कोटा. मुकुन्दरा हिल्स टाइगर रिजर्व मंे बाघोंं की ट्रेकिंग में वन विभाग प्रशासन ग्रामीणोंका सहयोग ले रहा है। टाइगर रिजर्व के अंदर बसे गांवों के लोगों का सहयोग लिया जा रहा है। ग्रामीण भी वन विभाग के साथ कदम से कदम मिला रहे हैं। वन कर्मियों की टीम के साथ वे भी बाघ की ट्रेकिंग में मदद कर रहे हैं। करीब दो दर्जन युवाओं को कार्य में शामिल किया गया है। मकुन्दरा हिल्स टाइगर रिजर्व के उपवन संरक्षक टी मोहन राज का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्र के जंगलों से भलिभांति परिचित होते हैं, वे विभाग के अच्छे सहयोगी बन सकते हैं। इसी के चलते उनका सहयोग लिया है।
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दिया प्रशिक्षण
सहायक वन संरक्षक दीपक चौधरी, गागरोन रेंज के क्षेत्रीय वन अधिकारी राजेन्द्र विजय व दरा के मक्खनलाल शर्मा के दिशा निर्देशन में ग्रामीण अपनी भागीदारी निभा रहे हैं। इसके लिए ग्रामीणों को बाघ की टे्रकिंग करने का प्रशिक्षण दिया है। विभाग के विषय विशेषज्ञों ने ग्रामीणों को बाघ के पगमार्क कैसे होते हैं, इन्हें कैसे लिया जाता है। अन्य वन्यजीवों के पगमार्क से बाघ के पगमार्क में कितना अंतर होता है। कैसे अंतर होता है। बाघ के बैठने की स्थिति व बैठने पर इसके निशान कैसे बनते हैं समेत अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां दी गई। साथ ही ट्रेकिंग के दौरान बरती जाने वाली सावधानियां भी बताई गई।
टाइगर आपका दोस्त
मुकुन्दरा हिल्स टाइगर रिजर्व में पिछले एक पखवाड़े से टाइगर के खुले जंगल में होने से वन विभाग टाइगर व आसपास के गांवों के ग्रामीणों की सुरक्षा को लेकर चिंतित है। वन अधिकारी रिजर्व के आसपास के गांवों में जागरूकता अभियान चलाकर ग्रामीणों को जागरूक कर रहे हैं। रविवार को विभाग ने गागरोन गांव में ग्रामीणों से बैठक की। इसमें डॉ. कृष्णा नामा, किरण चौधरी व छात्रों ने ग्रामीणों को बताया कि टाइगर आपका दोस्त है। उन्होंने ग्रामीणों को अचानक बाघ सामने आ जाए तो कैसे व्यवहार करना है, यह भी समझाया। साथ ही ग्रामीणों से जंगल में अकेले नहीं जाने की अपील भी की। क्षेत्रीय वन अधिकारी राजेन्द्र विजय ने बताया कि जंगल में मवेशी का शिकार होने की स्थिति में सूचना वन विभाग को दें। विभाग द्वारा उसका मुआवजा दिया जाएगा।