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खुलासाः कोटा सेंट्रल जेल के कैदियों ने बयां की बेरहमी की दास्तां

कोई बंदी किसी बैरक से शिफ्ट होना चाहता है तो उसको जेलर की 'सेवा' करनी पड़ती थी। वो भी कैदी अनूप पाडिया के मार्फत। जब भी नया बंदी जेलर बत्तीलाल मीणा से मिलकर उसे दूसरी बैरक में शिफ्ट करने को कहता तो उन्हें यही जवाब मिलता कि इस बारे में अनूप से बात करो।

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Vineet Kumar Singh

Apr 05, 2017

कोटा की सेंट्रल जेल में तीन नई आमद बैरक हैं। इन बैरकों में ही नए बंदियों को रखा जाता है। प्रत्येक बैरक में डेढ़ सौ से दो सौ बंदी तक रखे जाते हैंं। इनमें जानवरों की तरह ठूंस-ठूंस कर भरा जाता है। एेसे में इनमें सो भी ढंग से नहीं सकते। बंदियों की हालत दम घुटने जैसी रहती है। अगर कोई बंदी किसी बैरक से शिफ्ट होना चाहता है तो उसको जेलर की 'सेवा' करनी पड़ती थी। वो भी कैदी अनूप पाडिया के मार्फत। जब भी नया बंदी जेलर बत्तीलाल मीणा से मिलकर उसे दूसरी बैरक में शिफ्ट करने को कहता तो उन्हें यही जवाब मिलता कि इस बारे में अनूप से बात करो।

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कुछ इसी तरह की शिकायतें जेल में बंद कैदी अनूप व जेलर बत्तीलाल मीणा से परेशान पीडि़त पक्षकारों ने बुधवार को एएसपी को बताई। बत्तीलाल के एसीबी की गिरफ्त में आने के बाद बुधवार को 7 पीडि़त पक्षकारों ने एएसपी को लिखित शिकायत दी। कुछ पीडि़तों ने पीड़ा तो बताई, लेकिन लिखित में शिकायत नहीं दी। एएसपी ठाकुर चंद्रशील के अनुसार करीब 20 से 25 लोगों ने फोन पर अपनी पीड़ा जाहिर की, लेकिन वे सामने नहीं आना चाहते। पीडि़तों का कहना था कि पता चलने पर ये जेल में रहकर भी हमारे साथ कुछ भी करवा सकते हैं। एसीबी ने उन सभी शिकायतों को जांच में शामिल किया है।

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अनूप ने कहा था जेलर की सेवा कर दो....

एक पीडि़त पक्षकार ने अपना नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर बताया कि दिसम्बर 2016 में जब वह जेल गया तो बैरक में अनूप के साथियों ने धक्का-मुक्की की। उसकी नाक में चोट लगी। बैरक में काफी संख्या में बंदी थे। मुझे किसी ने कहा कि जेलर से मिलकर दूसरी बैरक में शिफ्ट हो जाओ। उसने जब जेलर बत्तीलाल मीणा से दूसरी बैरक में शिफ्ट करने को कहा तो मीणा ने उसे अनूप से बात करने को कहा। लंगर में जब अनूप से बात की तो उसने कहा कि इसके लिए जेलर की सेवा करनी होगी। उसने 25 हजार रुपए की मांग की। उसने मेरे परिचित का फोन नम्बर लिया। दो दिन बाद उसने मेरे परिचित को फोन कर नयापुरा स्थित एक होटल में बुलाया। वहां जेलर बत्तीलाल उससे 25 हजार रुपए लेकर आए।

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मुलाकात कक्ष में खड़े होते अनूप के आदमी

एक अन्य पीडि़त पक्षकार ने बताया कि जेल में उससे रणजीत, अनूप पाडि़या, विनोद मीणा, सुरेश व आमीन ने जमकर मारपीट की। उससे 20 हजार रुपए मांगे। नहीं देने पर मल-मूत्र साफ करवाया। भय के चलते वह रुपए देने को तैयार हो गया। रविवार को मुलाकात कक्ष में उसकी मां आई तो अनूप के आदमी उसकी मां के पास बैरक में खड़े हो गए। जबकि अनूप व अन्य आरोपित उसके पास खड़े हो गए। मारपीट व गंदगी साफ करने से बचने के लिए मां ने 3 रुपए सैकड़ा पर 13 हजार रुपए लाकर दिए थे। पीडि़त पक्षकारों ने बताया कि जेल में लंगर का ठेका भी अनूप पाडि़या ही चलाता है। जो जेलर व अनूप को रुपए पहुंचाते, उन्हें अच्छा खाना मिलता।

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एक से डेढ़ हजार कमीशन

एसीबी सूत्रों के अनुसार पूछताछ में दलाल राजू व इमरान ने बताया कि उन्हें अनूप फोन कर बंदियों के परिजनों से रुपए लाने को कहता। जेलर बत्तीलाल को जितने रुपए देने होते उससे एक से डेढ़ हजार रुपए अधिक लाते। कमीशन के तौर पर अतिरिक्त राशि को वे जेलर को देने से पहले ही अपने पास रख लेते। सोमवार रात को भी दलाल राजू 14 हजार रुपए वसूल कर लाया था। इसमें से उसने डेढ़ हजार अपने पास रखकर 12500 जेलर को दिए थे।

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