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किस्मत भी नत मस्तक हो गई इस बेटी के हौसले देख कर…लाडली ने पिता को दिया सम्बल,पैरों पर खड़ा कर ही दिया…

कोटा का पहला ड्यूअल मोबिलिटी हिप ज्वाइंट ऑपरेशन

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कोटा

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Suraksha Rajora

Dec 09, 2018

कोटा. लक्ष्मीचंद ने तो बचने की उम्मीद ही छोड़ दी थी, लेकिन उसकी बेटी को विश्वास था कि उसके पिता एक दिन अपने पैरों पर खड़े होंगे। बस बेटी की इसी जिद ने डॉक्टरों को उसके पिता का ऑपरेशन करने पर मजबूर कर दिया। हुआ भी ऐसा ही पिता एक ही दिन में अपने पैरों पर खड़े हो गए। यह कहानी है रोझड़ी बस्ती निवासी लक्ष्मीचंद की।

 

कारपेंटर लक्ष्मीचंद मजदूर कर परिवार का पेट पाल रहा था, लेकिन 17 साल पहले अचानक पैरों में ऐसा दर्द उठा कि वह अपने पैरों पर खड़ा नहीं हो सका। कई निजी अस्पतालों में चक्कर लगाए, लेकिन दर्द का कोई इलाज नहीं हुआ। दो बार मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भी भर्ती हुए, लेकिन आर्थिक तंगी के चलते वे घर आ गए। इसी साल महावीर नगर स्थित निजी अस्पताल में दो बार हिप का ऑपरेशन करवाया, लेकिन सफल नहीं रहा।

 

आखिरकार लक्ष्मीचंद हार गया, लेकिन उसकी बेटी नीता है हार नहीं मानी। वह पहले डॉ. आरपी मीणा के घर पहुंची, लेकिन उन्होंने ऑपरेशन करने से मना कर दिया। इसके बाद वह अस्पताल गई। यहां भी डॉक्टरों का दिल नहीं पसीजा। गंभीर केस हाथ में लेने से मना कर दिया। उन्होंने जयपुर व दिल्ली में ऑपरेशन करवाने की बात कही। आखिरकार उसने कह दिया, डॉक्टर साहब आप मेरे पिता का ऑपरेशन नहीं करोंगे तो मैं भी मर जाऊंगी।

 

पिता को बचाने के इस जज्बे को देखकर डॉक्टर का दिल पसीजा और उन्होंने ऑपरेशन की अनुमति दे दी। शनिवार को डॉक्टर आरपी मीणा व उनकी टीम ने लक्ष्मीचंद का ड्यूअल मोबिलिटी हिप ज्वाइंट का सफल ऑपरेशन किया। अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. आरपी मीणा ने बताया कि लक्ष्मीचंद दूसरे दिन अपने पैरों पर खड़े होकर चलने लगे। उनका दावा है कि ड्यूअल मोबिलिटी हिप ज्वाइंट का कोटा में यह पहला ऑपरेशन है।

 

– दोस्तों ने की आर्थिक मदद


लक्ष्मीचंद की पत्नी मंजू राजौरा ने बताया कि श्रीनाथपुरम् में उनका मकान था, लेकिन पति की बीमारी के चलते बिक गया। इलाज में करीब तीन लाख रुपए खर्च हो गए। इसके बाद वे रोझड़ बस्ती में रहने लगे। पिता के कहराते दर्द को देखकर उनकी बेटी नीता ने इलाज के लिए उम्मीद नहीं हारी। नीता बीएड प्रशिक्षित है। वह स्कूल में पढ़ाने जाती, फिर कोचिंग करती है, उसके बाद खुद पढ़ाई करती है। परिवार के अन्य लोगों ने उनकी मदद नहीं की, लेकिन बेटी ने स्कूल व कोचिंग के दोस्तों से मदद की गुहार लगाई। दोस्तों ने मदद की। नीता की मां ने बताया कि उसकी बेटी ने घर पर बिजली नहीं होने पर दीपक की रोशनी में पढ़ाई की। उसके बावजूद वह अव्वल आई।