
navratra special: और भक्तो ने रख दिया माता का नाम डाढ़ देवी ! जानिए क्यों प्रसिद्ध है राजस्थान का यह मंदिर
कोटा. नवरात्र में देवी की महिमा का गुणगान, पूजन व दर्शन खास फल देने वाला माना गया है। देवी की प्रसन्नता के लिए कोई व्रत रखता है तो कोई उपवास रखते हैं कोई देवी के पाठ में तल्लीन हो जाते है। यूं तो हर पर मां श्रेष्ठ है लेकिन नवरात्र की बात ही न्यारी है। नवरात्र में दर्शन पूजन का खास फल मिले, कुछ इसी तरह के दृष्टिकोण से अब नौ दिन तक चर्मण्यवती नदी के शहर कोटा में स्थित मंदिरों के दर्शन कराएंगे...जानिए डाढ़ देवी माता के बारे में...
शहर के समीप एक बरसाती नदी के किनारे डाढ़ देवी का मंदिर स्थित है। देवस्थान विभाग में संकलित जानकारी के अनुसार इतिहासकार इसे आठवीं-दसवीं शताब्दी का मानते हैं।मंदिर में प्रतिमा प्राचीन है लेकिन मंदिर का स्वरूप जीर्णोद्धार से परिवर्तित हो गया है। डाढ़ देवी वास्तव में रक्त दंतिका देवी है, क्योंकि देवी की डाढ़ बाहर निकली हुई है। इस कारण लोगों ने देवी का नाम डाढ़ देवी कर दिया और मंदिर इसी नाम से विख्यात हो गया।
मंदिर उत्तरामुखी है और इसके सामने कुण्ड है। मंदिर श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केन्द्र है। नवरात्र में यहां मेला लगता है। रसोई व गोठ बाटियांें के आयोजन होते रहते हैं। डाढ़ देवी कैथून के तंवर क्षत्रियों की इष्ठ थी। रियासतकाल में नवरात्र दशहरा के समय कोटा के महाराव देवी के पूजन के लिए लवाजमें के साथ जाते थे। पूजन के समय तोप दागी जाती थी।
कुछ बदलाव के साथ कुछ परम्पराएं अब भी निभाई जाती है। आज भी पूर्व राजपरिवार के सदस्य नवरात्र में दाढ़ देवी के दर्शन व पूजन को जाते हैं। वर्तमान में मंदिर की व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी देवस्थान विभाग के पास है
Published on:
08 Apr 2019 10:00 pm
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