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अवैध हथियारों की मंडी बना प्रदेश का यह शहर ! हर 12 घंटे में धारदार तो 72 घंटे में मिल रहा आग्नेय हथियार..

कोटा के निकटवर्ती जिलों से पहुंच रही अवैध हथियारों का खेप....इस रेट में बिकता है मौत का सामान
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कोटा

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Suraksha Rajora

Apr 06, 2019

kota is coming to the arms dealersillegal-weapons-smuggling

अवैध हथियारों की मंडी बना कोटा ! हर 12 घंटे में धारदार तो 72 घंटे में मिल रहा आग्नेय हथियार..

कोटा. हथियार बेचने वालों को कोटा खासा रास आ रहा है। इसके चलते शहर में पड़ोसी राज्यों से रेल व सड़क मार्ग से हथियार पहुंच रहे हैं। पुलिस की तमाम कार्रवाई के बावजूद हथियार रखने से बाज नहीं आ रहे। पुलिस हर 12 घंटे में धारदार हथियार के साथ तो हर 72 घंटे में आग्नेय अस्त्र के साथ आरोपी को दबोच रही हैं। इसके बावजूद इनकी संख्या कम नहीं हो रही।


लोकसभा चुनाव को लेकर अवैध हथियार रखने वालों के खिलाफ विशेष अभियान में अभी तक सिटी पुलिस ेबीते तीन माह में 40 आग्नेय हथियार व 35 जिंदा कारतूस बरामद कर 38 जनों को गिरफ्तार कर चुकी है। वहीं 240 लोगों को गिरफ्तार कर उनसे विभिन्न प्रकार के धारदार हथियार बरामद किए हैं।

बाहर से आ रहे हथियार
कोटा में अवैध हथियार बाहर से आ रहे हैं। कोटा के निकटवर्ती जिले बारां, झालावाड़ दोनों ही मध्यप्रदेश से जुड़े हुए हैं। मध्यप्रदेश के भिंड, मुरैना, गुना, बीना व खरगोन से हथियार बारां व झालावाड़ के रास्ते कोटा आते हैं। इसके अलावा भरतपुर, करौली, सवाईमाधोपुर, मथुरा, हाथरस व बरेली से भी अवैध हथियार कोटा पहुंच रहे हैं।

अवैध हथियार निर्माताओं पर हो सख्त कार्रवाई


पुलिस कोटा में अपराधियों के पास से हथियार तो बरामद कर रही है, लेकिन पुलिस उनकी निशानदेही पर अवैध हथियार बनाने वालों के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर रही। ऐसे में कोटा में हथियार तो पकड़े जा रहे हैं, लेकिन बाहर से आने वाले हथियारों पर प्रभावी रोक नहीं लग पा रही। इससे पहले भी हथियार पकड़े गए, लेकिन अवैध हथियार बनाने वालों पर कार्रवाई नहीं होने से कोटा में हथियार लाने व चलाने का खेल बदस्तुर चल रहा है।

सस्ती कीमत पर मिल रहे हथियार
बाहर से आने वाले इन हथियारों को कोटा के अपराधियों के माध्यम से ही कमीशन पर बेचा जा रहा है। इसमें देसी कट्टा 2 से 5 हजार रुपए तक, पिस्टल 5 से 15 हजार रुपए तक व माउजर 20 से 25 हजार रुपए तक मिल रही है। वहीं चाकू 200 से लेकर 500 रुपए तक उपलब्ध हो जाता है। तलवार, गंडासी व गुप्ती भी 1 से 2 हजार रुपए में मिल जाती है।

- अवैध हथियार दोहरे अपराध का कारण होता है। एक तो अवैध रूप से हथियार खरीदना। इसके बाद इसका उपयोग कर वारदातों को अंजाम देना। ऐसे में अवैध हथियार रखने वाले समाज व सुरक्षा की दृष्टि से खतरनाक होते हैं। इसलिए रेंज की पुलिस को अवैध हथियार रखने वालों को अधिक से अधिक पकडऩे व इनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। अधिक संख्या में अवैध हथियार बरामद होने से अपराधों की संख्या में कमी आती है।
- बिपिन कुमार पाण्डेय, पुलिस महानिरीक्षक, कोटा रेंज।

- कोटा में अवैध हथियार रखने का हमेशा से ट्रेड रहा है। पुलिस लगातार हथियार बरामद कर रही है। हथियार रखने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जा रही है। हथियार रखने वालों में खासकर लूट, चोरी की वारदात को अंजाम देने वालों से लेकर हार्डकोर व आदतन अपराधी भी शामिल होते हैं। ऐसे लोगों पर विशेष निगाह रखी जा रही है। पुलिस ने विधानसभा चुनाव के बाद लोकसभा चुनाव में भी बड़े पैमाने पर अवैध हथियार बरामद किए हैं।
दीपक भार्गव, पुलिस अधीक्षक, कोटा

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