
राजस्थान के कोटा में चम्बल नदी पर घाटों के संगम से बनेगा रिवरफ्रंट।
कोटा. पर्यटन स्थलों से भरपूर राजस्थान में अब 2.75 किमी लम्बा चम्बल नदी का किनारा देश ही नहीं दुनिया में विशिष्ट पहचान बनने जा रहा है। कोटा में चम्बल नदी पर विकसित किए जा रहे रिवरफ्रंट की थीम दुनिया के सभी रिवरफ्रंट से बिल्कुल अलग है। यहां मनोरंजन, ज्ञान के साथ-साथ देश दुनिया के देशों की झलक भी यहां देखने को मिलेगी। मध्यप्रदेश से निकली चम्बल राजस्थान के कई जिलों से गुजरती है। पहली बार कोटा में रिवरफ्रंट बन रहा है। इसमें विभिन्न तरह के घाट दुनियाभर के पर्यटकों का ध्यान खींचेंगे। यहां सांस्कृतिक विरासत से नई पीढ़ी का परिचय हो सकेगा। रिवरफ्रंट पर चम्बल माता गार्डन भी बनाया जाएगा। इसमें 20 मीटर के पेडेस्टल पर 40 मीटर ऊंची चम्बल माता की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। यह अपनी तरह की पहली प्रतिमा होगी। कोटा बैराज के पास बनने वाले इस गार्डन में विश्व स्तरीय फाउंटेन शो का निर्माण किया जा रहा है। इसका व्यास 40 मीटर होगा। मैसूर के वृंदावन गार्डन की तर्ज पर आधुनिक तकनीक के साथ इसका निर्माण किया जा रहा है। उद्यान के पूर्वी छोर पर संग्राहलय का निर्माण किया जा रहा है। जहां रिवरफ्रंट के मॉडल प्रदर्शन के साथ कोटा के विकास की गाथा और कला संस्कृति की झलक दिखेगी। गार्डन में आने वाले पर्यटकों के लिए पार्किंग और अन्य सुविधाओं का विकास किया जाएगा।
रोजगार के नए विकल्प मिलेंगे
पूर्वी रिवरफ्रंट पर भ्रमण करने के लिए सीनियर सिटीजन, फिजिकल चैलेंज को ध्यान में रखकर सुविधाएं विकसित होगी और हर घाट पर सीढिय़ों के साथ रैम्प भी बनाए जा रहे हैं। बाढ़ नियंत्रण को ध्यान में रखकर निर्माण कार्य किया जाएगा। घाटों के निर्माण में तकनीकी दृष्टि से नदी के बहाव क्षेत्र को बढ़ाया जा रहा है। इस परियोजना के पूरा होने पर रोजगार के नए अवसर पैदा होने की आस जगी है। संपूर्ण रिवरफं्रट राजस्थान की कला, संस्कृति और हाड़ौती के समृद्ध वास्तुशिल्प के अनुसार बनाया जा रहा है। वर्ष 2022 तक इसे योजना को मूर्त रूप देने का लक्ष्य रखा है। नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल के बेहतर विजन से कोटा में यह बड़ी सौगात मिलेगी। धारीवाल के नेतृत्व में नगरीय विकास एवं नगर विकास न्यास कोटा के अधिकारी इस योजना को मूर्त रूप देने के लिए रात दिन परिश्रम कर रहे हैं। प्रसिद्ध आर्केटेक्ट अनूप भरतरिया ने इस योजना को डिजाइन किया है।
सांस्कृतिक विरासत को संजोएंगे
पूर्वी छोर पर सांस्कृतिक घाट का निर्माण किया जाएगा। जिसकी लंबाई 60 मीटर है। यहां सांस्कृतिक कार्यक्रम करने के लिए ओपन थियेटर और संगीत वादन के लिए प्लेटफार्म की सुविधा मिलेगी। यहां महान संगीतज्ञयों की आकृतियां भी उकेरी जाएंगी। संगीत की कला को बढ़ावा देने के लिए इसका निर्माण किया जाएगा।
पुस्तक की तरह होगा साहित्य घाट
60 मीटर लंबाई में साहित्य घाट का निर्माण किया जा रहा है। जिसका वास्तुशिल्प पुस्तक की तरह होगा। यहां पांच मंजिला हवेली को पुस्तकालय के रूप में बनाया जा रहा है। जिसमें साहित्य की संरचनाओं को आधुनिक तकनीक के साथ पढ़ा जा सकेगा। साहित्य घाट पर बनी पुस्तक में बनी सीढिय़ों में कवि तुलसीदास, सूरदास, कालीदास, कबीर, मुंशी प्रेमचंद और महादेवी वर्मा की आकृति भी दिखाई देगी।
ङ्क्षसह घाट पर होगी शेरों की मूर्तियां
300 मीटर लंबे सिंह घाट पर लोगों को घूमने के लिए बड़ा प्लाजा बनाया जाएगा। कोटा की हस्तशिल्प और कोटा डोरिया व अन्य उत्पादों के लिए दुकानों का निर्माण भी किया जाएगा, ताकि पर्यटकों को उपलब्ध हो सके। इस घाट पर शेरों की नौ मूर्तियां लगाई जाएंगी।
आध्यात्मिक से जोड़ेगा ये घाट
भारतीय जीवन शैली के योग, आध्यात्म और ध्यान की शिक्षा से लोगों को जोडऩे के लिए आध्यात्मिक घाट का निर्माण किया जा रहा है। इसका मुख्य आकर्षण भगवत गीता पर आधारित कई निर्मित स्कल्पचर्स होंगे।
राजस्थान विरासत की दिखेगी झलक
360 मीटर लम्बे इस घाट में राजस्थान के 9 क्षेत्रों का वास्तुशिल्प कला संस्कृति को प्रदर्शित करते हुए इस घाट का निर्माण किया जा रहा है। ढूढ़ाड़, बृज, हाड़ौती, मेवाड़, मारवाड़, वागड़, शेखावाटी, किशनगढ़ के वास्तुशिल्प की झलक अनुसार राजस्थान विरासत स्ट्रीट बनाई जा रही है। जिसमें हर क्षेत्र की हस्तशिल्प, खानपान, इतिहास, कला एवं संस्कृति कॉम्पलेक्स बनाया जा रहा है। इस घाट के सामने पर्यटकों के हाथी, घोड़ा, ऊंट की सवारी के आनंद सुविधा मिलेगी। इस जगह का निर्माण घडिय़ालों को रेखांकित करते हुए बनाया जाएगा।
एलईडी गार्डन
आधुनिक तकनीक और एलईडी क्रांति को पेड़ों और ऑर्ट इफेक्ट में प्रदर्शित करते इस गार्डन का निर्माण किया जा रहा है। जहां पर एक भव्य वाटरफाल भी बनाया जा रहा है। इसके अलावा कोटा गढ़ सिटी पैलेस के सामने खाली जमीन पर उद्यान विकसित किया जाएगा।
शिला घाट
एलईडी गार्डन के आगे कुन्हाड़ी श्मशान तक खूबरत शिलाएं चम्बल में प्राकृतिक सौंदर्यी प्रदर्शित करती हैं। उन शिलाओं का बरकार रखते हुए उस घाट के ऊपर हाड़ौती वास्तुशिल्प के अनुसार निर्माण कर एक सुदंर वॉक वे बनाया जा रहा है। जिसकी लंबाई 210 मीटर है।
ग्रैण्ड आर्च
हाड़ौती में कोटा के पास स्थित बारोली के ऐतिहासिक निर्माण को वास्तुशिल्प के अनुसार एक ग्रैण्ड आर्च का निर्माण किया जाएगा। इससे हाड़ौती के वास्तुशिल्प को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी। इसी घाट से चम्बल नदी में आधुनिक तकनीक से बनी कोटा वास्तुशिल्प की विरासत की थींम पर बनी नावों का संचालन किया जाएगा। यहां से नदी में क्रूज एवं घाट दर्शन की नावों का भी संचालन होगा।
घंटाघर घाट पर लगेगी धूप घड़ी
पूर्वी छोर पर ही एक घंटाघर घाट का निर्माण किया जा रहा है, इस घाट के ऊपरी हिस्से पर 9.5 मीटर व्यास की अद्भुत घंटी लगाई जाएगी। इसके साथ ही एक घंटाघर निर्माण किया जाएगा। जिसके पीछे राजस्थानी वास्तुशिल्प की विरासत में विभिन्न प्रकार की घडिय़ां लगाई जा रही हैं। इस घाट पर धूप घड़ी भी लगाई जाएगी।
वल्र्ड स्ट्रीट
वल्र्ड स्ट्रीट की लंबाई 240 मीटर है और इस पर विश्व के पर्यटकों के लिए उनके खाने की पीने की व्यवस्था के साथ अनेक देशों की वास्तुकला को एक फसाड़ के रूप में प्रदर्शित किया जाएगा। घाट में लोगों के बैठने व भ्रमण करने की सुविधा बनाई जा रही है। 235 एमएसएल से 250 एमएसएल तक पूरे रिवरफ्रंट पर हर स्थान पर रैम्प से जाने की सुविधा दी जा रही है। वल्र्ड स्ट्रीट घाट पर एक 12 मीटर का ग्लोब लगाया जाएगा।
फव्वारा चौक
60 मीटर की लंबाई में बने इस राजस्थानी शिल्प में हाड़ौती और मेवाड़ की झलक दिखेगी। यहां सहेलियों की बाड़ी की छतरियों की तर्ज पर पव्वारों का निर्माण किया जाएगा। इस चौक पर कई तरह की गतिविधियों का आयोजन किया जा सकेगा।
गांधी की यादों का संजोएंगे
नदी के किनारे ऐतिहासिक बड़ी समाध और छोटी समाध के गार्डन और पुरातत्व का संरक्षण करते हुए जीर्णोद्वार कार्य कराया जाएगा। यहां महात्मा गांधी के अस्थि विर्सजन स्थल को एक यादगार स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा।
नंदी घाट
सकतपुरा श्मशान के सामने स्थित नंदी घाट पर भारतीय वास्तुशिल्प की थींम पर एक प्रांगण बनाया जा रहा है। जिसमें लाल सेंड स्टोन की भव्य नंदी की आकृति बनाई जाएगी। यह पहेलियों का ज्ञान विश्वभर के पर्यटकों तक पहुंचाएंगे। यह एक बेहतर सेल्फी केन्द्र भी होगा।
नदी में दिखेगा मशालों का प्रतिबिम्ब
कब्रिस्तान के सामने स्थित इस्लामिक आर्किटेक्चरल के तहत फसाड़ का निर्माण किया जा रहा है। इस घाट पर एक अनुक्रम में कई मशालें लगाई जा रही हैं। इनका प्रतिबिम्ब नदी में दिखाई देगा।
मंदिर घाट
60 मीटर लंबाई का यह घाट यहां स्थित मंदिर को जीर्णोद्वार करके बनाया जाएगा।
प्रताप चौक भी होगा खास
पश्चिम छोर पर आने वाले पर्यटक व आगन्तुकों के लिए प्रताप चौक एक एंट्री प्लाजा के रूप में कार्य करेगा। इससे पहले एक ग्राउंड पर विशाल पार्किंग के साथ पर्यटक सूचना केन्द्र का निर्माण किया जाएगा। यहां खाने पीने की सुविधा भी मिलेगी। यहीं रिवरफ्रंट का प्रबंधक कार्यालय, सिक्योरिटी कमांड सेन्टर और फैसेलिटिटी मैनेजमेंट सेन्टर का निर्माण किया जा रहा है। इसके पास ही पेडेस्टल पर भारतीय संस्कृति की तर्ज पर शिल्पकारी की जाएगी।
ये काम भी हो रहा
चम्बल में गिरने वाले 14 प्रमुख नाले जिनसे 40 एमएडी गंदा सीवरेज नदी में प्रवाहित होता हैं, उन्हें अलग पाइप से एसटीपी से कनेक्ट किया जाएगा। इसके लिए घाट के समान्तर सीवर लाइन डाली जाएगी। इसके बाद पानी का उपचारित करने के बाद भी नदी में छोड़ा जाएगा।
ऐसा होगा पश्चिम छोर
बैराज की तरफ से जवाहरलाल महाविद्यालय के सामने करीब 120 मीटर लम्बा जवाहर घाट का निर्माण किया जाएगा। इस घाट पर जवाहरलाल नेहरू के चिंतन करते हुए चेहरे का 1 मीटर ऊंचाई का मास्क बनाया जाएगा। जिसमें पर्यटक जवाहरलाल नेहरू की प्रमिता की आंखों तक जाकर रिवरफ्रंट का दृश्य देख सकेंगे।
पूर्वी छोर ऐसा दिखेगा
पूर्वी छोर पर स्थित रामपुरा श्मशान का जीर्णोद्वार किया जा रहा है। यहां होने वाली गतिविधियां आगे भी बरकार रहेंगी। घाटों को सौंदर्यीकरण किया जाएगा।
योजना पर 800 करोड़ खर्च होंगे
307 करोड़़ में बनेगी रिटेनिंग वॉल
130 करोड़ ईस्ट बैंक फसाड़ कार्य
90 करोड़ वेस्ट बैंक फसाड़ के कार्य
190 करोड़ सीवर प्रबंधन, विद्युत और पानी
42 करोड़ की लागत से बैराज के पास गार्डन
34 करोड़ की लागत से नयापुरा पुलिया के पास गार्डन
2.90 करोड़ की लागत से पार्किंग स्थल का निर्माण
5. 40 करोड़ से 33 केवी विद्युत सब स्टेशन
Published on:
12 Mar 2021 02:19 pm
बड़ी खबरें
View Allकोटा
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
