कोटा @ पत्रिका. मैंने फिल्म खलनायक में गीत गाया है नायक नहीं खलनायक हूं…गीत काफी लोकप्रिय हुआ। यहां भी मैं इसे गाऊंगा, लेकिन बच्चों से रिक्वेस्ट है, वे अपने घर में खलनायक नहीं बनें। यह काफी रिस्की है। पढ़ने के लिए दूरदराज से आए हैं, अपनी पढ़ाई करो। अपना 100 परसेंट दो और गोल एचीव कर कॅरियर बनाओ।
ये संदेश है ख्यात गायक विनोद राठौड़ का। फिल्म खलनायक का गीत नायक नहीं खलनायक हूं मैं सरीखे कई गीतों से बड़े पर्दे पर अपनी खनकती आवाज का जलवा बिखरने वाले पार्श्व गायक विनोद राठौड़ रविवार को कोटा में थे। मीडिया से चर्चा में उन्होंने कोटा, संगीत और संगीत में बदलाव समेत कई सवालों के जवाब दिए।
उन्होंने कहा कि राजस्थान मुझे बहुत प्यारा लगता है। यह अलग है। मैं जब भी गाता हूं राजस्थान को याद करता हूं। पापा पंडित चतुर्भुज राठौड़ को याद करता हूं और उनसे जो सीखा है, उसी को एप्लाई करता हूं। यदि आपके पास संगीत के लिए समय नहीं है तो संगीत भी आपको लंबा समय नहीं देगा। किसी भी कार्य को समझने व ईमानदारी से करने की जरूरत होती है।
अभी भी अच्छे सिंगर आ रहे हैं, लेकिन श्रोता वो गीत पसंद नहीं करते जिसमें मेलोडी न हो। सुर व संगीत के साथ शब्द भी महत्वपूर्ण होते हैं। अब संगीत काफी बदल रहा, फिल्म में गाने की इच्छा नहीं है। हमने संगीत का जो दौर देखा है, वह अब काफी बदल गया है।