Big News: चम्बल की हत्या में सनसनीखेज खुलासा: देखिए, 8 साल में कोटा के अफसरों ने जिंदा नदी को कैसे उतारा मौत के घाट

8 साल में यूआईटी और निगम के अफसरों के 200 करोड़ रुपए फूंकने के बाद जब हिसाब लगाया तो चम्बल साफ होने के बजाय और गंदी हो गई।

By: ​Zuber Khan

Published: 06 Jun 2018, 11:23 AM IST

कोटा. एनजीटी फटकार लगाती रही... आरएसपीसीबी नोटिस देता रहा, लेकिन 8 साल में यूआईटी और नगर निगम के अफसरों की नींद नहीं टूटी। करीब 200 करोड़ रुपए फूंकने के बाद जब हिसाब लगाया तो चम्बल साफ होने के बजाय और गंदी हो गई।

 

BIG NEWS: कोटा नगर निगम और यूआईटी अफसरों ने की चम्बल की हत्या, मुकदमा दर्ज

आठ साल पहले 288 एमएलडी सीवरेज रोजाना इसकी जान ले रहा था, वह बढ़कर 389.878 एमएलडी हो गया। चम्बल को प्रदूषण मुक्त करने के लिए वर्ष 2008 में राष्ट्रीय नदी जल संरक्षण योजना (एनआरसीपी) से जोड़ा गया। उस वक्त शहर के 22 नालों से 288 एमएलडी सीवरेज सीधे चम्बल में जा रहा था।

 

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इसे रोकने के लिए केंद्रीय पर्यावरण एवं वन मंत्रालय और राज्य सरकार ने 27 अक्टूबर 2009 को सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) लगाने और पूरे शहर में सीवरेज लाइन डालने के लिए यूआईटी और नगर निगम को 149.59 करोड़ रुपए दिए। इस बजट से साजीदेहड़ा में 30 एमएलडी, धाकडख़ेड़ी में 20 एमएलडी और बालिता 6 एमएलडी के एसटीपी स्थापित किए जाने थे। साथ ही 6 सीवरेज पंपिंग स्टेशन, 143 किमी लंबी सीवर लाइन, 5.9 किमी लंबी राइजिंग मेन लाइन का भी निर्माण होना था।

 

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बीच में ही टूटा दम
शुद्धीकरण का काम मई 2013 तक पूरा होना था, लेकिन 8 साल बाद भी सिर्फ 37 फीसदी काम हो सका। साजीदेहड़ा और धाकडख़ेड़ी में एसटीपी तो लग गए, लेकिन नाले टेप न होने के कारण आधी क्षमता में ही पानी साफ कर पा रहे हैं। बालिता एसटीपी का काम सालों से बंद है। इतना ही नहीं, 77 करोड़ रुपए खर्च करने के बावजूद निर्माण कंपनियां एसएमएस पर्यावरण लिमिटेड और श्रीराम ईपीसी शहर में सिर्फ 21.4 किमी सीवर लाइन और 4.386 किमी राइजिंग मेन डाल पाई है।

 

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फ्लो मेजरमेंट कमेटी ने खोली पोल
यूआईटी ने अगस्त 2016 में एनजीटी की भोपाल बेंच को शपथ-पत्र दिया कि कोटा के सभी 22 नालों को टेप कर गंदा पानी चम्बल में गिरने से रोक दिया है। मई 2017 में एनजीटी ने सीवरेज के फ्लो की जांच के लिए आरटीयू के प्रोफेसर डॉ. आरसी मिश्रा, एमएनआईटी जयपुर के प्रो. वाईपी माथुर, प्रो. गुनवंत शर्मा, प्रो. जेके जैन की सदस्यता में समिति गठित कर दी। जांच कमेटी ने एनजीटी को चम्बल के भयावह हालात की जानकारी दी।

 

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कमेटी ने रिपोर्ट में बताया कि अब 22 नहीं 34 बड़े नाले चंबल में गिर रहे हैं। रोजाना 364.344 एमएलडी सीवरेज चम्बल में मिल रहा है। साजी देहड़ा एसटीपी 20 एमएलडी और धाकडख़ेड़ी एसटीपी 6 से 7 एमएलडी गंदा पानी ही साफ कर पा रहे। कंसुआ नाले से 97.739 एमएलडी सीवरेज भी सहायक नदियों के जरिए चम्बल में जहर घोल रहा है जिसकी गणना तक नहीं की जा रही।

 

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ये हुई कार्रवाई
यूआईटी ने ठेका निरस्त कर ठेकेदारों की 13 करोड़ 2 लाख 35 हजार रुपए की बैंक गारंटी जब्त की।


आगे क्या

यूआईटी: अगले 3 साल में कार्य पूर्ण करने का खाका खींचा है। 282 करोड़ रुपए का रिवाइज्ड पैकेज बनाकर प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति के लिए राज्य सरकार को भेजा।


आरयूआईडीपी: 550 करोड़ की दूसरे फेज की योजना पर काम शुरू करने में जुटी है।


ये होंगे काम: बाकी बचे कार्यो के साथ ही 6 एमएलडी बालिता, पंपिंग स्टेशन एलएस 1, 3 व 4 का बचा हुआ कार्य तथा सिटी ग्रेविटी जोन, कुन्हाड़ी, पंचवटी कॉलोनी, कृष्णा नगर, अंबेडकर नगर, तलवंडी और जवाहर नगर में सीवरेज लाइन डालने का भी काम करवाया जाएगा।

 

ये जोड़े जाने थे सीवरेज लाइन से
वल्लभ नगर, बल्लभबाड़ी, कोटड़ी, गोरधनपुरा, रामचंद्रपुरा, छावनी, विज्ञान नगर, संजय नगर, महावीर नगर, शॉपिंग सेंटर, नई धानमंडी, तलवंडी, केशवपुरा, टीचर्स कॉलोनी आदि इलाकों के कम्युनिटी सेप्टिक टैंक।


रिवाइज्ड पैकेज राज्य सरकार को भेजा है
यूआईटी सचिव आनंदी लाल वैष्णव ने बताया कि यूआईटी पूरी शिद्दत से काम करा रही थी, ठेकेदार बीच में काम छोड़कर चला गया। मामला कोर्ट में भी गया। इसके चलते फैसला लेने में दिक्कतें आईं। बावजूद इसके हमने ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई कर अमानत राशि जप्त की। रिवाइज्ड पैकेज राज्य सरकार को भेजा है। स्वीकृति प्राप्त होने के बाद 3 वर्ष के भीतर चंबल शु्रद्धीकरण का काम पूरा कर लिया जाएगा।

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