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कोटा .कोचिंग के बाद कोटा का भविष्य सिर्फ पर्यटन पर ही निर्भर है और ये जगह यायावरों के लिए किसी जन्नत से कम नहीं है। यहां एक दो नहीं बल्कि टूरिज्म के 19 सेक्टर मौजूद हैं। टूरिज्म वैरायटी की इतनी बड़ी रेंज राजस्थान के किसी दूसरे शहर के पास नहीं है। बस जरूरत है उन्हें प्रमोट और एक्सप्लोर करने की।
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राजस्थान के टूरिज्म सेक्टर में कोटा की भागीदारी बहुत देर से शुरू हो रही है, लेकिन जो शहर पहले से सक्सेज हासिल कर चुके हैं, उनकी कमियों से सीख लेकर हम कोटा में सबसे बेहतर पर्यटक सुविधाएं उपलब्ध करवा सकते हैं। कल्चर और हैरिटेज तो राजस्थान के हर शहर की थाती है, लेकिन कोटा के पास नवाचारों की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। एजुकेशन टूरिज्म, इवेंट टूरिज्म, एक्सेसेबल टूरिज्म और हाइवे टूरिज्म जैसे नए मौकों को भुनाकर कोटा पयर्टकों को आकर्षित करने की प्रतिस्पर्धा में सूबे के बाकी शहरों से काफी आगे निकल सकता है। इन सबके बीच मुकुंदरा में टाइगर आने के बाद वाइल्ड लाइफ टूरिज्म तो कोटा के लिए ट्रंप कार्ड साबित होगा।
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उठाने होंगे ये कदम
घरेलू पर्यटक : कोचिंग इंडस्ट्री की वजह से सालाना 6 लाख से ज्यादा घरेलू पर्यटक कोटा के कोटे में रिजर्व रहते हैं। जिन्हें पर्यटन से जोडऩे के लिए सरकार और पर्यटन विभाग को आगे आकर कोचिंग संस्थानों के साथ एमओयू साइन करने चाहिए, ताकि इन लोगों को पर्यटन से सीधे जोड़ा जा सके।
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एक्सेसेबल टूरिज्म : सेवन वंडर्स और केएसटी की खूबसूरती की चर्चा देश में होने लगी है। बावजूद इसके ये जगह अब भी विकलांग लोगों की पहुंच से दूर है। पर्यटन विभाग और सरकार यदि पर्यटन स्थलों पर व्हीलचेयर का इंतजाम करे तो कोटा राजस्थान का इकलौता शहर होगा जहां एक्सेसेबल टूरिज्म का अट्रेक्शन मौजूद रहेगा।
प्रमोशन : कोटा के प्रमोशन की कमी हमेशा खलती है। इसे दूर करने के लिए पर्यटन विभाग को बड़े पैमाने पर प्रमोशनल एक्टिविटीज करनी होगी। इवेंट ऑर्गेनाइज करने के साथ-साथ सोशल मीडिया प्रमोशन का बेहतर विकल्प साबित हो सकता है।
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ट्रंप कार्ड : टाइगर आने के बाद कोटा की वाइल्ड लाइफ टूरिज्म का ट्रंप कार्ड है। रणथंभौर में टाइगर के अलावा टूरिस्ट के लिए दूसरा कोई अट्रेक्शन मौजूद नहीं है। जबकि कोटा में चम्बल की कराइयां, कोलीपुरा से लेकर गरडिया और गेपरनाथ की मनोहारी घाटियां, जवाहर सागर और आलनिया से लेकर चूलिया फॉल, 2732 तरह की वनस्पतियां, 300 से ज्यादा प्रजातियों के वन्यजीव,225 तरह के पक्षियों की प्रजातियों के साथ-साथ इंसानी सभ्यता के 10 लाख साल से ज्यादा पुरानी वो निशानियां मौजूद हैं जिन्हें आदि मानव ने रॉक पेटिंग की शक्ल में पत्थरों पर उकेरा था। इस खासियत को एक्सप्लोर करने की सबसे ज्यादा जरूरत है, क्योंकि विदेशी पर्यटकों के लिए यही सबसे बड़ा अट्रेक्शन साबित होगा।
ये सेक्टर हैं मौजूद
ईको, वाइल्ड लाइफ, हैरिटेज एंड कल्चर, नेचर, एज्युकेशन, स्पोट्र्स, एडवेंचर, स्प्रिचुअल, फूड, फिल्म शूटिंग, एग्रीकल्चर, ट्राइबल एंड विलेज, एमआईसीई इंडस्ट्री, मेडिकल एंड वेलनेस और हाईवे टूरिज्म।
पधारो म्हारे देश
वर्ष घरेलू पर्यटक विदेशी पर्यटक
2014- 51467 -3516
2015 - 90589 -2574
2016- 89546 -1778
2017 -202298- 1860
होटल कमरे बैड
181 -3762 -7456
-डॉ. अनुकृति शर्मा
एसोसिएट प्रोफेसर, कोटा विवि
Published on:
03 Jul 2018 03:29 pm
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