कोटा. आरटीएच बिल के विरोध में निजी चिकित्सकों के समर्थन में सरकारी चिकित्सक भी कार्य बहिष्कार पर उतर आए है। इससे सरकारी अस्पतालों की चिकित्सा व्यवस्था सोमवार को दो घंटे के लिए पूरी तरह से ठप हो गई। ओपीडी में चिकित्सक नहीं मिलने से मरीज दर्द से कहराते रहे। इमरजेंसी में भी गंभीर मरीजों को परेशानी होती रही। उन्हें देखने वाला कोई नहीं मिला।
राजकीय मेडिकल कॉलेज टीचर्स एजुकेशन राजस्थान से जुड़े सीनियर चिकित्सक व सेवारत चिकित्सकों ने सोमवार व मंगलवार को सुबह 9 से 11 बजे तक कार्य बहिष्कार की घोषणा की है। पहले से रेजीडेंट हड़ताल पर चल रहे है। इससे कोटा मेडिकल कॉलेज के संबद्ध अस्पतालों, ईएसआई व ग्रामीण क्षेत्र के सीएचसी व पीएचसी सीनियर चिकित्सक, सेवारत ने कार्य बहिष्कार रखा।
ऐसे में अस्पतालों में ओपीडी में चिकित्सक को दिखाने से लेकर, जांचों व दवाइयों का काम पूरी तरह से ठप रहा। मरीज दो घंटे तक चिकित्सकों का इंतजार करते रहे। ओपीडी में भीड़ जुट गई। ओपीडी में पैर रखने की जगह तक नहीं थी। सर्जरी, अिस्थ, मेडिसिन में मरीज दर्द से कहराते रहे। उन्हें उपचार नहीं मिला। सुबह 11 बजे बाद कार्य बहिष्कार खत्म होने के बाद जैसे ही ओपीडी में चिकित्सक पहुंचे। उसके बाद मरीजों को उपचार मिल सका।
नहीं हो सका चिकित्सक का राउंड
अस्पतालों में इमरजेंसी व वार्ड में गंभीर मरीज भी चिकित्सक के राउंड में नहीं होने के कारण परेशान होते नजर आए। नर्सिंग स्टाफ ने उनकी देखभाल की। हालांकि कॉलेज प्रशासन व चिकित्सा विभाग ने इमरजेंसी ओपीडी में जरूर कुछ चिकित्सकों की ड्यूटी लगा रखी थी। ऐसे में बाहर से गंभीर आने वाले मरीजों को उपचार मिल सका। अस्पतालों में पर्ची काउंटर पर जरुर पर्चियां कटी, लेकिन चिकित्सक नहीं होने के कारण जांचों, दवा के काउंटर व लैबों में सन्नाटा पसरा रहा।