
यूं ही नहीं कहते इसे मुकुन्दरा, 7 हजार से अधिक वन्यजीव, 200 पक्षियों की प्रजातियां, जड़ी बूटियों की भरमार
कोटा. मेरा अतीत क्या है., मैंने अब तक किसी को क्या दिया है, मैं नहीं जानती। मुझे तो इतना भर याद है कि कोटा रियासत के पूर्व शासक महारव मुकन्दराव मुझसे प्रभावित हो गए। उन्होंने दरा के पहाड़ी क्षेत्र को शिकारगाह के रूप में विकसित कर दिया। फिर चंबल के किनारे सेल्जर, कोलीपुरा से दरा व कालीसिंध तक फैली पहाडिय़ों का नाम राव मुकुन्द सिंह के नाम से ही मुकुन्दरा कर दिया गया।....हां मैं ही वो मुकुन्दरा हूं। चंबल की धरा कोटा से बूंदी, झालावाड़ व चित्तौडगढ़़ जिलों में मैं करीब 760 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में मैं फैली हूं।
यह मैं इसलिए नहीं बता रही हूं कि मुझमें अहम है। इसलिए कह रही हूं कि चंबल की धरा पर विकास की धारा सदा बहती रहे। मुझसे आपको और मुझे आपस से काफी उम्मीदें हैं। ईश्वर ने मेरी गोद को जीवों की विविधताओं से भरा है। मुझे मां चर्मण्यवती का भी तो पूरा वरदान मिला है।
आसमा छूते पर्वत की शृंखलाएं, दूर तक हरे भरे विशालकाय वृक्ष, झाडिय़ां, कहीं जड़ी-बूटियां सभी से ईवर ने मुझे नवाजा है। इन सभी में आपको अपना भागीदार बना सकूं। यह सब मैं आपको सच कहंूं तो मेरी शोभा । कहीं आशाएं व उम्मीदें भी इस लिए कि मैं चिरकाल तक मेरे अपनों को समृद्धता की ओर ले जा सकूं। वक्त के थपेड़ों ने मुझे अनदेखी का दर्द दिया। आवश्यकता से अधिक मेरा दोहन किया गया। कुल्हाडिय़ां चलाई और मशीनों से खोद कर मुझे खोखला किया गया। लेकिन लंबे प्रयासों के बाद 9 अप्रेल 2013 को मुझे मुकुन्दरा हिल्स टाइगर रिजर्व का नाम दिया गया। मैने खुद को सुरक्षित महसूस किया। अब मेरा फर्ज है कि प्रकृति के रक्षक के रूप में महत्वपूर्ण जीव बाघों को फलता फूलता देख सकूं। मेरी आभा बरकरार रहे। मुझे प्रेम से सींचने वालों को मैं अपने खजाने से वह सब कुछ बांट सकूं जो मेरे पास है। रोजगार दे सकूं। क्षेत्र के आर्थिक विकास को चार चांद लगा सकूं।....बस विनती .... मेरी सूरत न बिगाडऩा।
ऐसी है मकुन्दरा:वन्यजीवों से आबाद
टाइगर रिजर्व में वाटर पाइंटों के आधार पर वर्ष 2017-2018 में की गई वन्यजीवों की गणना के अनुसार 25 पैंथर, 114 जरख, 51 लोमड़ी, 1178 नील गायें,पाटागोह, चौसिंगा,762 चीतल समेत 6 हजार 989 वन्यजीव देखे गए। इसके बाद ट्रांजेक्ट लाइन से सेंसेज शुरू हो गई। विभाग के अधिकारी मानते हैं कि इन दो वर्षों में वन्यजीवों की संख्या में संभवतया इजाफा हुआ है।
ये दुर्लभ लेकिन हमारे यहां
विभाग के उपवन संरक्षक टी मोहन राज व सहायक वन संरक्षक रणबीर सिंह भंडारी बताते हैं कि चंबल में मिलने वाला उदबिलाव काफी रेयर है। यह चंबल के सिवा कहीं नहीं मिलता। डॉ कृष्णेन्द्र नामा बताते हैं कि उद्बिलाव आईयू सीएन की रेड लिस्ट में है,लेकिन चंबल मेंं करीब 42 उदबिलाव हैं। वाइल्ड लाइफर बनवारी यदुवंशी ने हाल ही में नए परिवार को यहां पर देखा है।
विविध पक्षियों का कलरव
मुकुन्दरा हिल्स में पक्षी की सवा दौ सौ प्रजातियां है। इनमें के्रेसअेड सरपेंट, ईगल, शॉर्ट टोड,पैराडाइज फ्लाई केचर, सारस क्रेन, स्टोक बिल किंग फिशर, कलर्ड स्कोप्स आउलग्रीन पीजन, गोल्एन ओरिओल,बैबलर,गागरोनी तोता, टुईंया तोता,एलेक जेन्डेरियन पैराकीट समेत कई प्रजातियां हैं।
गिद्दो से भी समृद्ध
लोंग बिल्ड वल्चर दुनिया में खतरे में हैं। लेकिन चंबल की कराईयों के बीच काफी संख्या में गिद्द हैं। पक्षी के जानकारों की मानें तो टाइगर रिजर्व में साउथ ईस्ट ऐशिया की सबसे बड़ी ब्रिडिंग कॉलोनी है। मोटे अनुमान के तौर पर चंबल में इस समय 200 के करीब इंडियन वल्चर है। करीब 50 की संख्या मेंं व्हाइट रुम्पेड वल्चर की संख्या 50 के करीब है। गिद्दों की यह प्रजाति चंबल पर नेस्टिंग करती है। हाड़ौती भर में किंग वल्चर की संख्या 15 से 20 है। पॉम सिवेट भी खासी संख्या में हैं।
वनस्पतियों की भरमार
टाइगर रिजर्व में हालांकि अब तक पेड़ों की गिनती नहीं की है, लेकिन वन मेंं विभिन्न प्रजातियों की वनस्पति है। तेंदू, पलाश, पीलू गुर्जन, महुआ, बेल, अमलताश, जामून पीपल, इमली, , अर्जुन, कैम, आंवला समेत कई प्रजातियों के पेड़ हैं। कढ़ाया मुकुन्दरा के अलावा कम ही जगहों पर मिलता है। खेर से भी मुकुन्दरा आबाद है।
417 प्रकार की प्रजातियां
जेडीबी कॉलेज में एसोसिएट प्रो. फातिमा सुल्तान के अनुसार मुकुन्दराहिल्स टाइगर रिजर्व में करीब सवा चार सौ के करीब वनस्पतियां हैं। उपयोगी लकडी के वृक्ष की 17,एग्रीकल्सर प्लांट 11,ईंधन योग 32 ,फल वाले पेड़ों की 20 व चारा 21, गम व गौंद वाले पेड़ों की 20, मेडिशनल वेल्यू वाले पेड़ों की 52 प्रजातियां हैं।
बोलती विरासत
प्राकृतिक छटा के साथ मुकुन्दरा हिल्स टाइगर रिजर्व विरासत से भरा पड़ा है। गागरोन का किला, रावठा महल, अबली मीणी का महल, भैसरोडगढ़ फोर्ट, शिकारमाले, बाड़ोली समूह, अबली मीणी का महल समेत कन्य दर्शनीय स्थल हैं।
दर्शकों के लिए खुलने का इंतजार
Published on:
12 Mar 2020 12:21 pm
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