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करोड़ों की सौगात बदहाल, खेल मैदान की सुध लेने वाला नहीं

कोटा

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Newsdesk

Aug 04, 2026

Rajasthan

अतिक्रमण से मुक्त कर स्टेडियम का दिया था स्वरूप, अब टूटी जालियां और उखड़ता ट्रैक बढ़ा रहा परेशानी



अटरू. नगरपालिका मुख्यालय पर करीब 18 बीघा भूमि में बना ढोक तलाई खेल मैदान प्रशासन और सरकार की अनदेखी के चलते दिनों-दिन बदहाल होता जा रहा है। अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए युवाओं को लंबे समय तक संघर्ष करना पड़ा था। इसके बाद तत्कालीन मंत्री मदन दिलावर के प्रयासों से खेल मैदान का पट्टा राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल के नाम किया गया।



बाद में कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में करीब एक करोड़ रुपए की स्वीकृति से मैदान की चारदीवारी कराकर इसे स्टेडियम का स्वरूप दिया गया। यहां फुटबॉल, वॉलीबॉल, कबड्डी और खो-खो सहित विभिन्न खेलों के लिए मैदान विकसित किए गए। खिलाडिय़ों की सुविधा के लिए शौचालय, स्नानघर और कार्यालय का भी निर्माण कराया गया, लेकिन देखरेख के अभाव में सुविधाएं अब धीरे-धीरे खराब हो रही हैं।



वॉलीबॉल मैदान की जालियां टूटी



गत वर्ष आए तेज अंधड़ से वॉलीबॉल मैदान की जालियां टूट गई थीं। जालियां पास में लगे विद्युत वितरण निगम के ट्रांसफार्मर के समीप लटकी हुई हैं, जिससे हादसे की आशंका बनी हुई है। जालियों के कई हिस्से लोग काटकर ले जा चुके हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग ने अब तक मरम्मत नहीं कराई।



शौचालयों से किवाड़ और सामग्री गायब



मैदान में बने शौचालय व स्नानघर के किवाड़ भी लोग ले गए। टाइल्स, नल की टोंटियां और अन्य सामग्री भी गायब होने लगी है। वहीं, बारिश के दौरान फुटबॉल मैदान की मिट्टी बह जाने से कई स्थानों पर गड्ढे हो गए हैं। मैदान के चारों ओर बनाए गए ट्रैक से कंकड़ उखडऩे लगे हैं, जिससे सुबह-शाम टहलने आने वाले लोगों को परेशानी हो रही है।



मैदान में प्रतिदिन सुबह और शाम दर्जनों खिलाड़ी फुटबॉल, क्रिकेट सहित अन्य खेलों का अभ्यास करने पहुंचते हैं। कई महिला-पुरुष भी यहां टहलने आते हैं। कस्बे के बीच स्थित होने से धार्मिक आयोजन, भागवत कथा और बड़े नेताओं की सभाएं भी इसी मैदान में होती हैं। मैदान की बदहाली को लेकर खिलाडिय़ों, युवाओं और स्थानीय लोगों में आक्रोश है।



अधिकारी बोले



-कुछ दिन पूर्व ही कार्यभार ग्रहण किया है। खेल मैदान के हालात देखकर पहले हुए कार्य की जानकारी लेकर जालियां लगाने सहित आवश्यक सुधार के कदम उठाए जाएंगे।
- राजेन्द्र बैरवा, सहायक अभियंता, सार्वजनिक निर्माण विभाग,