफ (हिमो डाया फिट्रेशन) डायलिसिस मशीन
इस मशीन की लागत करीब 15 लाख रुपए आई है। नॉर्मल डायलिसिस में कई बार रक्त में कुछ तत्व नहीं हट पाते है।
Published on:
12 Feb 2020 03:19 pm
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