श्वान और सूअरों ने झपटने की कोशिश भी की, कुछ हमने दुत्कारा तो शिकारी इधर-उधर हो गए....! पर क्या रोज ऐसे हरकारा हो जाता है, मोर झपट्टे से छूटकर जान बचा लेते हैं? जी नहीं! सैंकड़ों राष्ट्रीय पक्षी की जान सांसत में होने का मुद्दा गर्माने के बाद भी न तो वन विभाग और ना ही नगर निगम-यूआईटी ने यहां श्वान से मोरों की रक्षा का कोई प्रबन्ध किया है। घात लगाए बैठे दर्जनों श्वान-सूअर रोज मोरों को अब भी अपना ग्रास बना रहे।