कोटा. कोटा सेंट्रल जेल प्रशासन सजा काट रहे बंदियों को अपराध बोध से दूर रखकर हुनर सीखाकर आत्मनिर्भर बना रहा है। कोटा जेल देश-प्रदेश में नवाचारों के लिए अलग ही पहचान रखता है। सेंट्रल जेल में 1300 से अधिक बंदी हैं। हुनरमंद बंदी नए बंदियों को ‘कलाकारी’ सिखा देते हैं। जेल परिसर में एक छोटा कारखाना है। इस कारखाने में 30 सिलाई मशीन हैं, जिनसे 50 बंदी कैरी बैग व कवर बना रहे हैं।
प्रदेश के अस्पतालों में कोटा की बेडशीट
जेल प्रशासन ने सरकारी अस्पतालों के लिए बेडशीट बनाने का काम किया था। यहां की बनी बेडशीट पूरे प्रदेश के अस्पतालों में गई हैं। बेडशीट बनाने का काम एक कंपनी ने जेल प्रशासन को दिया था, जिसे बंदियों ने समय पर बखूबी किया। दो साल पहले सिलाई कारखाना बनाकर कैरी बैग, एसी, टेलीविजन, फ्रिज, कूलर आदि के कवर बनाए जा रहे हैं। बच्चों के लिए स्कूल ड्रेस बनाने भी बनाते हैं। बंदियों के कपड़े भी स्वयं बंदी ही बना रहे हैं। जेल की टेबल-कुर्सी से लेकर पर्दे बनाने तक का काम बंदियों के हाथों में हैं।
जेल प्रशासन के नवाचार
जेल में एफएम जेलवाणी- बंदियों का आर्केस्ट्रा बैंड
आशाएं द फिलिंग स्टेशन (पेट्रोल पम्प)
आशाएं द जेल शॉप (विभिन्न उत्पादों का निर्माण व बिक्री )
बंदियों को प्राथमिक व उच्च शिक्षा प्रदान करवाना
जेल में धार्मिक आयोजन
जेल कारखाने में विभिन्न आकार-प्रकार के कैरी बैग बनाए जाते हैं। कैरी बैग विक्रेता व्यापारी कच्चा माल उपलब्ध करा देते हैं। उससे बंदी उत्पाद बनाते हैं। साइज के हिसाब से कैरी बैग की दर तय होती है। सिलाई की मजदूरी बंदियों को दी जाती है। बंदी प्रतिदिन 200 रुपए की मजदूरी करता है। जिसमें से 100 रुपए बंदी के बैंक खाते में तथा 100 रुपए जेल प्रशासन के पास जाते हैं।
परमजीत सिंह सिद्धू, जेल अधीक्षक, सेंट्रल जेल कोटा