
जैन समाज के तीन दिवसीय महाकुंभ की जानकारी देते समाज के पदाधिकारी।
कोटा. जैन समाज का महाकुंभ दशहरा मैदान में 7 मार्च से शुरू होगा। साध्वी विशुद्धमति का 5वां दीक्षा जयंती महोत्सव मनाया जाएगा। समाज के पदाधिकारियों के अनुसार इस दौरान 20 से 25 हजार शामिल होंगे। गणिनी आर्यिका विशुद्धमति राष्ट्रीय स्वर्णिम संयम दीक्षा महोत्सव आयोजन समिति के तत्वावधान में आयोजित समारोह तीन दिन तक चलेगा।
आयोजन समिति के मीडिया समन्वयक नरेश जैन बैद ने मंगलवार को पत्रकारों को बताया कि महोत्सव का आगाज गुरुवार सुबह 5.45 बजे वंदना से होगा। बाद में मंदिर से शोभायात्रा निकाली जाएगी। जो प्रमुख मार्गों से होकर आयोजन स्थल पहुंचेगी। सुबह 10 बजे से स्वर्ण संयम ध्वजारोहण और विशुद्धमति माताजी के मंगल प्रवचन होंगे। पाण्डाल में दो समवशरण तैयार किए जा रहे हैं। जिनमें श्रीजी को विराजमान किया जाएगा। श्रीजी को कार्यक्रम स्थल पर लाने के लिए अजमेर से स्वर्ण जडि़त रथ मंगाया गया है।
जैन ने बताया कि 11.30 बजे से गणधरविलय विधान का आयोजन होगा। शाम को 6 बजे से कलाश्री भरतनाट्यम अकादमी सूरत की ओर से डिम्पल शाह आरती प्रस्तुत करेंगे। रात को सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। शनिवार को सुबह 5.15 बजे एक लाख दीपों से आरती कर विश्व रिकॉर्ड बनाया जाएगा। इसके लिए लिम्का बुक ऑफ वल्र्ड रिकॉड्र्स की टीम कोटा आएगी। सुबह 9.15 बजे से जिनाभिषेक, शांतिधारा, विशुद्धमति की महापूजा, आराधना के कार्यक्रम होंगे। 51 स्वर्ण रजत कलशों से साध्वी का पाद प्रक्षालन किया जाएगा। दोपहर सवा 12 बजे बजे विनयांजलि सभा का आयोजन किया जाएगा। राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष जेके जैन, सकल दिगम्बर जैन समाज के अध्यक्ष विमल जैन नान्ता, महिला इकाई की अध्यक्ष निशा जैन व अन्य ने संबोधित किया।
जीव दया फाउण्डेशन की स्थापना होगी
आर्यिका विज्ञमति ने बताया कि संयम दीक्षा महोत्सव जन-जन के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करेगा। कोटा में 50वें स्वर्णिम संयम दीक्षा महोत्सव पर कई परोपकरी जनहित के कार्य भी होंगे। इसके अलावा शिक्षा क्षेत्र में सहयोग की दृष्टि से शिक्षा में अग्रणी बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए आर्थिक सहायता एवं बालिका विद्यापीठ की स्थापना, जरूरतमंद परिवारों के लिए आर्थिक सहयोग योजनाओं, गम्भीर बीमार के परिवारों की सहायता, असहाय निराश्रितों की मदद सहायता के लिए योजनाएं शुरू की जाएगी। जिनकी घोषणा महोत्सव के दौरान होगी।
ऐसी हैं साध्वी
साध्वी विशुद्धमति ने 10 वर्ष पहले भी तलवंडी स्थित दिगम्बर जैन मंदिर में चातुर्मास किया था। उन्होंने उस समय कोटा में 9 सदस्यों को जैनेश्वरी दीक्षा दी थी। नरेश जैन बैद ने बताया कि 2008 में 9 दीक्षाएं कोटा में हुई थीं। साध्वी ने गत वर्ष भी तलवंडी जैन मंदिर में चातुर्मास किया था, तब से ही वह कोटा प्रवास पर हैं। जैन के अनुसार दीक्षा के 50 वर्ष पूर्ण करने वाले कम ही संत हैं। इस दौरान उन्होंने करीब 40 को दीक्षा दी है। वर्ष 1949 में ग्वालियर में जन्म लेने वाली विशुद्धमति ने 4 वर्ष की आयु में कंदमूल ग्रहण करना बंद कर दिया था। उन्होंने 14 वर्ष की आयु में ब्रह्मचर्य व्रत ग्रहण किया और 16 वर्ष की आयु में केशलोचन करा लिया। उन्होंने 50 पुस्तकें भी लिखीं हैं। वह आहार के रूप में प्रतिदिन मात्र 12 ग्रास ही ग्रहण करती हैं। संघ की अन्य सदस्य जब तक आहार नहीं लेती तब तक वह आचार क्रिया नहीं करती हैं। उन्होंने मीठे, तेल और घी का परित्याग किया हुआ है।
Published on:
06 Mar 2019 07:30 am
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