अगस्त माह में गुमशुदगी दर्ज होने के बाद काफी समय तक जब महेन्द्र वैष्णव का पता नहीं चला और उसकी हत्या का अंदेशा हुआ तो पिता कजोड़दास ने 20 अक्टूबर 2010 को रेलवे कॉलोनी थाने में एक रिपोर्ट पेश की। पुलिस ने मृतक महेन्द्र वैष्णव के मोबाइल की कॉल डिटेल निकलवाई और जिस मकान में वह रहता था, वहां से गुप्त रूप से जानकारी हासिल की। इसमें आरोपी रामप्रसाद बैरागी का नाम सामने आया।