
पूरी दुनिया में हाड़ौती का जलवा, अरब से अमरीका तक कोटा के पत्थर और बारां-बूंदी के धान की दीवानगी
कोटा . ढाई दशक पहले तक देश दुनिया में कोटा औद्योगिक नगरी के रूप में जाना जाता था। यहां लघु, वृहद् स्तर के कई उद्योग संचालित थे। जिधर नजर दौड़ाओ, धुआं उगलती चिमनियां दिखती। लेकिन, 90 के दशक में ऐसा ग्रहण लगा कि एक के बाद एक वृहद् स्तर के उद्योगों पर ताले लटक गए। हजारों मजदूर, श्रमिक, कर्मचारी सड़क पर आ गए। शहर की माली हालत पतली हो गई। फिर, कोटा कोचिंग ने परचम लहरा दिया।
Read More: मोटी मछली पकडऩे को एसीबी टीम ने पहनी धोती-कुर्ता और पगड़ी, फिर भण्डारे से निकल हाइवे पर मारा छापा
विदेशों तक है हमारी धाक
हाड़ौती ने विदेशों तक अपनी धाक जमा रखी है। कोटा स्टोन, सेंड स्टोन की दमक से लेकर बूंदी के चावल, कोटा के धनिया, लहसुन, डोरिया साड़ी, कचौरी, कड़के की धाक विदेशों तक है। यूरोपियन देशों में फुटपाथ पर कोटा स्टोन, सेंड स्टोन का फर्श नजर आता है। वहीं कोटा में संचालित वृहद् स्तरीय औद्योगिक इकाइयों में बनने वाला टायर यार्न, फेब्रिक यार्न विदेशों में रेसिंग कारों के टायर में काम आता है। बारां, बूंदी के धान की महक के दीवाने सऊदी अरब अमीरात, इंग्लैंड, अमरीका के लोग हैं। वहीं धनिये की खुशबू इंडोनेशिया, मलेशिया, सिंगापुर, यूएई, श्रीलंका तक फैली है। कोटा डोरिया की बात करें तो इस उद्योग ने बांग्लादेश की फैशन डिजानर बीबी रसेल ने नई ऊंचाइयां दी।
BIG News: अब कोटा तैयार करेगा परमाणु वैज्ञानिक, राजस्थान की पहली यूनिवर्सिटी बनेगी आरटीयू
पत्थर से लाखों लोगों को रोजगार
हाड़ौती की धरा खनिज पदार्थों के लिहाज से काफी समृद्ध है। यहां कोटा स्टोन, सेंड स्टोन की 1200 से अधिक खदानें हैं। वहीं, कोटा स्टोन की 2500 से अधिक औद्योगिक इकाइयां हैं। इन इकाइयों में करीब 25 हजार से अधिक मजदूर, मुनीम कार्यरत हैं। साथ ही खदानों, औद्योगिक इकाइयों के क्षेत्र में लघु व्यवसाय कर करीब 35 से 40 हजार अन्य लोगों को रोजगार मिल रहा है। कुलजमा पत्थर उद्योग से हाड़ौती में प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से लाखों लोगों को रोजगार मिल रहा है।
Published on:
14 Mar 2019 08:56 pm
