
MOAMO CHALLENGES .....
कोटा. अनजान नंबर से आया व्हाट्सएप मैसेज और उसे खोलते ही मोबाइल के स्क्रीन पर उभरती एक डरावनी तस्वीर, जिसकी हल्के पीले रंग की दो बड़ी-बड़ी गोल आंखें, टेढ़ी-मेढ़ी नाक और होठों पर डरावनी मुस्कान हो जनाब तुरंत संभल जाइएगा। इस मैसेज का जवाब मत देना तो दूर भेजने वाले की जानकारी जुटाने तक की कोशिश मत कीजिए, क्योंकि मैसेज का रिप्लाई करते ही आप जानलेवा खेल मोमो गेम का हिस्सा बन जाएंगे। मौत से पहले इससे पीछा छुड़ाना लगभग नामुमकिन होगा। बच्चों के दिमाग से खेल रहे इस गेम की दहशत का अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि माध्यमिक शिक्षा निदेशालय तक को स्कूली बच्चों को इस गेम से दूर रखने की हिदायत देनी पड़ी है।
सोशल मीडिया के जरिए लोगों को आत्महत्या के लिए उकसाने वाले ब्ल व्हेल गेम और किकी चैलेंज के बारे में तो सुना ही होगा। मोमो चेलेंज इसी कड़ी का नया हिस्सा है। दरअसल मोमो चैलेंज एक मोबाइल गेम है, जो हमारे दिमाग के साथ खेलता है। अगर आप इसे छोडऩे की कोशिश करते हैं तो यह डर का माहौल बनाता है और फिर गेम का हिस्सा बने व्यक्ति को जान देने के लिए मजबूर कर देता है।
रिझाती है एलियन जैसी गुडिय़ा
दरअसल मोमो एक पॉपुलर सोशल मीडिया अकाउंट है जो वॉट्सऐप और फेसबुक से लेकर यूट्यूब तक पर मौजूद है। इसके होम स्क्रीन पर एक एलियन जैसी दिखने वाली गुडिय़ा की तस्वीर दिखाई पड़ती है और जैसे ही आप गेम में एंटर करेंगे, वह अपनी ओर आपका ध्यान आकर्षित करने की कोशिश में जुट जाती है। इसका सबसे सॉफ्ट टॉर्गेट छोटे बच्चे या फिर वह लोग होते हैं जिनमें आत्महत्या की प्रवृत्ति पनप रही हो। दुनिया भर में कई बच्चों की जान लेने के साथ ही अब तक भारत में तीन बच्चों को यह अपना टारगेट बना चुकी है। जिसमें से पश्चिम बंगाल और राजस्थान का भी एक बच्चा है।
जारी कर चुके हैं एडवाइजरी
बच्चों की मौत के बाद सबसे पहले पश्चिम बंगाल की सीआईडी और उसके बाद सेंट्रल इन्फॉर्मेशन एंड टेक्नोलॉजी डिपार्टमेंट ने एडवाइजरी जारी की थी। वहीं अजमेर में इस गेम के जाल में फंसकर एक बच्चे की मौत की खबर फैलते ही अजमेर पुलिस ने अपने ट्विटर एकाउंट पर अवेयरनेस प्रोग्राम की सीरीज चला रखी है। मामला गंभीर होता देख माध्यमिक शिक्षा के निदेशक नथमल डिडेल ने 8 अक्टूबर को प्रदेश के सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को अलर्ट जारी करने के साथ-साथ बच्चों को इस गेम से दूर रखने के लिए सभी जरूरी कदम तत्काल उठाने के निर्देश जारी कर दिए। इतना ही नहीं, उन्होंने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निजी और सरकारी स्कूलों के प्रधानों के साथ बैठक कर उन्हें इस बाबत कार्रवाई करने के लिए पाबंद करने के भी निर्देश दिए हैं, ताकि कोई बच्चा इस जानलेवा खेल का शिकार न बन जाए।
क्या है मोमो चैलेंज
ऐसा कहा जा रहा है कि यह चैलेंज पहले फेसबुक पर शुरू हुआ, जहां लोगों को एक अनजान आदमी से अनजान नंबर के जरिए संवाद करने को कहा गया। इस चैलेंज में जिस बड़ी आंखों वाली औरत का इस्तेमाल किया गया है, उसे एक जापानी आर्टिस्ट ने तैयार किया है। हालांकि, इसे तैयार करने वाली मिदोरी हयाशी की मानें तो वे गेम से किसी तरह से नहीं जुड़ी है। इस इमेज को मदर बर्ड बाय लिंक फैक्ट्री कहा जाता है। इसके बाद जो कोई भी एक बार इसकी चपेट में आया, वह मोमो अकाउंट के जरिए उसे चुनौतियों की एक सीरीज मिलती है। गेम प्लेयर को इसे पूरा करना होता है ताकि वह फाइनली मोमो से मिल सके। इनमें ज्यादातर टास्क हिंसक होते हैं और आखिरी में सुसाइड तक ले जाते हैं। अगर कोई बीच में टास्क पूरा करने से मना करता है तो मोमो उसे गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी देता है और परिजनों आदि की जान लेने की धमकी देकर ब्लैकमेल भी करता है। सोशल नेटवर्किंग वेबसाइटों पर लोगों के स्टेटस के जरिए उन लोगों को खोजा जाता है, जो अकेलेपन के आदी हैं और सुसाइड करने की प्रवृत्ति हो।
खुद को कैसे बचाएं
साइबर एक्सपट्र्स और आरटीयू के प्रोफेसर डॉ. सीपी गुप्ता सलाह देते हैं कि अनजाने नंबरों से मिलने वाले मैसेज से सावधान रहें। मैसेज खोलने से पहले यदि इमोजी जैसी चीजें दिखाई दें तो उस मैसेज को पढ़े बिना ही डिलीट कर दें। इसके बाद भी यदि मैसेज खोल लेते हैं तो मोमो चैलेंज संबंधी किसी भी आमंत्रण को स्वीकार न करें। बहुत से लोग अपने सोशल मीडिया एकाउंट्स को व्हाट्सएप नंबर, मोबाइल नंबर और मेल एकाउंट से अटैच कर लेते हैं। यह बेहद खतरनाक है और ऐसे लोगों को अपनी एकाउंट्स सेटिंग्स तत्काल बदल सभी एकाउंट्स को अलग कर लेना चाहिए। यह तरीका आपको मोमो गेम के अलावा अन्य साइबर क्राइम से बचाने में भी खासा मददगार साबित होगा। आखिर में यदि बार-बार किसी अनजान नंबर से मोमो चैलेंज का इनवाइट आता है तो उन नंबरों को तुरंत ब्लॉक करते जाएं।
अभिभावक बरतें खास सावधानी
चाइल्ड साइकोलॉजी एक्सपर्ट और वीएमओयू के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अखिलेश कुमार उन अभिभावकों को खास अहतियात बरतने की सलाह देते हैं, जिन्होंने अपने बच्चों को छोटी सी उम्र में ही स्मार्टफोन थमा दिया है। बच्चों के हाथ में मोबाइल आते ही वह सबसे पहले कार्टून और फिर गेम सर्च करने लगते हैं। ऐसे में अभिभावक उन्हें इन दोनों चीजों से दूर करने के लिए प्रेरित करें और डांट फटकार की बजाय बच्चों से बात कर उन्हें समझाएं कि किस तरह का खतरा उनके नजदीक मंडरा रहा है। सबसे ज्यादा जरूरी है कि वह बच्चों को इस बात के लिए रजामंद करें कि वह अनजाने में कोई गलती कर भी देते हैं तो उसे छिपाने के बजाय इसकी जानकारी तत्काल माता पिता को दें।
इन नंबरों से रहें सावधान
प्रो. सीपी गुप्ता बताते हैं कि भारत समेत दुनियाभर के कई देशों में मोमो चैलेंज के मामले सामने आने के बाद हैथिकल हैकर्स ने सोशल मीडिया पर यूजर्स ने कुछ नंबर ट्रेस किए हैं, जिनसे उन्हें इस गेम को खेलने को इंविटेशन मिले हैं। एक यूजर का कहना है कि अगर 813 (जापान), 52 (कोलंबिया) और 57 (मैक्सिको) के कंट्री कोड के साथ व्हाट्सऐप पर कोई भी मैसेज आए तो उसका रिप्लाय न करें। वहीं गेम का हिस्सा बनते बनते बचे कुछ यूजर्स ने मैसेज के स्क्रीन शॉट्स भी शेयर किए हैं, जिनमें नंबर भी साफ दिखाई दे रहा है। सोशल मीडिया पर शेयर किए गए स्क्रीन शॉट्स के मुताबिक +1 (628) 218-7252, +1 (615) 486-2486, +63 942 374 0467, +1 (315) 251 8545, +1 (321) 351 9739, +1 (615) 813 1201, +1 (432) 827 2179, +1 (423) 354 3158, +1 (513) 880 1601 जैसे कई नंबरों से मैसेज मिल रहे हैं।
बरतनी होगी ये सावधानी
- सोशल मीडिया पर कुछ भी पोस्ट करने से पहले सावधान रहें और अगर कोई इन्विटेशन लिंक मिलती है, तो उसे तुरंत ब्लॉक कर दें या फिर इसकी सूचना पुलिस को दें।
- अपने सोशल मीडिया अकाउंट के पासवर्ड को समय-समय पर बदलते रहें।
- माता-पिता को अपने बच्चों के मोबाइल फोन पर नजर रखें और चेक करते रहें कि ऑनलाइन पर बच्चा क्या और किससे बात कर रहा है।
- माता-पिता को अपने बच्चों को ऐसे किसी भी गेम को खेलने से रोकना चाहिए, जो उन्हें मोमो गेम चैलेंज खेलने के लिए उकसाता हो।
Published on:
12 Oct 2018 04:47 pm
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