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कोचिंग विद्या​र्थियों से बोली जया- आज के संघर्ष से कल बन जाता है सुहाना , लक्ष्य पर ध्यान रखें, खुश रहें

कोटा. शिक्षा नगरी में मोटिवेशनल व आध्यात्मिक गुरु जया किशोरी ने कोचिंग स्टूडेंट्स को सफलता के सूत्र बताए। विषय के समीकरणों में डूबे रहने वाले बच्चों को जया किशोरी ने श्रीकृष्ण अर्जुन व कर्ण-दुर्योधन के उदाहरण देते हुए दोस्ती के मायने बताए तो संस्कार, अनुशासन व गोल पर ध्यान केंद्रित रखते हुए सफलता व खुश रहने के सूत्र, जीवन के प्रयोग और रिश्तों की कैमेस्ट्री समझाई।

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कोटा

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Hemant Sharma

Sep 12, 2023

कोटा. शिक्षा नगरी में मोटिवेशनल व आध्यात्मिक गुरु जया किशोरी ने कोचिंग स्टूडेंट्स को सफलता के सूत्र बताए। विषय के समीकरणों में डूबे रहने वाले बच्चों को जया किशोरी ने श्रीकृष्ण अर्जुन व कर्ण-दुर्योधन के उदाहरण देते हुए दोस्ती के मायने बताए तो संस्कार, अनुशासन व गोल पर ध्यान केंद्रित रखते हुए सफलता व खुश रहने के सूत्र, जीवन के प्रयोग और रिश्तों की कैमेस्ट्री समझाई। अवसर था सोमवार शाम मोशन एजुकेशन के द्रोणा-2 कैम्पस में मोटिवेशनल टॉक शो का। जिसमें देर तक सवाल- जवाब का सिलसिला चला। मोशन के सीईओ नितिन विजय ने बच्चों, शिक्षक व अभिभावकों की ओर से मोटिवेटर जया से सवाल पूछे।

प्र. पढ़ाई के स्ट्रेस कैसे मैनेज करें ?

उ. किसी से तुलना नहीं करें और अपना बेस्ट ट्राई करें। स्ट्रेस तब आता है जब आप जो कर रहे हैं, करना नहीं चाहते। इसलिए यह मानते हुए पढाई करें कि आज पढ़ाई कर ली तो आगे का जीवन आसान होगा। कुछ पाने के लिए कुछ खोना पड़ता है। आज के संघर्ष से कल सुहाना बन जाएगा।

प्र. असफल होने पर माता पिता को कैसे फेस करें?

उ. हो सकता है आपके लिए इससे बड़ी सफलता लिखी हो, इसलिए घबराएं नहीं। यह मान कर चलें कि दुनिया में माता-पिता से ज्यादा प्यार करने वाला और कोई नहीं हो सकता। उनके लिए सक्सेस जरूरी है पर उससे भी जरूरी आप हो। आप खुश रहे और उनके लिए रहें।

प्र.खुश कैसे रहें?

उ. जो मिला है, उस पर ध्यान देंगे तो खुश हो जाएंगे। 80% दुख इसीलिए हैं कि जो है उस पर ध्यान नहीं है, जो नहीं है उस पर है।

प्र.भटकाव से कैसे बचें ?

उ.लक्ष्य पर ध्यान है तो कोई भी परिस्थति आपको भटका नहीं सकती। अध्यात्म का सहारा भी संयमित बनाता है। दोस्त ऐसे बनाए जो आपको आगे बढ़ने से नहीं रोके। कृष्ण- अर्जुन की दोस्ती को ध्यान रखें। अर्जुन भटके तो कृष्ण वहीं खड़े रहे और राह दिखाई। कर्ण ने भी दुर्योधन का दिया, लेकिन सही रास्ता नहीं दिखा सके।

प्र.आर्थिक समृद्धि सफलता का पैमाना है?

उ.यदि कोई महलों मेें रहते हुए भी दु:खी रहें तो यह सफलता नहीं, असली सफलता दूसरों को कितनी खुशी दे रहे हैं और खुद कितना खुश हैं, यह है। मेहनत, ईमानदारी से अर्जित धन ही सच्ची सफलता है।

प्र.शिक्षक व अभिभावकों के लिए क्या जरूरी?

उ.शिक्षक बच्चों को डिमोटिवेट नहीं करें। हर बच्चे में अलग टैलेंट होता है, उसकी तारीफ कर उसे निखारें। अभिभावक भी बच्चे की रुचि के अनुसार उसे आगे बढ़ाने का प्रयास करें।

प्र. सफलता में किस्मत का योगदान कितना होता है?

उ.जितनी मेहनत करोगे, किस्मत उतना ही साथ देगी। इसलिए मेहनत पर ध्यान दें।