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LIVE VIDEO में देखिए, गन्ने के रस से कैसे तैयार होता है स्वादिष्ठ गुड़, जानिए गुड़ बनने तक की पूरी प्रक्रिया

Live Making of jaggery : क्या आप जानते हैं गन्ने से गुड़ कैसे बनाया जाता है, नहीं तो लाइव वीडियो में देखिए ऐसे तैयार होता है गुड़।

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कोटा

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Zuber Khan

Dec 05, 2019

कोटा. प्रकृति के जीवों की संरचना में तुलना व समानता तो वैज्ञानिक खूब करते हैं, पर बड़ी मजेदार और रोचक तथ्य आपको आपको बता रहे हैं। गुड़ का इंसान से नाता सिर्फ मिठास से ही मत समझिए। ( Live jaggery making process ) गुड़ का इंसान से एक ओर गहरा नाता है। मां की कोख में शिशु के निर्माण में जितना समय लगता है, उतना ही समय गन्ने की पैदावार में लगता है। ( Sugarcane crop ) इसके बाद कटाई होकर गन्ना चरखियों तक पहुंचता है, तब जाकर एक लंबी प्रक्रिया व कड़ी मेहनत के बाद गुड़ की मिठास जुबां पर चढ़ती है। ( Live process Making of jaggery From sugarcane ) तो आईए जानते हैं गन्ने की पैदावार से गुड़ बनने तक की प्रक्रिया। पेश है बूंदी जिले के जजावर संवाददाता संजय बैरागी की खास रिपोर्ट….

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प्रक्रिया बताने से पहले हम आपको बता दें कि बूंदी जिले के जजावर कस्बे सहित आसपास के क्षेत्र में गन्ने की फसल का उत्पादन बड़ी मात्रा में किया जाता हैं। क्षेत्र में इन दिनों गुड़ की सोंधी महक से वातावरण खुशनुमा है।

गन्ने की गणित

गन्ने की फसल रोपने में भी एक ओर रोचक बात है कि इसका कोई बीज नहीं होता। गांंठों को ही जमीन में रोपा जाता है। फरवरी माह में इसकी बुवाई की जाती है। करीब 9 माह बाद बड़ा आकार लेने के साथ फसल तैयार हो जाती है। इस फसल के लिए पानी की अधिक आवश्यकता होती है। यही वजह है कि गन्ने की फसल सर्दियों में की जाती है।

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…फिर बनता है गुड़

किसान हरलाल गुर्जर बताते हैं कि गुड़ बनाने से पहले गन्ने बड़ी-बड़ी चरखियों में रस निकाला जाता है। रस को बड़ेे कढ़ाओं में ऊंचे तापमान पर घंटों तक घोटा जाता है। फिर यह आहिस्ता-आहिस्ता गाढ़ा होता होता है, कुछ घंटे इसे ठंंडा होने के लिए छोड़ दिया जाता है। इसके बाद गुड़ तैयार हो जाता है। लेकिन अभी भी बहुत कुछ करना शेष होता है। गुड़ तैयार होने के बाद इसे बड़े बर्तन में निकाल लेते हैं। इसके बाद भेलियां तैयार होने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। दरअसल कढ़ाओं से उतारने के बाद इसे कपड़े में डालते है जिनकों तराजू में पांच किलो के वजन में एक आकार दिया जाता हैं। जिसे हाड़ौती की भाषा में भेली कहते हैं। हरलाल बताते हैं कि गुड़ बनाने में पूरा परिवार का सहयोग रहता है। इसमें किसी भी तरह की मिलावट नहीं की जाती। यह गुड़ पूरी तरह शुद्ध होता है।

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ये हैं कन्ने की प्रमुख किस्में
डिस्को, कालयो, रसगुल्ला, सकरियो आदि किस्म के गन्ने क्षेत्र में प्रमुखता से बोया जाता है। इनमें रसगुल्ला किस्म की डिमांड अधिक रहती है, क्योंकि इस किस्म के गन्ने में रस अधिक निकलता है और इसके गुड़ का रंग भी साफ रहता है।


गुड़ के फायदे
गुड़ का सेवन पेट के लिए गुणकारी होता है। खून की कमी दूर करता है।इसमें आयरन का बहुत बड़ा स्रोत होता है। ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में भी गुड़ मददगार साबित होता है।

गन्ने का रकबा 665 हैक्टेयर
इस साल बूंदी जिले में गन्ने की फसल 665 हैक्टेयर में बोयी गई है। पिछले साल इसका रकबा 350 हैक्टेयर था। बुवाई फरवरी में की जाती है। इसके लिए रेतीली व काली मिट्टी उपयुक्त है। फसल ठंडे मौसम में में ही अनुकूल होती है। इसको बोना चाहिए।
रतनलाल मीणा, सहायक निदेशक कृषि विस्तार बूंदी