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कोटा की इस कॉलोनी में बसे हैं 600 मोर, रोज हो रहा एक का शिकार

कोटा की आईएल कॉलोनी में बसे 600 मोरों की जिंदगी दांव पर लगी है। वे जैसे ही दाना चुगने जमी पर आते हैं तो श्वान उन पर हमला कर देते हैं।

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कोटा

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Zuber Khan

Mar 29, 2018

peacock hunting

कोटा . शाम 6 से 7 बजे के दरम्यान का वक्त, आईएल गेट से घुसते ही बांयी ओर जाने वाली गली में अन्दर कुछ कदम पर...। लोग आते जा रहे थे और मक्का का दाना किनारे डाल रहे थे। फिर आगे बढ़ जाते। दाने को तरसते मोर चुग्गा आते ही चहक उठते हैं.....और फिर?...फिर ऐसा नजारा कि कुछ क्षण पहले मन में आई खुशी काफूर हो गई, उल्टे चिंता के भाव में डूब गए। आस-पास घात लगाए बैठे श्वान मोरों पर लपक पड़े। बेचारे मोर दाना छोड़ जान बचाने को भागे।

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श्वान और सूअरों ने झपटने की कोशिश भी की, कुछ हमने दुत्कारा तो शिकारी इधर-उधर हो गए....! पर क्या रोज ऐसे हरकारा हो जाता है, मोर झपट्टे से छूटकर जान बचा लेते हैं? जी नहीं! सैंकड़ों राष्ट्रीय पक्षी की जान सांसत में होने का मुद्दा गर्माने के बाद भी न तो वन विभाग और ना ही नगर निगम-यूआईटी ने यहां श्वान से मोरों की रक्षा का कोई प्रबन्ध किया है। घात लगाए बैठे दर्जनों श्वान-सूअर रोज मोरों को अब भी अपना ग्रास बना रहे।

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'राजस्थान पत्रिका टीम ने शाम 6 से 7 बजे तक आईएल में फिर से रियलिटी चैक किया। एक घंटे 'पत्रिका टीम यहां के हालात पर नजर बनाए खड़ी रही। इस दौरान 7-8 लोग मोरों को दाना डालने आए। हर बार लोगों के आगे बढऩे और मोरों के आते ही शिकारी झपटते दिखे। बाद में टीम ने परिसर में बने मकानों को भी देखा तो दर्जनों श्वान-सूअर धमाचौकड़ी करते नजर आए। यहां घूमने आए लोगों ने बताया कि दिनों दिन मोरों की संख्या कम हो रही है। श्वान-सूअर इन्हें नोंच रहे हैं।

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रखवाले गए तो उजड़ी दुनिया
एक समय था जब राष्ट्रीय पक्षी मोरों के चाहने वाले आईएल कॉलोनी परिसर के घर-घर में थे। मोर भी उनसे इतने हिले-मिले थे कि उनके हाथों में रखा दाना चोंच से उठाकर खा लेते थे। लेकिन, जब से सरकार ने इन रखवालों को उजाड़ा, राष्ट्रीय पक्षियों की जैसे दुनिया ही उजड़ गई। शिकारी घुसने लग गए। वीरान पड़े मकानों में दिनभर आवारा श्वान धमा चौकड़ी मचाने लगे।

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कर चुके हैं शिकायत
लोगों ने बताया कि यहां पर श्वान अधिक होने की शिकायत वे कई बार नगर निगम प्रशासन से कर चुके हैं, लेकिन ध्यान नहीं दिया जा रहा। इससे यहां पर इनकी तादाद अधिक होती जा रही है।