
कोटा में बनाए गए देश के सबसे बड़े गोबर गैस प्लांट से बनने वाली कम्प्रेस्ड बायो गैस (सीबीजी) से कोटा में लक्जरी गाड़ियां दौड़ रही हैं। प्रतिदिन प्लांट से 3,000 किलोग्राम सीबीजी गैस बन रही है। यह गैस कारों को 75 हजार किलोमीटर चलाने के लिए पर्याप्त है। इससे हर रोज 6 से 8 हजार लीटर पेट्रोपदार्थों की बचत के अलावा प्रदूषण से भी राहत मिल रही है। बायो गैस प्लांट में 40-40 लाख टन क्षमता के दो अनलोडिंग टैंक से होते हुए गोबर सेडिमेंटेंशन टैंक में पहुंचता है, जहां गोबर से मिट्टी अलग किया जाता है। इसके बाद फीडिंग टैंक में गोबर की अन्य गंदगियां दूर की जाती है।
आखिर में गोबर 50-50 लाख लीटर के दो डाइजेस्टर में पहुंचता है, जहां 30 दिनों की प्रकिया के बाद गोबर गैस निकलती है। इसमें मीथेन गैस से कम्प्रेस्ड बायो गैस (सीबीजी) बनाई जाती है। प्लांट जैविक खाद फॉस्फेट रिच आर्गेनिक फर्टिलाइजर और 17 आवश्यक तत्वों वाला जैविक तरल भी बन रहा है।
फैक्ट फाइल
- 1200 पशुपालक परिवार के पांच हजार सदस्य जुड़े हैं देवनारायण योजना से
- 01 रुपए किलो के भाव में गोबर खरीद रहे पशुपालकों से
- 02 से 20 हजार रुपए प्रतिमाह कमा रहे गोबर से किसान
- 21 टन फॉस्फेट रिच आर्गेनिक फर्टिलाइजर बनाने में सक्षम
- 3000 लीटर कम्प्रेस्ड बायो गैस (सीबीजी) बनाने की क्षमता
करीब 1200 घरों को मिल रही बिजली
बायो गैस प्लांट से 1200 घरों को बिजली मिल रही है। यह एशिया में बायो गैस प्लांट से गैस सप्लाई होने वाली सबसे बड़ी कॉलोनी है। इसमें पूरी हाड़ौती जरूरत का डीएपी खाद का विकल्प जैविक खाद बन रहा है। इसके अलावा 17 आवश्यक तत्वों वाला जैविक तरल भी बन रहा है।
देश के सबसे बड़े बायो गैस प्लांट की 3000 किलो सीबीजी गैस उत्पादन की क्षमता है। इससे 1200 घरों की पूरी कॉलोनी की गैस सप्लाई की जा सकती है। जो एशिया में सबसे बड़ी बायो गैस आधारित कॉलोनी है।
- महेन्द्र गर्ग, रिटायर्ड प्रोफेसर व बायो गैस सलाहकार, यूआईटी
Published on:
26 Jan 2024 11:53 am
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