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Kota Doria…साड़ी के साथ अब कोटा डोरिया लहंगे ने दुनियाभर में जमाई धाक

नेशनल हैण्डलूम दिवस विशेष .. जमाने के हिसाब से तकनीकी में भी आ रहा बदलाव- सोशल मीडिया बना बुनकरों का साथी, ऑनलाइन मिलने लगे ऑर्डर

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Kota Doria...साड़ी के साथ अब कोटा डोरिया लहंगे ने दुनियाभर में जमाई धाक

Kota Doria...साड़ी के साथ अब कोटा डोरिया लहंगे ने दुनियाभर में जमाई धाक

रणजीतसिंह सोलंकी ..कोटा. देश-दुनिया में जब भी कोटा की बात आती है तो कोटा कोचिंग, कोटा स्टोन, कोटा कचौरी और कोटा डोरिया साड़ी का जिक्र जरूर होता है। चार 'क' की बदौलत कोटा दुनिया के मानचित्र पर अपनी विशेष पहचान रखता है। इसमें कोटा डोरिया का नाम सबसे ऊपर रहता है। बुनकरों के हाथों से कोटा डोरिया के ऐसे उत्पाद तैयार किए जाते हैं, जिनकी दुनिया कायल है। कैथून, कोटसुआं समेत एक दर्जन गांवों में कोटा डोरिया के उत्पाद तैयार हो रहे हैं। यहां कोटा डोरिया की डेढ़ से दो लाख तक की साडिय़ां तैयार होती हैं। देशभर की महिलाएं कोटा डोरिया की साडियों को बेहद पसंद करती हैं। कैथून की कोटा डोरिया साडियां व अन्य उत्पादों की देश के कोन-कोने में अच्छी मांग है। सोशल मीडिया बुनकरों का नया साथी बना है। अब देश-विदेश से बुनकारों के पास ऑनलाइन ऑर्डर आने लगे हैं। कोटा डोरिया के चार हजार से ज्यादा लूम हैं, जहां उच्च गुणवत्ता की कोटा डोरिया मार्का साडियों तैयार होती हैं। यहां के बुनकरों का यह पुश्तैनी काम है। ऐसे होती है तैयारहथकरघा पर ताना-बाना से निर्मित की जाने वाली साडियों को बुनकर विशेष रूप से सिल्वर, गोल्डन जरी, सूत, कॉटन के धागों के मिश्रित रूप से उपयोग करते हैं। ये उच्च गुणवत्ता के धागे बैंगलूरु, सूरत, कोयम्बटूर से मंगवाए जाते हैं। कोटा डोरिया की सिल्वर, गोल्डन, जरी, सूत, कार्टन के धागों से साडियों का निर्माण किया जाता है।
दक्षिण भारत में ज्यादा डिमांड

कैथून व कोटसुआं में बनने वाली अस्सी फीसदी कोटा डोरिया की दक्षिण भारत के हैदराबाद, बैंगलूरु व चेन्नई में होती है। कोटा डोरिया साड़ी और दुपट्टे की पहले से अच्छी डिमांड है। अब फैशनेबल लहंगे ने विशेष पहचान बनाई है।
कोटा डोरिया का पेटेंट
नकली कोटा डोरिया पर रोक लगाने के लिए 1999-2000 में केन्द्रीय कानून भौगोलिक चिह्नीकरण अधिनियम के तहत कोटा डोरिया का पेटेंट करवाया था। इस कानून से कोटा डोरिया का नकली उत्पाद बेचना अपराध है। इसके बावजूद नकली कोटा डोरिया बेचा जाता है।
एक्सपर्ट व्यू

युवाओं का भी जुड़ाव बढ़ रहा है, जब से होश संभाला है, तब से घर में लूम से कोटा डोरिया की साडिय़ां बनाने का काम करती आ रही हूं। बुनकरों के हाथों की कलात्मकता का ऐसा हुनर है कि हर चुनौती पस्त हो जाती है। बुनकरों ने भी समय के अनुरूप अपने को ढालना शुरू कर दिया है। बाजार की डिमांड के अनुरूप कोटा डोरिया के उत्पाद तैयार किए जाने लगे हैं। पहले जहां केवल कोटा डोरिया साडिय़ां ही तैयार की जाती थी। अब दुपट्टे बनाए जाने लगे हैं। अब नया ट्रेंड कोटा डोरिया के लहंगे का आया है। फैशनेबल लहंगा तैयार किया जाता है। कोटा डोरिया लहंगे ने बाजार में धूम मचा दी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी हस्त शिल्प व दस्तकारों को प्रोत्साहन देने के लिए कटिबद्ध है और बुनकरों के लिए कई बेहतर योजनाएं शुरू की हैं। इसका धरातल पर फायदा मिल रहा है। यही कारण है कि अब बुनकर परिवारों के यूथ भी इस हुनर से जुड़ रहे हैं। केन्द्र सरकार को कोटा डोरिया को जीएसटी मुक्त करना चाहिए। कोरोना के दौरान हस्त शिल्प पर भी विपरीत असर पड़ा था अब बाजार में सभी तरह के उत्पादों की अच्छी डिमांड बन रही है।
जैनब बानो, कोटा डोरिया बुनकर, राजस्थान बुनकर रत्न पुरस्कार से सम्मानित
रैम्प पर दिखा जलवा
कुटुर इंस्टीट्यूट ऑफ फ़ैशन टेक्नोलॉजी की ओर से राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के उपलक्ष में दो दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किया गया। डायरेक्टर पूजा राजवंशी ने बताया कि कोटा डोरिया के उत्पादों को प्रोत्साहित करने के लिए फैशन शो किया गया। स्टूडेंट ने कैथून जाकर कोटा डोरिया निर्माण की विधि जानी। कोटा डोरिया की प्योर जरी की साड़ी में सोने-चांदी का वर्क होता है। इस कारण महंगी बिकती है। रिसेल वैल्यू भी अच्छी है। स्टूडेंट खुशी, सानिया, रानू, ईशिता, नुरेन एवं रोशनी ने हस्त निर्मित साडियों को अलग अलग तरीके से तैयार किया। कोटा डोरिया साड़ी पहनकर कैटवॉक किया। फैशन शो के माध्यम से यूथ को कोटा डोरिया के उत्पादों से रूबरू करवाना है।

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