
जगत के पालनहार भगवान जगन्नाथ वर्ष में एक बार अपनी मौसी के घर जाते हैं। 9 दिन तक ठाकुरजी अपनी मौसी के घर रहेंगे। मौसी की ओर से भगवान जगन्नाथ को आमंत्रित किया गया है। ओडिसा के पुरी की तरह अब कोटा में भी इस्कॉन केन्द्र ने यह परम्परा शुरू की है। इस्कॉन केंद्र कोटा के प्रभारी मायापुरवासी बताते हैं कि भगवान ज्येष्ठ शुक्ल पूर्णिमा यानी स्नान पूर्णिमा पर अधिक स्नान से रुग्ण हो जाते हैं। ठीक होने के बाद वे अपनी मौसी के घर जाते हैं। मौसी भगवान जगन्नाथ का पूरा ध्यान रखती हैं और पूरा लाड प्यार करती हैं। इसी परम्परा का निर्वाह इस्कॉन केन्द्र गोविंद धाम किशोरपुरा पर किया जाएगा।
मायापुरवासी ने बताया कि रथयात्रा से पहले श्रद्धालुओं ने भगवान जगन्नाथ, बलभद्र व उनकी बहन सुभद्रा को मौसी के रूप में अपने घर आने के लिए आमंत्रित किया है। अब 7 से 15 जुलाई तक जगन्नाथ अलग-अलग दिन बजरंग नगर, गुमानपुरा न्यू कॉलोनी, तलवंडी, स्टेशन, परिजात कॉलोनी महावीर नगर तृतीय क्षेत्र, कुन्हाड़ी विज्ञान नगर, विवेकानंद नगर समेत अन्य क्षेत्रों में अपनी मौसी का लाड, प्यार के बाद मंदिर लौट आएंगे। इससे पहले 8 जुलाई को रथयात्रा महोत्सव मनाया जाएगा। भगवान जगन्नाथ को रथ में घुमाया जाएगा। इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होंगे।
राजा इन्द्रद्युम ने पुरी में जगन्नाथ भगवान के मंदिर का निर्माण करवाया था। इस पर भगवान ने प्रसन्न होकर राजा से कुछ मांगने के लिए कहा। राजा ने कहा कि भगवान मुझे कुछ नहीं चाहिए, बस इतनी कृपा कर दीजिए कि मुझे कोई संतान न हो। संतान हो गई तो मंदिर पर अपना अधिकार जमाएगी। इस पर रानी गुंडिजा देवी दु:खी हुई तो भगवान ने वरदान दिया कि मैं हर वर्ष आपके घर आऊंगा और नौ दिन बहन सुभद्रा, भाई बदभद्र के साथ आपके घर रहूंगा, तब से ही यह परम्परा निभाई जा रही है। पुरी में देवी गुंडिजा का मंदिर है। भगवान रथ में सवार हो देवी गुंडिजा के मंदिर में प्रवास करते हैं। कोटा में एक के बजाए नौ श्रद्धालुओं के घर भगवान जाएंगे। नौ दिन के प्रवास के बाद भगवान जगन्नाथ रथ में सवार हो मंदिर लौट आते हैं।
Published on:
01 Jul 2024 01:51 pm
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