हाड़ौती सम्भाग में खरीफ फसलों की बुवाई में पहली बाहर बाजरा, ज्वार व मक्का का रकबा बढ़ा है। साथ ही धान का रकबा भी पिछले वर्ष के बराबर ही रहने की सम्भावना है। पिछलों सालों में लगातार बारिश से सोयाबीन व उड़द की फसल खराब होने से किसानों का इन फसलों की बुवाई के प्रति रुझान कम हो गया। सम्भाग में 94 प्रतिशत धान की बुवाई हो चुकी है।
सम्भाग में 12 लाख 89 हजार 610 हैक्टेयर में बुवाई के लक्ष्य के विपरित 10 लाख 67 हजार 598 हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी है और अभी बुवाई का काम जारी है। फसलों में धान की बुवाई 94 प्रतिशत, सोयाबीन 91 प्रतिशत, उड़द 42.90 प्रतिशत व मक्का की 99 प्रतिशत बुवाई हो चुकी है।
उड़द से हुआ मोह भंग
सम्भाग में अब तक उड़द की बुवाई सबसे कम हुई है। पिछले सालों में बारिश से सोयाबीन व उड़द की फसल का खराबा होने से किसानों ने इन फसलों की बुवाई कम कर धान व मक्का की फसल ज्यादा की है। उड़द की बुवाई कृषि विभाग के टारगेट 2.52 लाख हैक्टेयर के मुकाबले अभी तक 1 लाख 8 हजार 114 हैक्टेयर में यानि 43 प्रतिशत ही बुवाई हुई है। इसी तरह सोयाबीन 7.67 लाख हैक्टेयर के मुकाबले अभी तक 6.99 लाख हैक्टेयर में ही बुवाई हो सकी है।
ज्वार व बाजरा का रकबा बढ़ा
अतिरिक्त निदेशक कृषि कोटा सम्भाग पी.के. गुप्ता ने बताया कि यह वर्ष मिलेट्स (मोटा अनाज) के रूप में मनाया जा रहा है। बाजार में मोटे अनाज की मांग के चलते सम्भाग में पहली बार ज्वार, बाजरा के साथ मक्का की बुवाई का रकबा बढ़ा है। सम्भाग में इस बार बाजरा की बुवाई 30 प्रतिशत अधिक व ज्वार की बुवाई दोगुनी हो गई है। मक्का की बुवाई भी पिछले वर्ष के मुकाबले 5 हजार हैक्टेयर ज्यादा हुई है।
खरीफ फसल बवाई हैक्टेयर में (13 जुलाई तक)
फसल पिछले वर्ष इस वर्ष
धान 136653, 110957
सोयाबीन 667800, 698862
उड़द 138044, 108114
मक्का 104587, 108411
बाजरा 2750, 4000
ज्वार 1557, 3100