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Breaking News: कोटा के एक विधायक ने वोटों के लिए अपनी ही सरकार को लगा दिया लहसुन का तड़का

लाडपुरा के भाजपा के विधायक भवानीसिंह राजावत ने चुनावी साल में किसानों को लुभाने के लिए अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा को दिया है

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कोटा

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Zuber Khan

Apr 03, 2018

MLA Bhawani singh Rajawat

कोटा . विवादित बयानों को लेकर चर्चा में रहने वाले लाडपुरा के भाजपा के विधायक भवानीसिंह राजावत ने चुनावी साल में किसानों को लुभाने के लिए अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा को दिया है। विधायक ने किसानों को साधते सरकार को अल्टीमेटम दिया है कि तीन दिन में बाजार हस्तक्षेप योजना में लहसुन की खरीद नहीं हुई तो अपनी ही सरकार के खिलाफ धरने पर बैठेंगे।

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लहसुन के भाव इन दिनों न्यूनतम स्तर पर चल रहे हैं। लहसुन के उचित दाम नहीं मिलने से किसान परेशान है। चुनावी साल होने के कारण विधायक राजावत ने लहसुन के मुद्दे को भुनाने में देरी नहीं की है। उन्होंने मंडी में जाकर लहसुन उत्पादक किसानों के कंधे पर हाथ रखकर कहा कि मैं तुम्हारे साथ हूं, सरकार ने लहसुन नहीं खरीदा तो मंडी में ही धरना दूंगा।

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लहसुन उत्पादक किसानों की पीड़ा जानने थोक फल सब्जीमंडी में पहुंचे विधायक भवानी सिंह राजावत का राज्य सरकार पर गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने सरकार को खुली चेतावनी दे डाली कि तीन दिन में राज्य सरकार ने 5000 रुपए प्रति क्विंटल के भाव में लहसुन की खरीद नहीं की तो वे किसानों के साथ थोक फल सब्जीमंडी में धरने पर बैठ जाएंगे।

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राजावत दोपहर डेढ़ बजे मंडी में किसानों से मिलने पहुंचे। जहां कैथून क्षेत्र के रामभरोस मेघवाल ने कहा कि लहसुन की फसल तैयार करने में उन्होंंने दिनरात एक कर दिया। जितनी पूंजी बचाकर रखी थी सारी खेती में लगा दी। अब परिवार का पेट पालने के लिए घर में एक रुपया भी नहीं। पूरा परिवार के सालभर का खर्चा लहसुन की उपज पर ही है। उनका बेस्ट क्वालिटी का लहसुन 1800 रुपए प्रति क्विंटल बिका। जबकि पांच बीघा में उनके एक लाख रुपए खर्च हो गया। जबकि पूरा लहसुन 75000 रुपए का निकला। ऐसे में मूल रकम में भी 25 हजार रुपए का नुकसान उठाया पड़ा। अन्य किसानों ने भी अपनी पीड़ा बताई।

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किसानों का दर्द सहन नहीं कर सकता

राजावत कहा कि अगर सरकार ने तीन दिन में 5000 रुपए प्रति क्विंटल के समर्थन मूल्य पर लहसुन की तुलाई शुरू नहीं की तो मैं थोक फल सब्जीमंंडी में किसानों के साथ धरने पर बैठ जाऊंगा। सरकार के खिलाफ, अपने ही राज के खिलाफ धरने पर बैठने पर मजबूर होना पड़ रहा है। वह इसलिए कि किसान बर्बाद नहीं हो। किसान के लहसुन की लागत तो निकले। लाभ मिलना तो बहुत दूर की बात है।यह कॉमर्शियल क्रॉप है। किसान के घर का पूरा खर्चा उपज पर ही निर्भर है। घर ग्रहस्थी इसी से चलती है। मकान बनाना, बेटा-बेटी का ब्याह सब इसी पर निर्भर है। सरकार के कहने पर किसानों ने उड़द की खेती की।

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राजस्थान में मूंग की खेती की। हाड़ौती में किसानों ने एमएसपी पर उड़द तुलवाया। उसका 14 करोड़ रुपए छह माह से बाकी है। उसे तो उपज बेचते ही रुपए चाहिए। घर चलाने के लिए, किसानों को 14 करोड़ रुपए अभी तक नहीं मिले। आग्रह करता हूं कि सरकार संवेदनशीलता बरतते हुए किसान को न्याय दे। तबाह होने से बचाए, तत्काल समर्थन मूल्य घोषित करे। इस दौरान थोक फल सब्जीमंडी अध्यक्ष ओम मालव, चम्बल परियोजना समिति के उपसभापति अशोक नंदवाना भी साथ थे।