2.10 करोड़ का मुआवजा मिलेगा, एक लाख तो देने ही पड़ेंगे

कचौरी खाते हुए तय हुआ घूस का सौदा

By: Ranjeet singh solanki

Published: 05 Feb 2021, 11:05 PM IST

कोटा. लाडपुरा उपखण्ड अधिकारी के सूचना सहायक एकांत उपाध्याय तथा दलाल बलराम मीणा ने परिवादी से स्पष्ट कह दिया था कि 2.10 करोड़ का मामला है। इसलिए कम से कम एक लाख रुपए तो देने ही पड़ेंगे। परिवादी ने कहा कि आमदनी नहीं है, रुपयों का बंदोबस्त करना बहुत मुश्किल है। आरोपियों ने चेताया कि एक लाख रुपए नहीं देगा तो फैसला दूसरे पक्ष के नाम हो जाएगा, फिर मत कहना। इससे परिवादी डर गया और एक लाख रुपए देने की हां भर दी। फिर एसीबी में पहुंच गया। गोपालपुरा निवासी परिवादी हेमराज बलाई ने बताया कि दलाल बलराम उसके गांव का ही है। वहीं उसे कोटा लेकर आया था और 4 फरवरी को सूचना सहायक एकांत नयापुरा में एक कचौरी की दुकान पर आ गए और यहां कचौरी खाते हुए रिश्वत की राशि तय हुई। हेमराज ने बताया कि हाइवे में पहले सवा बीघा जमीन अवाप्त हुई थी, उसमें 24 लाख रुपए का मुआवजा आया था, जो तीनों भाइयों में 8-8 लाख रुपए बंट गया। 2017 में फिर 8.50 बीघा जमीन अवाप्त हुई। इसका 2 करोड़ 10 लाख रुपए का मुआवजा जारी किया था। इस जमीन में उनके चाचा ने हक जताया। इस जमीन का ही प्रकरण एसडीएम और एसीएम के यहां चल रहा था। परिवादी ने बताया कि दलाल व सूचना सहायक ने उनके चाचा से जमीन उनके नाम करवाने और मुआवजा उनके बैंक खातों में डालने के लिए पांच लाख रुपए की रिश्वत ली थी। उसने बताया कि आरोपी इससे ज्यादा घूस की मांग कर रहे थे। दो दिन फैसला रोकने के लिए ही एक लाख रुपए की घूस मांगी थी। वह घूस नहीं देना चाहता था, इसलिए एसीबी को परिवाद दिया। एएसपी चन्द्रशील ने परिवादी से गोपनीय सत्यापन करवाया, इसमें घूस मांगने की पुष्टि होते ही ट्रेप की योजना तैयार की गई। दलाल ने ज्यों ही एरोड्राम सर्किल के पास घूस ली, उसे दबोच लिया। ट्रेप में सीआई अजीत बगडोलिया, भरतसिंह, नरेन्द्रसिंह, दिलीपसिंह, देवेन्द्रसिंह, बृजरज, मुकेश् कुमार, मनोज कुमार, जोगेन्द्रसिंह तथा सरोज गौड़ शामिल थे। सूचना सहायक के घर की देर रात तक तलाशी ली गई।

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